Datia Bypoll: मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को शुक्रवार शाम तब झटका लगा जब भाजपा ने दतिया उपचुनाव के मद्देनजर उनका टिकट काट दिया और आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा कर दी। कहा जा रहा कि नरोत्तम मिश्रा ने महीनों तक पार्टी के नाराज नेताओं के साथ बातचीत की और अपने समर्थन के लिए अलग-अलग जाति समूहों के साथ कई बैठक भी की।
30 जुलाई को दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। इस सीट से चुनाव में उतरने के लिए उन्होंने लीडरशिप से भी संपर्क बनाए रखा ताकि वह अपनी राजनीति में दोबारा वापसी कर सकें।
2023 में हारे थे नरोत्तम मिश्रा
हालांकि इसके बावजूद भाजपा ने पार्टी के बड़े चेहरों में से एक नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर दिया और दतिया सीट से संगठन के नेता और नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मौका दिया। छह बार से विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा 2008 के बाद तीन बार दतिया से विधायक बने, लेकिन 2023 विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए।
दतिया में क्यों शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन?
पार्टी की ओर से पूर्व गृह मंत्री का टिकट कटने और आशुतोष के नाम की घोषणा होने के कुछ घंटे बाद मंडल और बूथ स्तर के पार्टी के कई पदाधिकारियों ने नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में इस्तीफा दे दिया और जमकर हंगामा भी किया।
पार्टी के इस फैसले से नाराज नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम को ग्वालियर-झांसी हावे को जाम कर दिया, जो रात भर चलता रहा। दतिया प्रशासन ने इस खत्म करने के लिए उनसे बातचीत की खूब कोशिश की, लेकिन यह प्रदर्शन हिंसक हो गया और पूर्व गृह मंत्री के टिकट कटने पर भाजपा के खिलाफ नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों की पुलिस सुरक्षाकर्मियों से झड़प हो गई। इस झड़प में 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन व अन्य वाहनों को नुकसान भी पहुंचाया।
नरोत्तम ने समर्थकों से शांत रहने की अपील की
हालांकि हिंसा बढ़ता देख शनिवार को नरोत्तम मिश्रा मीडिया के सामने आए और चुप्पी तोड़ी। साथ ही अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह पार्टी का फैसला है। मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से यह कहना चाहता हूं, मैंने सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं को पेट्रोल और केरोसिन डालते देखा। कोई भी ऐसी हरकतें न करें। आप पार्टी फोरम के सामने सही तरीके से अपनी बात रख सकते हैं।”
क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों और उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया से जुड़े नेताओं ने इस मामले पर बताया कि इस फैसले के पीछे कई कारण थे, जो दतिया के स्थानीय समीकरणों से कहीं आगे थे। नरोत्तम खेमे का दावा है कि उन्हें राज्य पार्टी नेतृत्व से हरी झंडी मिल गई थी कि वे ही अकेले उम्मीदवार होंगे, इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की भी हामी थी। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा दतिया उपचुनाव लड़ने के लिए नॉमिनेशन फॉर्म खरीदने भी चले गए थे।
हालांकि, कई सूत्रों का यह भी मानना है कि केंद्रीय नेतृत्व से मिल फीडबैक ने रेड अलर्ट जारी किया था। उनके मुताबिक, “चुनावी क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा की स्थिति शुरुआती अनुमान से कमजोर था और मतदाताओं व स्थानीय नेताओं के मन में उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी (नाराजगी) थी।”
एक भाजपा नेता ने कहा, “कुछ परेशानी नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण और उनके परिवार के आसपास बने राजनीतिक माहौल को लेकर भी था। पिछले चुनाव में मनमानी की कई घटनाओं के कारण उनके बेटे के खिलाफ स्थानीय लोगों के बीच खासा नाराजगी थी और इस पर पार्टी का मानना था कि यह बात अभी भी मायने रखती है।”
इसके अलावा, राज्य भाजपा के अंदर सत्ता की खींचतान भी चल रही थी, सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव हाल के दिनों में पार्टी के कई नेताओं के दबाव का सामना कर रहे हैं।
पिछले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान, नरोत्तम मिश्रा राज्य में भाजपा के सबसे अहम राजनेताओं में से एक बन गए थे, वे चुनावी माहौल को संभालते थे, कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात करते थे। साथ ही पार्टी के चुनौती से भी निपटते थे।
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में नरोत्तम मिश्रा प्रदेश में नंबर 2 की हैसियत रखते थे और शिवराज भी नरोत्तम मिश्रा की मंजूरी के बिना गृह विभाग में कोई काम नहीं करवा पाते थे, जिससे कामकाज में दिक्कतें आती थीं।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “अगर नरोत्तम मिश्रा दतिया से जीत जाते, तो मुमकिन था कि वे किसी अहम मंत्रालय के साथ कैबिनेट में जगह बना लेते। इससे वे सत्ता के केंद्र का नया हिस्सा बन जाते, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव अभी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश ही कर रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, खुद शिवराज चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले की प्रदेश भाजपा नेतृत्व के टॉप लेवल पर बने हुए हैं। ऐसे में इस समय पार्टी नेतृत्व नरोत्तम मिश्रा को उस दायरे में वापस शामिल नहीं करना चाहता था। साथ ही पार्टी के कुछ नेता का मानना था कि नरोत्तम से पूरी तरह आगे बढ़ना भी जरूरी था। 2023 के चुनाव में उनकी हार ने उनके अजेय छवि को पहले ही डैमेज कर दिया था, जो करीब दो दशक से बनी हुई थी। संगठन के कुछ लोगों का भी मानना था कि दतिया में मुकाबला उनकी व्यक्तिगत वापसी के बजाए किसी और मुद्दे पर केंद्रित होनी चाहिए।”
आशुतोष को क्यों चुना?
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, आशुतोष तिवारी का बैकग्राउंड आरएसएस से जुडा है। आशुतोष ने डिविजनल ऑर्गनाइजेशन सेक्रेटरी के तौर पर अपने कई साल दिए हैं। साथ ही स्थानीय गुटबाजी में उनका कोई खास दखल नहीं है। ऐसे में वे इन जरूरतों के मद्देनजर वह फिट दिखे। साथ ही उन्होंने सीट के ब्राह्मण फैक्टर और जातिगत समीकरण पर मजबूत दिखे।
भाजपा के सामने अब क्या है चुनौती?
हालांकि दतिया में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। प्रदेश में बेहद कम नेताओं के पास ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा जैसा संगठनात्मक नेटवर्क है। विधानसभा चुनावों में छह बार जीत हासिल करने के दौरान उन्होंने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जो जिला पदाधिकारियों से लेकर मंडल अध्यक्षों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक फैला हुआ है। ये कार्यकर्ता के रूप में भाजपा के कम और नरोत्तम मिश्रा के प्रति अधिक वफादार हैं, ऐसे में आशुतोष के लिए इन्हें मानना लोहे के चने चबाने जैसा हो काम हो सकता है।
ऐसे में उम्मीद कि जा रही है कि भाजपा इस नुकसान को रोकने के लिए तेजी से कदम उठाएगी। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की प्राथमिकता है की नरोत्तम को आशुतोष के लिए प्रचार के लिए मनाना, ताकि जनता के सामने पार्टी की एकता का संदेश जाए और कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया जा सके कि उनका राजनीतिक भविष्य भी सुरक्षित है।
सूत्रों ने आगे कहा कि पार्टी नेताओं से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे “नाराज जिला पदाधिकारियों से संपर्क करें ताकि संगठन के भीतर असंतोष आशुतोष तिवारी के प्रचार अभियान को पटरी से न उतार दें।”
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मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार और शनिवार को पार्टी के फैसले के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। भाजपा ने शुक्रवार शाम को आगामी दतिया विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर आशुतोष को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने हंगामा काट दिया। इसी को लेकर अब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा पर तंज कसा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
