केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। जब उन्हें इसकी खबर मिली तो वो जंतर-मंतर से हजार किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर धारवाड़ में थे। सूत्रों ने बताया कि सरकारी लीडरशिप ने प्रह्लाद जोशी को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के कुछ घंटे पहले ही बताया कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। प्रह्लाद जोशी हुबली से शाम 7.30 बजे की फ़्लाइट लेकर दिल्ली वापस आए और रविवार को मंत्रालय का चार्ज संभाला।
प्रह्लाद जोशी ने X पर पोस्ट किया, “आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का चार्ज संभाला। मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे यह ज़िम्मेदारी सौंपी। मैं इसे विनम्रता और गहरी ड्यूटी के साथ स्वीकार करता हूं।”
बीजेपी को प्रह्लाद जोशी पर पूरा भरोसा
प्रह्लाद जोशी के पास उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भी है। यह समय प्रह्लाद जोशी के राजनीतिक करियर का एक अहम हिस्सा है और यह दिखाता है कि पार्टी और सरकार को उन पर कितना भरोसा है। चार्ज संभालने के बाद उन्होंने तुरंत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारियों के साथ रविवार शाम को अपने घर पर मीटिंग बुलाई, जो पेपर लीक विवाद के केंद्र में है।
धारवाड़ के रहने वाले हैं प्रह्लाद जोशी
63 साल के प्रह्लाद जोशी कर्नाटक बीजेपी के पुराने नेता हैं। उनका करियर कम उम्र में RSS से जुड़ने के साथ शुरू हुआ था। प्रह्लाद जोशी उन कई BJP नेताओं में से थे जो 1994 में हुबली के ईदगाह मैदान आंदोलन के बाद रातों-रात जाने-माने नाम बन गए थे। बीजेपी नेता उमा भारती की लीडरशिप में प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप ने कर्फ्यू तोड़कर ईदगाह मैदान में ज़बरदस्ती तिरंगा फहराने की कोशिश की, जिसमें पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत हो गई।
इस घटना को कर्नाटक का ‘मिनी अयोध्या’ कहा गया, जिससे हुबली शहर में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए और लंबे समय में बीजेपी को नॉर्थ कर्नाटक में अपनी पकड़ बढ़ाने में मदद मिली। इसकी वजह से ही बीजेपी को कर्नाटक की सत्ता में आने का रास्ता मिला। प्रह्लाद जोशी 1995 से 1998 तक बीजेपी के धारवाड़ ज़िले के अध्यक्ष और 1998 से 2003 तक उसी ज़िले में बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी रहे।
धारवाड़ से सांसद हैं जोशी
कर्नाटक बीजेपी के अहम ब्राह्मण नेताओं में से एक प्रह्लाद जोशी को 2004 के लोकसभा चुनाव में धारवाड़ नॉर्थ से टिकट मिला। तब से वे कोई संसदीय चुनाव नहीं हारे हैं। 2008 में डीलिमिटेशन के बाद धारवाड़ नॉर्थ का वजूद खत्म होने के बाद से प्रह्लाद जोशी को धारवाड़ से टिकट मिला और उन्होंने जीत हासिल की।
प्रह्लाद जोशी पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के करीबी थे, जो कर्नाटक में बीजेपी को आगे बढ़ाने वाले लोगों में से एक थे। जब 2013 में पूर्व सीएम और बीजेपी के पुराने नेता बी एस येदियुरप्पा ने पार्टी छोड़ी तो प्रह्लाद जोशी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2018 में अनंत कुमार के निधन के बाद से प्रह्लाद जोशी की दिल्ली में पकड़ और तेज हो गई। 2019 में उन्हें संसदीय मामलों का मंत्री और कोयला और खनन मंत्री बनाया गया।
कर्नाटक की राजनीति में उनकी अहमियत तब साफ़ हुई, जब 2021 में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई हुबली, बेंगलुरु और नई दिल्ली में प्रह्लाद जोशी की बेटी की शादी में शामिल हुए। वह कर्नाटक के प्राइमरी स्कूलों के लिए मिड-डे मील प्रोजेक्ट से भी जुड़े हैं।
पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में प्रह्लाद जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और मिनिस्ट्री ऑफ़ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी की ज़िम्मेदारी दी गई थी। खाद्य मंत्री के तौर पर प्रहलाद जोशी नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट, 2013 के प्रोविज़न के अनुसार सबसे बड़े वेलफेयर प्रोग्राम ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ को चलाने में शामिल हैं। रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्टर के तौर पर वह मोदी सरकार के सबसे बड़े प्रोग्राम में से एक PM सूर्य घर योजना को शुरू करने के लिए ज़िम्मेदार रहे हैं।
उपभोक्ता मामले के मंत्री के तौर पर प्रह्लाद जोशी की कीमतों पर नज़र रखने और ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई को मैनेज करने में अहम भूमिका है। प्रह्लाद जोशी गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई वाले इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप के मेंबर में से एक हैं, जो जरूरी चीज़ों की कीमत की स्थिति का मूल्यांकन करता है और पॉलिसी से जुड़े फ़ैसलों की सिफारिश करता है।
क्राइसिस मैनेजर की भूमिका में जोशी
शिक्षा मंत्रालय का चार्ज दिए जाने से पहले सत्ता के गलियारों में ऐसी अटकलें थीं कि प्रह्लाद जोशी को कर्नाटक वापस भेजा जा सकता है ताकि सालों की गुटबाज़ी के बाद राज्य बीजेपी को फिर से संभाला जा सके। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस-वोटिंग की घटना और राज्य के बीजेपी नेताओं के बीच लगातार झगड़े ने मौजूदा लीडरशिप की सबको काबू में रखने और कांग्रेस से मिलकर लड़ने की काबिलियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रह्लाद जोशी की झगड़े सुलझाने की काबिलियत 2024 में तब दिखी जब उन्होंने हरियाणा और दिल्ली के बीच शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की चिंताओं को हल करने में अहम भूमिका निभाई।
2023 में जनता दल (सेक्युलर) के BJP के साथ गठबंधन करने से पहले प्रह्लाद जोशी के मौजूदा कैबिनेट साथी और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी ने उन पर उनके जैसे ‘बांटने वाले ब्राह्मण नेताओं’ और दक्षिण कर्नाटक के नेताओं के बीच फर्क करके मज़ाक उड़ाया था। यह कमेंट 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले किया गया था, जब ऐसी अटकलें थीं कि अगर पार्टी चुनाव जीतती है तो प्रह्लाद जोशी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
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NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दबाव के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया है। वे पिछले वर्षों में बीजेपी के सबसे टिकाऊ और बड़े मंत्री के तौर पर उभरे थे। उन्हें एक कुशल मैनेजर और राजनीतिक प्रबंधक के तौर पर देखा जाता है, जो कि आलाकमान के करीबी भी हैं। पढ़िए पूरी खबर…
