तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले दो दिनों में इस्तीफा देने वाले वह दूसरे टीएमसी सांसद हैं। लेकिन पार्टी के संसदीय दल में उथल-पुथल शुरू होने के बाद से इस्तीफा देने वाले तीसरे सांसद बन गए हैं।
बराइक ने अपने इस्तीफे में लिखा, ”मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। कृपया इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की कृपा करें।”
उन्होंने आगे कहा, ”मैं माननीय उपसभापति महोदय तथा राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं जिन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान हर संभव सहयोग और सहायता प्रदान की।”
इसके तुरंत बाद उन्होंने भाजपा सांसद निशकांत दुबे से मुलाकात की। बराइक ने इस मुलाकात से इनकार नहीं किया और कहा कि उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी बातचीत हुई है। उन्होंने कहा, ”मैं किसी भी निजी बातचीत का खुलासा नहीं करूंगा। भविष्य में मैं वही करूंगा जो बंगाल के मुख्यमंत्री मुझे करने के लिए कहेंगे।”
45 वर्षीय बराइक, सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद इस्तीफा देने वाले तीसरे टीएमसी राज्यसभा सांसद हैं। वह उन तीन नेताओं में दूसरे सांसद भी हैं जिन्हें टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की पसंद पर राज्यसभा भेजा गया था। इससे पहले सुष्मिता देव को भी उनके समर्थन से उच्च सदन में भेजा गया था।
कौन हैं प्रकाश चिक बराइक?
आदिवासी समुदाय से आने वाले प्रकाश चिक बराइक का तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में राजनीतिक उत्थान काफी तेजी से हुआ। वर्ष 2018 में उन्होंने अलीपुरद्वार जिले के कुमारग्राम ग्राम पंचायत से अपना पहला चुनाव लड़ा था। इसके महज पांच साल बाद और 2023 के पंचायत चुनावों की मतगणना से एक दिन पहले, पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
सिलीगुड़ी के सूर्य सेन कॉलेज से बी.कॉम स्नातक बराइक ने अलीपुरद्वार जिले में चाय पत्ती के कारोबार से अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया था। इसके अलावा वह चाय बागानों से जुड़े ट्रेड यूनियन आंदोलन में भी सक्रिय रहे।
टीएमसी सूत्रों के अनुसार, बराइक का परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। उनके पिता कृष्णा चिक बराइक अलीपुरद्वार जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं।
साल 2018 में अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं के समर्थन से प्रकाश चिक बराइक ने कुमारग्राम ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद पार्टी में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और कुछ ही वर्षों में वह राज्यसभा तक पहुंच गए।
2019 के लोकसभा चुनाव में अलीपुरद्वार सीट पर टीएमसी की हार के बाद जिले में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में लगातार कमजोरी आने लगी। इस गिरावट को रोकने के लिए पार्टी नेतृत्व ने 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रकाश चिक बराइक को अलीपुरद्वार जिला को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया।
हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी जिले की एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। इसके बावजूद बराइक पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा कायम रहा और उन्हें अलीपुरद्वार जिला अध्यक्ष बनाया गया। बाद में वर्ष 2023 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में बराइक ने टीएमसी उम्मीदवार के रूप में अलीपुरद्वार सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन भाजपा के मनोज टिग्गा से 75000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि बराइक युवाओं और आदिवासी मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने में मदद करेंगे।
उन्होंने कहा, ”पार्टी हाइकमान का एक चौंकाने वाला फैसला था। पार्टी को लगा था कि वह युवा और आदिवासी दोनों वर्गों को आकर्षित कर पाएंगे लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके।”
बराइक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है। हालांकि, पार्टी की मुश्किलें अभी खत्म होती नहीं दिख रही हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और सदस्य भी पार्टी छोड़ सकते हैं जिससे टीएमसी की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
28 साल पहले ममता बनर्जी ने क्यों छोड़ी थी कांग्रेस?
4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक पतन की पटकथा लिखी जाने लगी। टीएमसी एक ऐसी पार्टी जिसकी स्थापना आज से 28 साल पहले हुई थी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यह कहानी भारतीय राजनीति के इतिहास के उस मोड़ की है जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को ना सिर्फ हमेशा के लिए बदल दिया बल्कि देश को एक ऐसा राजनेता दिया जिसने भविष्य में ‘कम्युनिस्टों के अजेय गढ़’ को ढहा दिया।
