नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मंगलवार को कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्की से वापस लाने में कामयाबी हासिल की। दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी को भारतीय एजेंसियों से मिली सूचनाओं के बाद शनिवार को तुर्की खुफिया एजेंसी और बेयलिकडुजू पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भारत लाया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एजेंसियों की तारीफ की। अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “मोदी सरकार के मादक पदार्थों के गिरोहों को बेरहमी से कुचलने के मिशन के तहत, हमारी नशीले पदार्थों के खिलाफ एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से सीमाओं के पार भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।” शाह ने आगे कहा, “अब, चाहे वे कहीं भी छिपें, ड्रग सरगनाओं के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।”
ऑपरेशन ग्लोबल-हंट के तहत तुर्की से लाया गया भारत
वहीं, गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि डोला को ऑपरेशन ग्लोबल-हंट के तहत तुर्की से लाया गया। मंत्रालय ने कहा, “सलीम डोला की सफल वापसी सरकार के इस दृढ़ संकल्प को दर्शाती है कि वह दुनिया भर में लगातार पीछा करके सभी मादक पदार्थों के भगोड़ों और संगठित अपराध गिरोहों के सदस्यों को न्याय के कटघरे में लाएगी।”
कौन है मोहम्मद सलीम डोला?
डोला का जन्म 1966 में मुंबई के बायकुला इलाके में एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। उसने छोटी उम्र में ही अपराध की दुनिया (अंडरवर्ल्ड) में कदम रख दिया। बाद में उसकी दोस्ती छोटा शकील से हो गई, जो उस समय दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का हिस्सा था। शुरुआत में डोला मुंबई और दिल्ली में गुटखा (तंबाकू) की तस्करी में शामिल था। धीरे-धीरे उसने मादक पदार्थों के व्यापार में कदम रखा और गांजा की तस्करी शुरू कर दी।
2012 में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उसे 80 किलो मारिजुआना की खेप के साथ गिरफ्तार किया था। लगभग पांच साल जेल में बिताने के बाद, उसे अदालत ने बरी कर दिया। जेल से रिहा होने के बाद डोला की मुलाकात भगोड़े ड्रग सप्लायर कैलाश राजपूत से हुई। यहीं से उसने सिंथेटिक ड्रग की दुनिया में कदम रखा। कैलाश राजपूत की मदद से डोला ने बटन नाम के ड्रग का निर्माण शुरू किया।
2018 में मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने उसे सांताक्रूज में गिरफ्तार किया और 100 किलो फेंटानिल जब्त किया। हालांकि, फोरेंसिक रिपोर्ट में सैंपल नैगेटिव पाए जाने के बाद उसे केवल चार महीने के अंदर ही जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद डोला भारत से भागकर संयुक्त अरब अमीरात चला गया। वहां उसने अपने बेटे ताहिर के नाम से एक रियल एस्टेट कारोबार स्थापित किया।
BSF कांस्टेबल की हिरासत में मौत
जम्मू को आरएस पुरा निवासी बीएसएफ कांस्टेबल के परिजन अभी भी दुविधा में हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी ) की हिरासत में कांस्टेबल की मौत को एक महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक यह नहीं बताया गया है कि मौत किन कारणों से हुई है। त्रिपुरा में पोस्टेड 30 वर्षीय जसविंदर सिंह छुट्टी पर अपने घर आए थे। पाकिस्तान की सीमा से सटे दीवानगढ़ गांव स्थिति घर लौटने के दौरान 3 मार्च को एनसीबी ने उन्हें मीरां साहिब शहर से हिरासत में लिया था। पढ़ें पूरी खबर…
