Who is Misir Besra: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में ऐलान किया था कि मार्च 2026 के बाद से देश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। दूसरी ओर सुरक्षा बल प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के आखिरी सबसे बड़े नेता मिसिर बेसरा की तलाश में जुटे हुए हैं। 66 से वर्षीय बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम है। उसके भास्कर, सुनीर्मल, प्रधान जी और सागर जैसे कई नाम चर्चित रहे हैं, जिसके खिलाफ 150 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।
बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के चलते झारखंड में कमजोर पड़ चुके माओवादी विद्रोह में मिसिर बेसरा और एक अन्य माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ कार्तिक के बीच सत्ता संघर्ष की स्थिति है। असीम मंडल पश्चिम बंगाल से केंद्रीय समिति का सदस्य है और उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम भी है। कम्युनिस्ट संगठनों में पोलित ब्यूरो सर्वोच्च कार्यकारी निकाय है, जबकि केंद्रीय समिति (सीसी) एक व्यापक राष्ट्रीय शासी परिषद है जो पोलित ब्यूरो का चुनाव करती है।
दो नेताओं के बीच टकराव
मिसिर बेसरा को लेकर एक अधिकारी ने बताया, “जनवरी 2026 शीर्ष माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य अनल दा के मारे जाने के बाद दो प्रमुख नेता बचे हैं। इसमें बेसरा और असीम मंडल हैं। दोनों का ही कद लगभग एक जैसा है। इसके चलते कुछ माओवादी बेसरा के साथ हैं, तो कुछ मंडल का समर्थन करते हैं।
मिसिर बेसरा झारखंड मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव में 1960 में जन्मा था। उसने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए धनबाद चला गया था। उनके परिवार के अनुसार, यहीं पर वह माओवादी विचारधारा की ओर आकर्षित हुआ था। बाद में उन्होंने धनबाद के राजगंज में राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। यह झारखंड आंदोलन के दौरान गहन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल का दौर भी था।
1980 के दशक में छोड़ दिया था घर
अपनी युवावस्था के शुरुआती दौर में ही बेसरा ने मोनासी देवी से विवाह कर लिया था। उनका एक 37 वर्षीय पुत्र सिद्धार्थ है, जो दिहाड़ी मजदूर है। साल 1980 के दशक में बेसरा घर छोड़कर माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर में शामिल हो गए, जो बाद में पीपुल्स वॉर ग्रुप के साथ विलय होकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) बन गया। उसके जाने के कुछ वर्षों बाद उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली। बेसरा के बेटे सिद्धार्थ ने बताया, “जब मैं लगभग पांच साल का था, तब मेरे पिता दो-तीन बार घर आते थे। उसके बाद मैंने उन्हें फिर कभी नहीं देखा।”
साल 2000 में जब झारखंड, बिहार से अलग होकर अलग राज्य बना था, तो उसके तुरंत बाद बेसरा ने सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सशस्त्र हमलों और घात लगाकर लगातार कई हमले किए। इनमें सबसे प्रमुख 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में हुए आईईडी हमले थे, जिनमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इन हमलों के कारण ही उसे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) में प्रमोट किया गया और 2004 में प्रतिबंधित एमसीसी और पीडब्ल्यूजी के विलय के बाद उन्हें संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का प्रमुख बनाया गया।
झारखंड में बढ़ते प्रभाव को लेकर राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “पहले बेसरा ने शीर्ष माओवादी नेता मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति से भी मुलाकात की थी। उन्होंने झारखंड भर में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया था।”
जब कोर्ट के बाहर से भाग गया था बेसरा
जून 2009 में बिहार के लखीसराय जिले की एक अदालत में पेशी के दौरान कोर्ट के पास से माओवादियों ने उसे छुड़ा लिया। बेसरा ने उस समय के सबसे चर्चित जेलब्रेक घटना को अंजाम दिया था। बेसरा को अदालत परिसर से बाहर ले जाया जा रहा था, तभी लगभग 30 सशस्त्र माओवादियों ने मोटरसाइकिलों पर सवार होकर परिसर में हमला बोला था।
तलाश में जटे हैं सुरक्षाबल
पुलिसकर्मियों पर बम फेंकने के साथ ही जमकर फायरिंग की थी। इसके ये सभी बेसरा को भगा ले गए थे। इस हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। बेसरा अभी तक फरार है और पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है। सुरक्षाबलों के अधिकारी ने कहा, “हमने सुरक्षा बलों को तैनात रखा है और पुलिस शिविरों का इस्तेमाल करके उसका पता लगा रहे हैं। हम बचे हुए माओवादियों के परिवारों से भी अपील कर रहे हैं कि वे अपने सदस्यों को आत्मसमर्पण करने के लिए मनाएं।पिछले कुछ महीनों में सारंडा के जंगलों में लगातार ऑपरेशंस किए गए हैं, जिनमें जनवरी में चलाए गए एक बड़े अभियान में सीसीएम नेता अनल दा समेत 15 माओवादी मारे गए।
इस अभियान में विशेष आतंकवाद-रोधी बल कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस टीमों के जवान शामिल थे। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ से माओवादी कार्यकर्ता भयभीत हो गए और उसके बाद तितर-बितर हो गए। पुलिस का मानना है कि अब 25 से भी कम कार्यकर्ता बचे हैं, और इस नवीनतम आत्मसमर्पण ने माओवादी गुटों के बीच दरार को और बढ़ा दिया है।
बेसरा के बारे में आईजी (ऑपरेशन) नरेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस को उम्मीद है कि दोनों नेताओं को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे अभी तक स्पष्ट नहीं हैं कि वे कहां हैं। उन्होंने कहा अनुमान है कि दोनों ने सारंडा छोड़ दिया है लेकिन वे ज्यादा देर तक पकड़े जाने से बच नहीं सकते, क्योंकि झारखंड लगभग माओवाद से मुक्त हो चुका है।
कहां है एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा? 27 साथियों ने डाले हथियार
झारखंड में गुरुवार 27 माओवादियों ने डीजीपी तदाशा मिश्रा के सामने सरेंडर कर दिया। हालांकि इन माओवादियों में पोलित ब्यूरो के आखिरी सदस्य मिसिर बेसरा शामिल नहीं है। मिसिर बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम है। सुरक्षाबल उसकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
