अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल में सरकार बनाने में कामयाब रहता है तो किस नेता को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा? इसमें कांग्रेस के तीन नेताओं के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
मतदान के बाद सामने आए कई एग्जिट पोल में यूडीएफ की सरकार बनने की बात कही गई है। एग्जिट पोल में अनुमान लगाया गया है कि यूडीएफ एक दशक बाद केरल की सत्ता में वापसी कर सकता है। कुछ एग्जिट पोल में यह भी कहा गया है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा उम्मीदवार हैं।
यूडीएफ में कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने सतीशन का समर्थन किया है। आईयूएमएल के प्रदेश अध्यक्ष सादिक अली शिहाब थंगल ने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस हाई कमान ही फैसला लेगा और ऐसी उम्मीद है कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा। थंगल ने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल के गठन में पार्टी को उचित महत्व दिया जाएगा।
सतीशन, चेन्निथला और वेणुगोपाल के नाम
मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के तीन बड़े दावेदारों में वीडी सतीशन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के नाम सामने आए हैं।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि तीनों नेताओं के समर्थकों के अपने-अपने दावे हैं। कांग्रेस नेता के मुताबिक, लोगों की राय सतीशन के पक्ष में है क्योंकि उन्होंने पिछले 5 साल में केरल की विजयन सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है लेकिन कांग्रेस के ज्यादातर विधायक केसी वेणुगोपाल के समर्थक हैं क्योंकि उम्मीदवारों का चयन हाईकमान की ओर से किया गया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी मजबूत दावेदार हैं। चेन्निथला यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी हैं और वह राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी सांसद रह चुके हैं।
अहम होगी आईयूएमएल की राय
कांग्रेस हाईकमान चुनाव जीतने वाले विधायकों से बातचीत करने के बाद ही मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर अंतिम फैसला लेता है लेकिन अगर 140 सदस्यों वाली केरल की विधानसभा में यूडीएफ को मामूली बढ़त मिली तो इस गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी आईयूएमएल की राय काफी अहम होगी।
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री की लड़ाई में शामिल होने की वजह से मुकाबला काफी कठिन हो गया है।
कांग्रेस नेतृत्व ने बनाया था संतुलन
अगर इतिहास में झांककर देखें तो केरल कांग्रेस में नेताओं के बीच विवादों को सुलझाने के लिए बड़े नेताओं को केंद्र सरकार में पद दिया जाता था और संतुलन बनाने की कोशिश की जाती थी। जैसे- 1995 में के. करुणाकरण की जगह जब एके एंटनी को मुख्यमंत्री बनाया गया तो करुणाकरण को केंद्र में मंत्री बनाया गया था। इसी तरह, 2004 में जब एंटनी के बाद ओमन चांडी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई एंटनी को भी यूपीए सरकार में अहम पद दिया गया था।
हिंदू नेता ने की आईयूएमएल की आलोचना
आईयूएमएल के द्वारा सतीशन का समर्थन किए जाने के बाद केरल के प्रमुख हिंदू नेता और एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन ने कहा कि कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए, यह आईयूएमएल को तय नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईयूएमएल परेशानी और अराजकता पैदा करेगी।
एग्जिट पोल के अनुमान पर क्या बोले कांग्रेस के नेता
केरल को छोड़कर कांग्रेस को कहीं से खुशखबरी मिलती नजर नहीं आ रही है। केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ को 77 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, पुडुचेरी में आठ, असम में 30, तमिलनाडु में 2-4 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
