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भूमाफिया पर मेहरबान क्यों है अखिलेश सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली मजाक बन गई है। हाईकोर्ट में दो विरोधाभासी फैसलों के कारण सरकार की खासी किरकिरी हुई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश.

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (पीटीआई फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली मजाक बन गई है। हाईकोर्ट में दो विरोधाभासी फैसलों के कारण सरकार की खासी किरकिरी हुई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक भूमाफिया के खिलाफ सूबे के पुलिस महानिदेशक ने कड़ी कार्रवाई का फरमान जारी किया था। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए के ईनाम की भी घोषणा की थी। लेकिन सूबे के गृह सचिव ने मौखिक आदेश पर मामले की जांच दूसरे जिले में ट्रांसफर कर दी। आमतौर पर अभियुक्त के कहने पर सरकार जांच नहीं बदलती। लेकिन इस मामले में भू माफिया ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की सिफारिश लगवा कर मुख्यमंत्री के आदेश को ही उलटवा दिया।

मेरठ के ट्रांसपोर्ट नगर थाने का हिस्ट्रीशीटर बदन सिंह उर्फ बद्दो इलाके में आतंक का पर्याय बन चुका है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूटपाट, डकैती, उगाही और जमीनों पर कब्जे के दर्जनों मामले दर्ज हैं। एक उद्योगपति राजेश दीवान की जमीन पर कब्जा करने के लिए बद्दो ने उसे हथियारों के बल पर धमकाया था। इस मामले में इस साल 17 अप्रैल को मेरठ के लालकुर्ती थाने में बद्दो और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। उद्योगपति ने भूमाफिया के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने और अपनी जान को खतरा होने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से शिकायत की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने तबके पुलिस महानिदेशक एके जैन को इस मामले में कड़ी कार्रवाई की हिदायत दी थी।

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस ने बद्दो और उसके साथियों की गिरफ्तारी के लिए उनके ठौर-ठिकानों पर लगातार छापेमारी की थी। नतीजतन सभी आरोपी फरार हो गए थे। बाद में बद्दो की गिरफ्तारी पर सरकार ने 50 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित किया था। इसी बीच अचानक पुलिस ठंडी पड़ गई और पता चला कि सरकार ने मामले की जांच मेरठ पुलिस से हटा कर बागपत पुलिस को सौंप दी गई है। 30 जून को पुलिस महानिदेशक एके जैन के रिटायर होने के बाद आरोपी बेखौफ हो गए।

उधर, उद्योगपति राजेश दीवान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले की शिकायत की। हाईकोर्ट में सरकार के वकील आरोपियों के कहने पर जांच दूसरे जिले में भेजने के सवाल पर कोई सफाई नहीं दे पाए। नतीजतन न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की खंडपीठ ने आदेश दिया कि राजेश दीवान द्वारा दर्ज कराए गए मामले की जांच पहले की तरह मेरठ पुलिस ही करेगी। इसके बाद भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

दरअसल यह मामला दस करोड़ रुपए की जमीन हथियाने से जुड़ा है। यह जमीन उद्योगपति दीवान की है। दीवान समूह ने 25 साल पहले जिन लोगों से जमीन खरीदी थी, उनसे फर्जी करार दिखा कर बद्दो समूह इस पर जबरन कब्जे की फिराक में था। लेकिन राजेश दीवान दबाव में नहीं आए। अलबत्ता उन्होंने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से साफ कहा कि अगर उनकी सरकार उन्हें सुरक्षा नहीं दे सकती तो वे उत्तर प्रदेश छोड़ देंगे। तब अखिलेश यादव ने उन्हें न्याय और सुरक्षा दिलाने और आरोपियों को जेल भेजने का भरोसा दिया था। दीवान को हैरत है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर शुरू में फुर्ती दिखाने वाली पुलिस फिलहाल हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

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