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कौन बनेगा अगला प्रधानमंत्री, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने की यह भविष्यवाणी

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने देश के अगले प्रधानमंत्री को लेकर भविष्यवाणी की है। जगद्गुरु ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 2019 में नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए पीएम मोदी की तारीफ भी की।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य की फाइल फोटो। (सोर्स – विकिपीडिया)

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने देश के अगले प्रधानमंत्री को लेकर भविष्यवाणी की है। जगद्गुरु ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 2019 में नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए पीएम मोदी की तारीफ भी की। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लेकर भी उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि वह किसी बड़े पद पर आसीन होंगे। उन्होंने पत्रकारों को बाताया कि रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनने के बाद उनके पास आए थे और दक्षिणा भी दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जगद्गुरु रामभद्राचार्य चित्रकूट धाम से राजस्थान के चुरु आयोजित होने वाली कथा में शामिल होने के लिए निकले थे, लेकिन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज के सौरिख थाना क्षेत्र के ग्राम झाबर नगला के पास गुरुवार (5 अप्रैल) को रात के करीब 11 बजे उनकी गाड़ी एक सांड से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे की जानकारी जगद्गुरु ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को फोन पर दी। इसके बाद प्रशासन की तरफ से उन तक मदद पहुंचाई गई। जगद्गुरु की गाड़ी को क्रेन की मदद से मौके से ले जाया गया और उन्हें जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने सर्किट हाउस में ठहराया। शुक्रवार को शाम 5 पांच बजे जगद्गुरु दूसरी कार से आगरा के लिए रवाना हुए। कन्नौज में ठहरने के दौरान पत्रकारों ने जगद्गुरु से सवाल जवाब किए।

पत्रकारों ने पूछा कि वह भविष्यावाणी के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में वह देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर किसे देखते हैं? इस पर जगद्गुरु ने कहा कि मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने पीएम मोदी को अच्छा बताया। बता दें कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज चित्रकूट के तुलसी पीठ के संस्थापक हैं और चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य हैंडीकैप्ड यूनिवर्सिटी के आजीवन चांसलर हैं। जगद्गुरु की दो महीने की आयु में ही आखों की रौशनी चली गई थी। कहा जाता है कि वह 22 भाषाओं के ज्ञाता है और संस्कृत, हिंदी, अवधि और मैथिली समेत कई भाषाओं में लेखन कर चुके हैं। उनकी गिनती नैसर्गिक कवियों में भी होती है।

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