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प्रदेश अध्यक्ष की कमान किसे सौंपेगी भाजपा

क्या उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर किसी नए को जिम्मेदारी सौंपेगी। आखिर वह नाम किसका होगा जिसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

Author लखनऊ | April 1, 2016 00:59 am

क्या उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर किसी नए को जिम्मेदारी सौंपेगी। आखिर वह नाम किसका होगा जिसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। या फिर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को ही पद पर बने रहने का निर्देश पार्टी आलाकमान की तरफ से दिया जाएगा। ऐसे न जाने कितने सवाल हैं जिसने प्रदेश के भाजपाइयों को भ्रमित कर रखा है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं के बीच पनप रही भ्रम की स्थिति के बीच एक अप्रैल को लखनऊ में आयोजित होने वाली राज्य कार्यकारिणी में मौजूदा अखिलेश सरकार के साथ ही बहुजन समाज पार्टी की राष्टीय अध्यक्ष मायावती को भी घेरने की रणनीति तैयार की जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बीते साल दिसंबर से लेकर अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का अध्यक्ष किसे बनाया जाए। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता प्रदेश के नेतृत्व को समाप्त कर कमान खुद अपने हाथों में लेने की कोशिश में हैं। जिस उत्तर प्रदेश ने भाजपा और उसके सहायोगी अपना दल को लोकसभा चुनाव में 80 में से 73 सीटें दीं, उस राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व तीन महीने से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी यह तय नहीं कर पाया कि पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नया लाना है या पुराने को ही इस पद पर बनाए रखना है।

ऐसे में राज्य कार्यकारिणी में कार्यकर्ताओं और प्रदेश के नेताओं के मध्य उत्साह और आत्मविश्वास पैदा कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं। उत्तर प्रदेश के भाजपाइयों के मध्य पनप रही भ्रम की स्थिति विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। भाजपा की एक अप्रैल को शुरू हो रही एक दिवसीय राज्य कार्यकारिणी में विकास और कानून व्यवस्था पर अखिलेश सरकार को घेरने की रणनीति पर मंथन होगा। साथ ही प्रदेश में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के साथ हुई आपराधिक वारदातों में बसपा सुप्रीमो की खामोशी को भी पार्टी मुद्दा बना कर उन्हें घेरने की तैयारी में है। भाजपा दलितों पर हुए ऐसी सौ आपराधिक घटनाओं का जिक्र सार्वजनिक करने जा रही है जिस पर मायावती खामोश रहीं। ऐसा कर वह बसपा के पारंपरिक वोट बैंक के बीच अपनी पैठ गहरी करने की जुगत में है।

इस बाबत भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, राज्य कार्यकारिणी में नरेंद्र मोदी की सरकार के जन उपयोगी कार्यों को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को दी जाएगी। साथ ही कार्यकर्ताओं से कहा जाएगा कि वे लोगों के बीच जाकर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार के विकास के सच और बिगड़ती कानून व्यवस्था की असलियत से उन्हें अवगत कराएं।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में तीन महीने से अधिक समय के गुजर जाने के बाद भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई भाजपा के सामने कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास का संचार करना बड़ी चुनौती है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अध्यक्ष पर अनिर्णय के हालात के बीच टीम से कुछ भी कर पाने की उम्मीद करना अतिश्योक्ति अधिक है। जो कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष को लेकर इत्मीनान में नहीं हैं उनसे भाजपा आलाकमान का किसी भी तरह की उम्मीद पालना दिवास्वप्न देखने की तरह है। ऐसे में एक अप्रैल को लखनऊ में आयोजित होने वाली भाजपा की राज्य कार्यकारिणी, हकीकत से अधिक रस्म अदायगी भर बनकर रह जाए तो अचरज नहीं होगा।

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