अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध भीषण रूप ले चुका है। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि वह नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे। ट्रंप ने कहा कि वो ईरान की मिसाइलें बर्बाद करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी की राय इस मामले पर कुछ अलग है। उन्होंने X पर एक पोस्ट कर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध का न्यूक्लियर या मिसाइल प्रोलिफरेशन या स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म से कोई लेना-देना नहीं है।
ब्रह्मा चेलानी ने आगे कहा कि अगर अमेरिका की चिंताएं सच होतीं तो उसके निशाने पर पाकिस्तान होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके पास 170 से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। अमेरिकी एजेंसियों का भी मानना है कि पाकिस्तान लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। इसके अलावा पाकिस्तान समर्थित कई आतंकी नेटवर्क वेस्ट में हुए हमलों में लिप्त पाए गए हैं। 9/11 का मुख्य ओसामा भी पाकिस्तान में ही मिला था।
ब्रह्मा चेलानी ने यह भी कहा कि ईरान NPT (परमाणु अप्रसार संधि) पर साइन करने वाले देशों में शामिल है। वह परमाणु हथियार बनाने से दूर है लेकिन फिर भी अमेरिका ने उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जबकि वह पाकिस्तान के साथ नरमी बरत रहा है।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध की असल वजह जिओ पॉलिटिकल है, न कि सुरक्षा। अमेरिका का मकसद इस क्षेत्र में ताकत का संतुलन बदलना है और ईरान के शासन को अपने हिसाब से चला सके। इसके अलावा वह Strait of Hormuz को भी कंट्रोल करना चाहता है, जहां से दुनिया के तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है।
अता हसनैन बोले- ईरान के पास मिसाइलें लेकिन जवाब देना आसान नहीं
इजरायल-ईरान युद्ध पर भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी और विश्लेषक सैयद अता हसनैन ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और काफी जटिल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के पास तकनीक और सेना के मामले में बढ़त है, खासकर हवाई। इसकी वजह से ईरान पर मिसाइल ताकत होने के बाद भी जवाबी कार्रवाई सीमित हो जाता है। उन्होंने कहा कि ईरान ने आस-पास के खाड़ी देशों मेंं मौजूद अमेरिकी बेसों पर हमले किए हैं लेकिन इससे नकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा हो गई है।
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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की 1989 में मृत्यु के बाद खामेनेई ने सत्ता संभाला और इस्लामी गणराज्य को पूरी तरह से नया रूप दिया। खोमैनी एक जोशीले और करिश्माई विचारक थे जिन्होंने शाह को सत्ता से बेदखल कर शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं का शासन स्थापित किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहांं क्लिक करें।
