Who is Sonam Wangchuk: लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, पर्यावरणविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में उनका यह अनशन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के साथ चल रहा है। प्रदर्शनकारी NEET (UG) 2026 सहित अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लेकिन बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें यह नहीं पता कि आखिर सोनम वांगचुक हैं कौन? बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पिता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बात करते हैं सोनम वांगचुक के करियर के बारे में। जानते हैं आखिर वो कौन सी बाते हैं जिन्होंने ‘रियल लाइफ’ फुंसुख वांगड़ू को सोनम वांगचुक बनाया…
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के अलची गांव में हुआ। शुरुआती शिक्षा लद्दाख में हुई जबकि आगे की पढ़ाई उन्होंने श्रीनगर और फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (तत्कालीन रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज) श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में की।
वह इंजीनियर होने के साथ-साथ शिक्षा सुधारक, इनोवेटर और क्लाइमेट एक्टिविस्ट भी हैं। 59 वर्षीय सोनम वांगचुक पर्यावरण संरक्षण और अपने गृह क्षेत्र लद्दाख के हितों के लिए मुखर आवाज माने जाते हैं। वह लद्दाख को अधिक संवैधानिक संरक्षण दिलाने की मांग को लेकर भी कई जन आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके हैं।
उन्होंने Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) की स्थापना की और आर्टिफिशियल ग्लेशियर (Artificial Glacier) के रूप में प्रसिद्ध ‘आइस स्तूप’ (Ice Stupa) तकनीक विकसित की जिसके लिए उन्हें देश-विदेश में पहचान मिली।
उन्होंने साल 1988 में SECMOL की स्थापना की थी। इस संस्था का उद्देश्य लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना और युवाओं को व्यावहारिक व सस्टेनेबल लाइफ स्किल से लैस करना है।
सोनम वांगचुक का ‘आइस स्तूप’ प्रोजेक्ट उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। इस टेक्नोलॉजी के तहत सर्दियों में पिघलते झरनों के पानी को शंकु (कोन) के आकार की बर्फीली संरचनाओं में जमा किया जाता है ताकि बसंत ऋतु में हिमालय के ऊंचाई वाले गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके।
आपको बता दें कि जंतर-मंतर पर मौजूदा अनिश्चितकालीन अनशन से पहले भी सोनम वांगचुक कई बार भूख हड़ताल कर चुके हैं। उनके अधिकांश आंदोलन पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने की मांग पर केंद्रित रहे हैं।
मार्च में NSA वापस लिया गया
सितंबर 2025 में सोनम वांगचुक ने लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आंदोलन का समर्थन किया। ये संगठन लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और अन्य संवैधानिक गारंटियों की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन के दौरान वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे। केंद्र सरकार के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद उन्होंने वार्ता को ‘अनावश्यक रूप से लंबी और नतीजाविहीन’ बताते हुए असंतोष जताया।
बाद में यह आंदोलन हिंसक घटनाओं तक पहुंच गया। प्रशासन ने कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया। उन्हें जेल भी जाना पड़ा। हालांकि बाद में मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने उन पर लगाया गया NSA हटा लिया।
सोनम वांगचुक की पत्नी कौन हैं?
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो सामाजिक उद्यमी (Social Entrepreneur), शिक्षाविद् और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक एवं निदेशक हैं। वह लद्दाख में ऑप्शनल और इनोवेशन बेस्ड एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से कार्य कर रही हैं।
सोनम वांगचुक के पिता कौन हैं?
सोनम वांगचुक का जन्म लद्दाख के दूरदराज़ स्थित छोटे से गांव उलेयटोकपो (Uleytokpo) में हुआ था। वह लद्दाख के प्रमुख राजनीतिक नेता सोनम वांग्याल के कई बच्चों में से एक हैं। उनके पिता सोनम वांग्याल (Sonam Wangyal) पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे और बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 1975 से उन्होंने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया।
वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल जम्मू-कश्मीर की कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके थे। उन्होंने लद्दाख क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और राज्य सरकार में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली। राजनीति से जुड़े परिवार में जन्म लेने के बावजूद सोनम वांगचुक ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी और सामाजिक बदलाव, शिक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उनका निधन 1998 में हुआ था।
लद्दाख प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 10 नवंबर 2021 को सोनम वांग्याल की 23वीं पुण्यतिथि मनाई गई थी जिससे पुष्टि होती है कि उनका निधन 1998 में हुआ था। सोनम वांग्याल भी लद्दाख के अधिकारों के लिए सक्रिय आंदोलनकारी रहे। वर्ष 1984 में उन्होंने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe-ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर दो बार भूख हड़ताल की थी। उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं लेह पहुंची थीं और उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया था। उन्होंने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने का आश्वासन भी दिया था।
सोनम वांगचुक किस लिए प्रसिद्ध हैं?
सोनम वांगचुक को शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीकों के लिए जाना जाता है। रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018) के प्रशस्ति पत्र के अनुसार, उनका शुरुआती शैक्षणिक जीवन काफी कठिन रहा। उस समय लद्दाख में शिक्षा का स्तर बेहद कमजोर था, किताबो का कॉन्टेन्ट स्थानीय परिस्थितियों से मेल नहीं खाता था और पढ़ाई ऐसी भाषा में होती थी जो पहाड़ी क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सहज नहीं थी। ऐसे हालात में वांगचुक ने कम उम्र में ही अपनी जिंदगी का रास्ता खुद तय किया।
जब वह कश्मीर के श्रीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (तत्कालीन रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज) में इंजीनियरिंग छात्र थे, तब 19 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने उन छात्रों की भी मदद की जो राष्ट्रीय स्तर की कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में काफी पीछे थे।
इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद 1988 में उन्होंने SECMOL की स्थापना की। उस समय लद्दाख के लगभग 95 प्रतिशत छात्र सरकारी परीक्षाओं में असफल हो जाते थे। वांगचुक ने इन छात्रों को प्रशिक्षण देना शुरू किया और एजुकेशन सिस्टम में व्यावहारिक व स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बदलाव लाने की दिशा में काम किया। इन्हीं सारे प्रयासों के चलते वांगचुक देश-दुनिया में मशहूर हुए और अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे।
‘3 इडियट्स’ से मिला देशभर में पहचान
स्थायी बदलाव लाने के लिए SECMOL ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शिक्षा सुधार का एक संयुक्त कार्यक्रम शुरू किया। इसकी शुरुआत एक गांव के स्कूल से की गई जहां शिक्षकों को रचनात्मक, बाल-अनुकूल और गतिविधि-आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही पाठ्यक्रम में ऐसे बदलाव किए गए जिससे पढ़ाई लद्दाख की संस्कृति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हो सके। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर तैयार करने के उद्देश्य से उर्दू की जगह अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई। वहीं लद्दाखी भाषा के संरक्षण और प्रोत्साहन पर भी विशेष जोर दिया गया।
सोनम वांगचुक बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ के लोकप्रिय किरदार ‘फुंसुख वांगड़ू’ की वास्तविक प्रेरणा भी माने जाते हैं। फिल्म में यह किरदार अभिनेता आमिर खान ने निभाया था जिसके बाद वांगचुक को देश-विदेश में पहचान मिली।
रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित
साल 2018 में उन्हें एशिया के प्रतिष्ठित रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
खास बात है कि सोनम वांगचुक के नाम पर कोई भी पेटेंट नहीं है। सोनम वांगचुक ने अपने प्रमुख आविष्कारों जैसे ‘आइस स्तूप’ (Ice Stupa) आर्टिफिशियल हिमनद टेक्नोलॉजी और सौर ऊर्जा से गर्म होने वाले सैन्य टेंट (Solar-Heated Military Tents) का कभी पेटेंट नहीं कराया। उन्होंने जानबूझकर इन इनोवेशन को ओपन-सोर्स रखा ताकि दुनिया भर के सोद इन तकनीकों का बिना कोई पैसे दिए या कानूनी रुकावट के इस्तेमाल कर सकें।
‘सोनम वांगचुक की जिंदगी कीमती है’, बिगड़ती तबीयत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की जान बेहद कीमती है और उनकी सेहत को लेकर सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
