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60 हजार बच्चों के बीच किया गया अध्ययन, समय से पहले जन्मे शिशुओं को आती हैं कई समस्याएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि हर साल दुनिया में लगभग 1.5 करोड़ बच्चे समय जन्म लेते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि विश्व में हर दस में से एक बच्चा समय से पहले जन्म लेता है। 184 देशों में प्री-टर्म जन्म की दर पांच फीसद से लेकर 18 फीसद तक है।

Author October 17, 2017 04:10 am
प्रतिकात्मक फोटो (Photo-Dreams time)

बड़े स्तर पर हुए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि प्री-टर्म यानी समय से पहले जन्मे शिशुओं को आगे चल कर पहचाने, निर्णय लेने और कई तरह की अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ सकता है। यह अध्ययन 60,000 बच्चों के बीच किया गया था। ऐसे बच्चों को स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करने में भी कठिनाई आ सकती है। साथ ही इन्हें ध्यान केंद्रित करने में कमी वाले विकार की भी पूरी आशंका रहती है।समय पूर्व जन्मे शिशुओं में बड़े होकर कई तरह की समस्याएं होने की आशंका रहती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि हर साल दुनिया में लगभग 1.5 करोड़ बच्चे समय जन्म लेते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि विश्व में हर दस में से एक बच्चा समय से पहले जन्म लेता है। 184 देशों में प्री-टर्म जन्म की दर पांच फीसद से लेकर 18 फीसद तक है। भारत में हर साल पैदा होने वाले 2.7 करोड़ बच्चों में से 35 लाख बच्चे प्री-टर्म श्रेणी के होते हैं।

इस बारे में जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने कहा है कि समय पूर्व जन्म उसे कहा जाता है, जो गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले ही हो जाता है। सामान्य गर्भावस्था आमतौर पर लगभग 40 सप्ताह की होती है। जन्म से पहले बच्चे को गर्भ में विकसित होने के लिए कम समय मिल पाता है। इसीलिए अक्सर चिकित्सा समस्याएं जटिल होती हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे कई शिशुओं को दिमागी लकवा यानी सेरीब्रल पॉल्सी, सीखने में कठिनाई और सांस संबंधी बीमारियों जैसे विभिन्न रोग होने का डर रहता है। ऐसे बच्चे आगे के जीवन में कई शारीरिक,मनोवैज्ञानिक और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बनते हैं।आइएमए के मानद महासचिव डॉ. आरएन टंडन ने बताया कि प्री-टर्म शिशु आकार में छोटा पर बड़े सिर वाला होता है। यह तेज दिखते हैं। इनके शरीर पर बाल अधिक होते हैं। इनके शरीर का तापमान भी कम रहता है।

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा कि हालांकि समय से पहले जन्म के पीछे कोई एक कारण बताना मुश्किल होगा। फिर भी गर्भवती महिला की कम आयु पहले भी प्री-टर्म होना, मधुमेह और उच्च रक्तचाप आदि कुछ सामान्य कारण हैं। यह आनुवंशिक कारणों से भी हो सकता है। गर्भवती महिला की प्रसव से पहले अच्छी देखभाल और जागरूकता से इस स्थिति के प्रबंधन में आसानी हो सकती है। महिलाओं में समय से पहले प्रसव को टाला जा सकता है। जन्म के पूर्व की देखभाल की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। चिकित्सक से खानपान के बारे में सही से जानकारी ले लेनी चाहिए। जिन महिलाओं को पहले भी प्री-टर्म प्रसव हो चुका हो उन्हें आगे भी ऐसा होने का अंदेशा अधिक रहता है। धूम्रपान से इस समस्या में वृद्धि होती है। अपना वजन सही रखें। शरीर के प्रकार और बच्चे के लिए कितना वजन उपयुक्त है यह जानें।

 

 

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