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कौन है आंबेडकर के इस घर का मालिक

भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने लंदन के जिस घर में रहकर पढ़ाई और शोध कार्य किया था, उसे 32 करोड़ रुपए देकर खरीदा गया है..

Author मुंबई | November 11, 2015 1:16 AM

भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने लंदन के जिस घर में रहकर पढ़ाई और शोध कार्य किया था, उसे 32 करोड़ रुपए देकर खरीदा गया है। मगर इसे किसने खरीदा, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और अधिकारियों ने इस घर को खरीदने के लिए लंदन के जो दौरे किए , उन पर अब तक 25.45 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। हालांकि इस घर के मालिकाना हक को लेकर पहले भी सवाल उठ रहे थे कि हक राज्य सरकार का होगा या केंद्र सरकार का। मगर अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस मकान का मालिक कौन है।

सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली को सामाजिक न्याय और विशेष विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सारी रकम महात्मा फुले पिछड़ा विकास निगम की ओर से खर्च की गई है। घर खरीदने के लिए सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले ने दो और प्रधान सचिव उज्ज्वल कुमार उके ने एक बार लंदन यात्रा की जिस पर 25.45 लाख रुपए खर्च हुए। घर खरीदने की जिम्मेदारी सॉलिसीटर कंपनी सेडॉन को दी थी। इस कंपनी को 3.10 करोड़ रुपए शुल्क के रूप में चुकाए गए हैं। गलगली ने आरटीआइ के जरिए इस मकान को खरीदने और दौरे पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी। मगर उनकी आरटीआइ जनहित से जुड़े ना होने और अनाधिकृत हस्तक्षेप के नाम पर खारिज कर दी गई थी। गलगली की अपील के बाद उपसचिव दि. रा. डिंगले ने जानकारी देने का आदेश जारी किया।

आंबेडकर के लंदन स्थित घर के लोकार्पण से विपक्ष दूर

लंदन के 10 किंग्ज हेनरी रोड में बाबा साहेब 1920-21 में पढ़ाई और शोधकार्य के लिए रहे थे। जब इस मकाम को खुली नीलामी के जरिये बेचने का विज्ञापन निकला तो मंत्रिमंडल ने तीन फरवरी को मकान खरीदने की मान्यता दी और एक समिति का गठन कर सॉलिसीटर कंपनी को 3.10 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति भी दे दी। 16 फरवरी, 2015 को यह रकम कंपनी के खाते में ट्रांसफर भी कर दी गई। सरकार ने बडोले और उके के लंदन दौरे के लिए पहले 15 और बाद में कुल 20 लाख रुपए मंजूर भी कर लिए।

महात्मा फुले पिछड़ा विकास निगम महाप्रबंधक के मुताबिक 23 फरवरी से 28 फरवरी, 2015 के दौरे पर 17,45,641 रुपए खर्च किए गए। चार महीने बाद बडोले ने फिर दौरा किया जिस पर आठ लाख रुपए खर्च हुए। 32 करोड़ रुपए चुका कर लंदन का जो मकान खरीदा गया है, उसका मालिक कौन है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। 32 करोड़ की रकम भी मूल मकान मालिक के बजाय सॉलिसीटर कंपनी के खाते में ट्रांसफर हुई है। सरकार के निर्णय के मुताबिक आकस्मिक निधि से यह रकम अदा की गई है। महाराष्ट्र सरकार मकान मालिक का नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है।

यह मकान अब संग्रहालय का रूप ले चुका है, जिसका लोकार्पण 14 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। इसकी मरम्मत पर 50 लाख रुपए की रकम भारतीय उच्चायुक्त लंदन के खाते में जमा की गई है।

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