नोएडा में कपड़ा उद्योग के श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन में किसी संगठित नेटवर्क की संभावित भूमिका होने का अंदेशा है। अधिकारियों ने मंगलवार को खुलासा किया कि पिछले दो दिनों में मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप पर कई ग्रुप बनाए गए हैं और QR Code स्कैन करके इन्हें श्रमिकों को इनमें शामिल किया जा रहा है।
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कहा, ”पिछले दो दिनों में कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए हैं जिनके जरिए QR कोड स्कैन कर श्रमिकों को जोड़ा जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इन गतिविधियों के पीछे एक संगठित और सुनियोजित सिंडिकेट सक्रिय है।”
लक्ष्मी सिंह ने बताया कि नोएडा में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सिंह ने कहा कि हिंसा भड़काने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। आगे की कार्रवाई भी जारी है। अधिकारियों को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग नामों से कई ऐसे ग्रुप मिले जिनमें से एक का नाम ‘Workers Movement’ रखा गया था।
2000 रुपये वेतन तय करने की गलत जानकारी फैलाई गई
नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन पर औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा, ”आपको मुख्यमंत्री की उस प्रतिबद्धता का पता है जिसमें वह राज्य को हर क्षेत्र में नंबर एक बनाने के लिए काम कर रहे हैं। वह रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बेहतरीन नीतियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक समिति का गठन किया है। पूरे दिल्ली-एनसीआर में एक गलत जानकारी फैलाई गई जिसमें कहा गया कि भारत सरकार ने न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये तय कर दिया है। जबकि हकीकत यह है कि भारत सरकार अपने लेबर कोड्स और कानूनों के तहत प्रक्रिया चला रही है। हमने कल श्रमिकों से बात की और बातचीत जारी रहेगी। श्रमिकों ने कहा है कि महंगाई के कारण उनके वेतन में बढ़ोतरी होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि हिंसा और आगजनी में स्थानीय लोग शामिल नहीं थे बल्कि बाहरी लोगों ने इसे अंजाम दिया। अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।”
WhatsApp के जरिए फैलाई जा रही थी भ्रामक जानकारी
ग्रेटर नोएडा, यूपी के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने कहा, ”हमने 350 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। कुछ लोग सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, अफवाह फैला रहे थे और झूठी जानकारी दे रहे थे। कुछ लोग नए बनाए गए व्हाट्सऐप बॉट्स और ट्विटर के जरिए भ्रामक जानकारी फैला रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आज कई कंपनियों में श्रमिक काम पर लौट रहे हैं। कुछ जगहों पर श्रमिक आए और अपनी मांगों को लेकर बात की। हमने उनसे धैर्यपूर्वक चर्चा की और समझाया। मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है जिसने कल मौके पर जाकर निरीक्षण किया और श्रमिकों के हित में कई फैसले लिए गए हैं। हमारे पास सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूत हैं। जिन लोगों को पकड़ा गया है, वे किसी न किसी तरह की गड़बड़ी, असामाजिक गतिविधियों, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जाम करने जैसी घटनाओं में शामिल थे।”
नोएडा में क्यों हुआ विरोध-प्रदर्शन?
नोएडा में चल रहा विरोध-प्रदर्शन सोमवार को उस समय उग्र हो गया जब अलग-अलग उद्योगों की फैक्ट्री में काम कर रहे श्रमिक न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और काम करने के हालातों में बेहतरी के लिए सड़कों पर उतर आए।
इस प्रदर्शन की मुख्य वजह पड़ोसी हरियाणा में न्यूनतम वेतन में हाल ही में हुई करीब 35% बढ़ोतरी रही जिससे मासिक वेतन लगभग 19,000-20,000 रुपये तक पहुंच गया। वहीं नोएडा के वही श्रमिक अभी भी करीब 11,000-13,000 रुपये से ही कमा रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन कम से कम 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
श्रमिकों ने शोषण के आरोप भी लगाए हैं जिनमें बिना ओवरटाइम के 12-12 घंटे काम कराना, साप्ताहिक छुट्टी न देना और समय पर वेतन न मिलना शामिल है। महिला श्रमिकों ने खासतौर पर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है।
शुरुआत में शांतिपूर्ण रही हड़ताल बाद में फेज-2 नोएडा और सेक्टर-60 नोएडा जैसे इलाकों में हिंसक हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव, वाहनों (जिसमें पुलिस वैन भी शामिल हैं) में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन दरों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। नोएडा में कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने यह फैसला लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये नई अंतरिम दरें 1 अप्रैल से लागू कर दी गई हैं। नोएडा में सोमवार (13 अप्रैल) को हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के बाद आज पूरे दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट है। पढ़ें पूरी खबर…
