आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा काफी दिनों से चल रही थी, वो आखिरकार गुरुवार (2 मार्च, 2026) को सही साबित हुई। चर्चा यह थी कि क्या राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और वो भाजपा का दामन थाम सकते हैं, लेकिन यह बात तो आज साफ हो गई कि हां, आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच रिश्ते ठीक नहीं थे। यही वजह रही कि आज पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाकर साफ कर दिया कि यह महज शिगूफा नहीं, बल्कि वास्तविक कलह थी, लेकिन यह बात अभी साफ नहीं हो सकी है कि क्या वो भाजपा के साथ जाएंगे? या फिर पार्टी से उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को पत्र लिखकर राज्यसभा सचिवालय से मांग की है कि सदन में आम आदमी पार्टी कोटे से राघव चड्ढा को बोलने के लिए समय न दिया जाए। राजनीति के जानकार लोगों का कहना है कि पार्टी ने यह फैसला एक पल में नहीं लिया, बल्कि लंबे समय से राघव आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से अलग लाइन ले रहे थे।
सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने पर कहा कि उस संबंध में पार्टी के निर्णय से राज्यसभा सचिवालय को अवगत करा दिया गया है।
भाजपा और कांग्रेस ने क्या कहा?
भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने AAP सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने पर कहा कि राघव चड्ढा मेरे साथ दिल्ली विधानसभा में रहे हैं, वे अच्छे वक्ता हैं। यदि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने उनके बोलने पर रोक लगाई है तो यह पूरी तरह तानाशाही है। उन्होंने कहा कि मैं अरविंद केजरीवाल से पूछता हूं कि उनकी पार्टी में लोकतंत्र कहां बचा है? यदि ऐसा कोई निर्णय AAP नेतृत्व द्वारा किया गया है तो मैं उसकी निंदा करता हूं। यह उनका अंदरूनी मामला है लेकिन अपनी पार्टी के वरिष्ठ सांसद के बोलने पर आप रोक लगा दें, ऐसा किसी और पार्टी के नेतृत्व ने कभी नहीं किया।
कांग्रेस नेता मल्लू रवि ने AAP के राज्यसभा उप-नेता पद से राघव चड्ढा को हटाए जाने पर कहा कि पार्टियों और सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अब यह उम्मीद से कहीं आगे निकल गया है। इस तरह की कार्यप्रणाली लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं हो सकती।
वो घटनाक्रम जिनसे राघव चड्ढा और AAP के बीच बनीं दूरियां
पिछले कई महीनों से इस तरह के घटनाक्रम सामने आ रहे थे। जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि राघव चड्ढा और और आम आदमी पार्टी के मनमुटाव चल रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण फरवरी के अंतिम सप्ताह में देखने को मिला था। जब ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली के कथित शराब घोटाले के मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं को दोषमुक्त कर दिया।
इसके बाद पार्टी में जश्न का माहौल था। पार्टी नेता लगातार एक्स पर भाजपा पर हमलावर थे। मीडिया से मुखातिब होते हुए केजरीवाल की आंखों में आंसू आ गए थे। संजय सिंह, सिसोदिया और केजरीवाल के साथ अन्य नेता भाजपा पर साजिश के आरोप लगा रहे थे। उस दौरान राघव चड्ढा ने कोई बयान नहीं दिया था। राज्यसभा में वे लोगों से जुड़े गिग वर्कर्स और स्कूल फीस जैसे मुद्दे उठा रहे थे, लेकिन AAP नेताओं के दोषमुक्त होने पर उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। उनकी इस चुप्पी ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरियों की एक बड़ी वजह उनकी कार्यशैली रही। आम आदमी पार्टी के अंदर इस बात को लेकर असहजता थी कि राज्यसभा में वे पार्टी की नीतियों और एजेंडे को प्राथमिकता देने के बजाय उन मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे। जिनसे उनकी व्यक्तिगत छवि मजबूत हो।
राघव चड्ढा के इस रवैये से पार्टी को लगने लगा था कि वह संगठन की आवाज बनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाने में लगे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि अरविंद केजरीवाल के कभी सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा ने धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए जाने वाले पोस्ट और वीडियो से पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिह्न तक दिखना बंद हो गया। इन संकेतों ने साफ कर दिया कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच दूरियां बढ़ चुकी हैं।
इन्हीं, तमाम घटनाक्रमों को लेकर जब मीडिया ने अभी हाल ही में AAP नेता संजय सिंह से पूछा कि क्या राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी का हिस्सा नहीं हैं? इस सवाल के जवाब में संजय सिंह ने इस बात से इनकार कर दिया था। हालांकि, जब शराब नीति मामले में मिली राहत के दौरान राघव की गैरमौजूदगी और चुप्पी पर सवाल उठाया गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस बारे में वही बेहतर बता सकते हैं।
सवाल यह भी है कि इतना भरोसा अचानक टूट कैसे गया? इसकी नींव उस दौर से भी जुड़ी प्रतीत होती हैं, जब दिल्ली शराब घोटाले की आंच केजरीवाल तक पहुंची थी और पार्टी का मुखिया जेल की सलाखों के पीछे था, उस वक्त पार्टी को अपने तेज तर्रार प्रवक्ताओं की जरूरत थी, लेकिन राघव चड्ढा ने उस कठिन वक्त में पार्टी की जरूरत बनने में विफल रहे। उन्होंने अपनी आंखों की बीमारी ‘विट्रियल डिटैचमेंट’ का हवाला दिया और पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन चले गए। पार्टी के भीतर और सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से फैली कि जब सेनापति संकट में था, तब उसका सबसे खास सिपाही मैदान छोड़कर विदेश में छुट्टियां मना रहा था।
जानकार कहते हैं कि राघव चड्ढा केवल बीमारी की वजह से विदेश नहीं गए थे। क्योंकि कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान राघव का नाम भी सामने आया था। ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद राघव पर दबाव बढ़ गया था। माना जाता है कि वह अपनी गिरफ्तारी की आशंका से डरे हुए थे। इसी डर ने उन्हें पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों से दूर कर दिया। केजरीवाल जब तिहाड़ जेल में थे, तब राघव की अनुपस्थिति ने उनके रिश्तों में कड़वाहट के बीज बो दिए।
अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के अगले दिन वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि गिरफ़्तार होने वालों में अब अगला नंबर राघव चड्ढा का है। कपिल सिब्बल ने कहा था कि के कविता और अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया। अब अगले राघव चड्ढा होंगे। इसके बाद और लोगों को गिरफ़्तार किया जाएगा जो इस देश के चुनाव में मुख्य खिलाड़ी हैं।
कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स उस वक्त कह रहे हैं कि पार्टी पर संकट के समय में राघव चड्ढा दूरी बरत रहे हैं। कुछ यूज़र उनके बीजेपी जाने की अटकलें भी लगा रहे थे। सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक यूज़र ने पूछा था कि जब चुनाव सिर पर हैं और आम आदमी पार्टी के नेता जेल में हैं, तब राघव चड्ढा कहां हैं? वहीं एक अन्य यूज़र ने पूछा था कि इतना सब कुछ होने के बीच राघव चड्ढा कहां हैं? अगर आने वाले सप्ताहों में वह बीजेपी में शामिल हो जाएं, तो मुझे कोई हैरानी नहीं होगी। एक यूज़र ने पूछा था कि राघव चड्ढा कहां है? वो मौक़े से लापता हैं। क्या उन्हें ‘आप’ ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी के बाद राघव चड्ढा की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। पार्टी के पुराने नेताओं का कहना है कि अब राघव के राजनीतिक फैसलों में उनकी पत्नी का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। उनकी जीवनशैली अब एक जुझारू राजनेता की जगह एक ‘सेलिब्रिटी’ जैसी हो गई है। शादी के बाद उनके पहनावे से लेकर बातचीत के लहजे तक में बदलाव आया। इस दौरान ऐसी अफवाहें भी उड़ीं कि वह भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि उन्होंने कभी इस पर खुलकर बात नहीं की।
राज्यसभा में ‘पार्टी लाइन’ से बगावत?
पार्टी नेतृत्व की नाराजगी की एक बड़ी वजह राज्यसभा में राघव चड्ढा का व्यवहार भी रहा है। आम आदमी पार्टी चाहती थी कि राघव केंद्र सरकार को गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और विदेश नीति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर घेरें। लेकिन राघव चड्ढा ने इन मुद्दों के बजाय उन विषयों पर बोलना पसंद किया, जो सोशल मीडिया पर उनकी ‘पर्सनल ब्रांडिंग’ में मददगार हों। कई बार उन्होंने ऐसे बयान दिए जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाते थे। नेतृत्व को लगा कि राघव अब पार्टी के सिपाही नहीं, बल्कि अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं।
राघव चड्ढा ने संसद में उठाए ये मुद्दे
मोबाइल डाटा प्लांस: संसद में मोबाइल डेटा प्लांस को लेकर भी राघव चड्ढा ने मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि टेलीकॉम कंपनियां यूजर्स से पूरा पैसा लेती हैं, लेकिन बचा हुआ डेटा उसी दिन खत्म कर देती हैं। उन्होंने मांग थी कि अनयूज्ड डेटा को अगले दिन के लिए कैरी फारवर्ड किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को उनका पूरा फायदा मिल सके। साथ ही, अनयूज्ड डेटा का अगली रिचार्ज में एडजस्टमेंट और जरूरत पड़ने पर उसे परिवार या दोस्तों को ट्रांसफर करने की सुविधा भी दी जाए।
एयरलाइंस बैगेज पॉलिसी: संसद में बहस के दौरान राघव चड्ढा एयरलाइन बैगेज पॉलिसी को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने संसद में कहा था कि यदि यात्रियों का सामान ग्राम में भी ज्यादा हो जाए तो एयरलाइंस अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं, लेकिन जब फ्लाइट घंटों की देरी होती है तो यात्रियों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री से पूछा था कि क्या सरकार फ्लाइट में देरी होने पर यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कोई ठोस नीति बना रही है।
फूड इंडस्ट्री के भ्रामक विज्ञापन: राघव चड्ढा ने आरोप लगाया था कि कई बड़ी कंपनियां फलों के जूस के नाम पर चीनी मिला पेय बेच रही हैं। यह कंपनियां पैकेट पर आकर्षक तस्वीरों के जरिए लोगों को गुमराह कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे खासकर बच्चों में डायबिटीज और लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने इस पर सख्त नियम बनाने की मांग की थी।
शहरों में बढ़ता ट्रैफिक जाम: इस मुद्दे पर सवाल खड़ा करते हुए सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा था कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में लोग हर साल 100 से 168 घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। यह सिर्फ समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि इससे प्रोडक्टिविटी पर भी असर पड़ता है, साथ ही, फ्यूल की खपत बढ़ती है और प्रदूषण भी होता है। राघव चड्ढा ने इसके समाधान के लिए नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन शुरू करने की मांग की थी।
शेयर बाजार में गिरावट: इस मुद्दे को लेकर राघव चड्ढा ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण भारतीय निवेशकों को नुकसान हो रहा है। भारत इस युद्ध का हिस्सा नहीं है, फिर भी यहां के छोटे निवेशक इसकी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने छोटे निवेशकों, एसआईपी होल्डर्स और मिडिल क्लास परिवारों के लिए राहत पैकेज की मांग की थी। इसके तहत टैक्स में छूट और निवेश से जुड़े नियमों में कुछ राहत देने का सुझाव भी उन्होंने दिया था।
राघव चड्ढा की राजनीति में एंट्री?
राघव चड्ढा की राजनीति में एंट्री किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। साल 2013 में जब अन्ना हजारे का इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन अपने आखिरी दौर में था, तभी राघव चड्ढा की मुलाकात अरविंद केजरीवाल से हुई। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा राघव उस समय लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर के भारत लौटे थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राघव चड्ढा का पार्टी में पहला असाइनमेंट दिल्ली जनलोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार करने वाले अधिवक्ता राहुल मेहरा को असिस्ट करना था। उन्हें ये ज़िम्मेदारी अरविंद केजरीवाल ने सौंपी थी। राघव चड्ढा पार्टी के सबसे युवा प्रवक्ता बने और कुछ ही समय में राघव चड्ढा टेलीविजन पर आम आदमी पार्टी का चेहरा बन चुके थे।
आम आदमी पार्टी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार राघव साल 2013 में आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र बनाने वाली टीम के सदस्य थे। कुछ समय के लिए वह पार्टी के कोषाध्यक्ष भी बनाए गए। एक दशक पहले एक वॉलंटियर के तौर पर अरविंद केजरीवाल की टीम में शामिल हुए राघव चड्ढा किसी वक्त उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिने जाते थे।
साल 2019 में राघव चड्ढा दक्षिणी दिल्ली की संसदीय सीट पर चुनाव लड़े, लेकिन असफल रहे। इसके बाद 2020 विधानसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से जीत दर्ज की। मार्च 2022 में राघव चड्ढा और चार अन्य लोगों को आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उस समय राघव चड्ढा 33 साल के थे और सबसे युवा सांसद बने।
यह माना जाता है कि साल 2022 में पंजाब में मिली आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत में राघव चड्ढा ने अहम भूमिका निभाई थी। पंजाब की सफलता को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें 2022 के आखिर में गुजरात विधानसभा चुनाव की भी जिम्मेदारी सौंपी और सह प्रभारी बनाया। लेकिन वक्त के चक्रव्यूह ने राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ “सुनियोजित कार्रवाई” किये जाने का आरोप लगाया। उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री के साथ बैठक का अनुरोध किया। पढ़ें पूरी खबर।
