प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के निदेशक विनीश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया है। बाद में उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया। चुनावी मौसम में विनेश चंदेल की गिरफ्तारी को अहम माना जा रहा है।

विनेश चंदेल शुरुआत में I-PAC के साथ जुड़े थे, जब प्रशांत किशोर ने इस संगठन का गठन किया था। I-PAC पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ लंबे समय तक काम कर चुका है।

विनेश चंदेल ने भोपाल NLIU से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने कुछ समय तक पत्रकार के रूप में भी काम किया और सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है और उन्होंने पश्चिम बंगाल व मेघालय में पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाई है।

अगर विनेश चंदेल के निजी जीवन की बात करें, तो उन्होंने वसुधा सिंह से शादी की है। दोनों की मुलाकात I-PAC में ही हुई थी। वर्तमान में वसुधा सिंह एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म चलाती हैं।

पूरा मामला क्या है?

इस केस की बात करें तो सीबीआई ने साल 2020 में दर्ज कोयला स्मगलिंग मामले में अनूप माजी उर्फ लाला और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने अपने स्तर पर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि अनूप माजी कथित तौर पर एक कोयला सिंडिकेट चला रहे थे। इस सिंडिकेट के जरिए पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी और अवैध खनन किया जा रहा था। बाद में इस कोयले को बांकुड़ा, बर्धमान और पुरुलिया जैसे जिलों में स्थित फैक्ट्रियों को बेचा जाता था।

ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि चोरी किए गए कोयले का बड़ा हिस्सा शकंभरी ग्रुप की कंपनियों को बेचा गया था। एजेंसी के मुताबिक, इस कथित कोयला घोटाले के तार कई हवाला ऑपरेटरों से भी जुड़े पाए गए हैं। ऐसे ही एक हवाला ऑपरेटर पर आरोप है कि उसने कोयला तस्करी से मिले काले धन को छुपाने और घुमाने का काम किया। इसी ऑपरेटर के जरिए राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC को दर्जनों करोड़ रुपये के लेन-देन कराए गए। ईडी का दावा है कि I-PAC उन संस्थाओं में शामिल है, जिनका नाम हवाला के पैसों से जोड़ा जा रहा है।

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