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इन दिनों चरम पर है कट्टरता, हिंदू खुद को ISIS आतंकियों की तरह दिखा रहे हैं: तस्लीमा नसरीन

तस्लीमा नसरीन लिखती हैं कि भारत में जितनी धार्मिक असहिष्णुता बढ़ेगी उतना ज्यादा नफरत बढ़ेगी। पद्मावती का विरोध भी इसी का एक उदाहरण है।

बांग्लादेशी मूल की लेखिका तस्लीमा नसरीन

बांग्लादेश से निर्वासित मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कट्टरता पर अपने ताजा लेख में लिखा है कि इस तरह की राजनीति ने एक बार हिंदुस्तान को बांटा था और फिर से वैसा ही होता दिख रहा है। राजस्थान के राजसमंद में हुई अफराजुल नाम के मुस्लिम मजदूर की हत्या के मामले को उठाते हुए तस्लीमा ने लिखा कि ठीक ISIS आतंकियों की तरह उसकी हत्या कर वीडियो को सोशल मीडिया पर डाला गया। इस हत्या को अंजाम देने वाले आरोपी शंभूलाल के बारे में तस्लीमा ने लिखा कि आखिर उसके अंदर ISIS जैसी हिम्मत कहां से आई। क्या उसके मन में ये बात बैठ गई है कि ऐसा करने पर उसे सजा नहीं होगी बल्कि तारीफ मिलेगी।

तस्लीमा ने लिखा कि जब मैंने ट्विटर पर इस घटना की निंदा की तो ढेर सारे लोग शंभूलाल के सपोर्ट में खड़े हो गए। इससे पहले मैंने जब भी गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों के मारे जाने के खिलाफ लिखा तो मुझे धमकियां मिलीं कि मैं भारत में रहकर हिंदुओं के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकती। तस्लीमा कहती हैं कि इस वक्त असहिष्णुता चरम पर है। मैंने इससे पहले भी हिंदू रीति रिवाजों पर सवाल उठाए हैं लेकिन मुझे कभी इस तरह से धमकियां नहीं मिली हैं।

तस्लीमा नसरीन लिखती हैं कि भारत में जितनी धार्मिक असहिष्णुता बढ़ेगी उतना ज्यादा नफरत बढ़ेगी। पद्मावती का विरोध भी इसी का एक उदाहरण है। तस्लीमा के अनुसार शंभूलाल द्वारा अफराजुल के मर्डर को टीवी चैनल्स ने हमेशा की तरह के एक सामान्य क्राइम जैसे दिखाया। जबकि ये अलग तरह की हत्या थी। ISIS वाले भी मुंह पर नकाब लगाकर हत्या का वीडियो वायरल करते हैं लेकिन शंभूलाल के अंदर तो किसी तरह का भय नहीं था।

तस्लीमा ने ये भी लिखा कि जो लोग शंभूलाल का सपोर्ट कर रहे हैं वो शायद ये दिखाना चाह रहे हैं कि हिंदू भी मुसलमानों की तरह कट्टर हो सकते हैं। भले शंभूलाल को जेल हो जाए लेकिन उसकी तरह से हजारों भारत की सड़कों पर आजाद घूम रहे हैं।

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