पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह जारी है, लेकिन राज्य विधानसभा चुनाव होने में लगभग अब छह महीने बचे हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान ने राज्य की लीडरशिप को लेकर अब किसी बदलाव की संभावना से साफ इनकार कर दिया है। हाई कमान ने यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान पंजाब की कमान फिलहाल अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हाथों में ही रखना चाहता है। पार्टी का मानना है कि राजा वड़िंग को अभी भी जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत समर्थन हासिल है। इसलिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के पक्ष में सहमति बन रही है।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि पार्टी अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी संगठनात्मक संरचना को कमजोर नहीं दिखाना चाहती। एक सूत्र ने बताया, “राज्य के 29 जिला अध्यक्षों में से 25 वड़िंग के साथ हैं। उन्हें सात सांसदों में से चार और 18 विधायकों में से 10 का समर्थन भी हासिल है।”

पंजाब प्रभारी AICC महासचिव भूपेश बघेल ने भी पंजाब में यथास्थिति का संकेत दिया। बघेल ने कहा कि मैंने पंजाब के नेताओं से मुलाकात की, मैंने सबसे मुलाकात की। मीडिया में क्या दिखाया जाता है, इस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है। यह कठपुतलियों का खेल नहीं है। भूपेश बघेल ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी।

बघेल ने इससे पहले पार्टी नेतृत्व को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जमीनी स्थिति, विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा वड़िंग के खिलाफ अपनाए गए कड़े रुख पर प्रकाश डाला गया था। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज थीं। यहां तक ​​कि सूत्रों ने यह भी संकेत दिया था कि वड़िंग पद छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।

पंजाब कांग्रेस में आंतरिक कलह तब से तेज हो गई है जब पार्टी के हाईकमान ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि वड़िंग पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि चन्नी को अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इस व्यवस्था को राज्य इकाई में परस्पर विरोधी सत्ता केंद्रों को संतुलित करने के प्रयास के रूप में देखा गया। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, चन्नी इस निर्णय से नाखुश थे। उनका मानना ​​था कि पार्टी के चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने और पंजाब में इसके प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में उभरने के बाद, वे एक बड़ी संगठनात्मक भूमिका के हकदार थे। उनके समर्थकों का यह भी कहना है कि चुनाव प्रचार समिति के पद के साथ कोई वास्तविक संगठनात्मक अधिकार नहीं आता है।

पार्टी के भीतर एकता का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम ने इसके विपरीत नए तनाव को जन्म दिया, जिसमें चन्नी के प्रति वफादार गुटों और रंधावा सहित अन्य असंतुष्ट नेताओं ने वड़िंग के नेतृत्व में आगे बढ़ने के बारे में कड़ी आपत्तियां व्यक्त कीं।

राज्य इकाई में आंतरिक कलह जारी रहने के बावजूद, पार्टी सूत्रों ने कहा कि वड़िंग से असंतुष्ट नेताओं से धीरे-धीरे बातचीत की जाएगी और उन्हें शांत किया जाएगा। एक सूत्र ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा और मतभेद होना स्वाभाविक है। जो लोग असंतुष्ट हैं , चाहे उनके कारण कुछ भी हों उनसे पार्टी हाई कमान और वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा उचित समय आने पर बात की जाएगी और उन्हें शांत किया जाएगा।

यह उथल-पुथल पंजाब कांग्रेस में पहले के गुटबाजी के दौर की याद दिलाती है। चन्नी, जिन्होंने हाल ही में दिल्ली में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने वड़िंग के नेतृत्व से अपनी असंतुष्टि खुलकर व्यक्त की है। खबरों के अनुसार, रंधावा ने भी अप्रत्यक्ष हमले में समझौतावादी नेताओं का जिक्र किया, जिससे वड़िंग ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे तत्वों के लिए कोई जगह नहीं है और आंतरिक मतभेद अंततः सुलझ जाएंगे।

2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) से बुरी तरह हारने वाली कांग्रेस एकजुट होकर और राहुल गांधी की लोकप्रियता का लाभ उठाकर भगवंत मान सरकार को कड़ी चुनौती देने की उम्मीद कर रही है। हालांकि, पार्टी हाई कमान द्वारा प्रतिद्वंद्वी गुटों को संतुलित करने के प्रयासों के बावजूद, मतभेद अभी भी स्पष्ट हैं और अनसुलझे आंतरिक कलह उस राज्य में पार्टी की संभावनाओं को कमजोर कर सकते हैं जहां यह पारंपरिक रूप से एक प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है।

चन्नी गुट से मिले पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल, बोले- राजा वड़िंग को हटाने पर कोई चर्चा नहीं, टिकट को लेकर भी दिया संदेश

पंजाब में कांग्रेस के अंदर इस वक्त खींचतान चल रही है। इसी बीच शनिवार को पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात की। चन्नी गुट के कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। पढ़ें पूरी खबर।