श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए जगदीश आफले को ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति पर औपचारिक मुहर 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में लगेगी। हालांकि, उन्हें पहले ही ट्रस्ट का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) बना दिया गया है और इस संबंध में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को नया प्रस्ताव भेज दिया गया है।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद लिया गया फैसला
यह फैसला ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद लिया गया है। दोनों के पद छोड़ने से ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था।
ट्रस्ट के नए प्रस्ताव के बाद एसबीआई ने खातों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया है जिससे ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज सामान्य हो गए हैं।
वेतन और भुगतान पर पड़ा था असर
अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं होने की वजह से करीब 1000 कर्मचारियों के वेतन और विभिन्न निर्माण एजेंसियों व सेवा प्रदाताओं के भुगतान प्रभावित हो रहे थे। नए प्रस्ताव के बाद अब इन सभी भुगतान प्रक्रियाओं को फिर से शुरू किया जा सकेगा।
कौन हैं जगदीश आफले?
जगदीश आफले लंबे समय से राम मंदिर निर्माण परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में जुड़े रहे हैं। वह अब तक बिना वेतन इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे।
आफले बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने आईआईटी मुंबई से बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की है। इसके अलावा वे विदेशों की कई मल्टीनेशनल कंपनियों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने यूरोप और अमेरिका में नौकरी की है और रिटायरमेंट के बाद वह वापस भारत लौट आए। अपनी पत्नी के साथ वह अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में ही रहते हैं।
प्रवक्ता की नियुक्ति भी जल्द
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि ट्रस्ट में प्रवक्ता की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही नाम की घोषणा की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन में अभी समय लग सकता है। इसी वजह से ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए सचिव का नया पद सृजित किया गया है।
राम मंदिर दान मामला: SIT का किया जा सकता है पुनर्गठन, सुप्रीम कोर्ट चाहता है- IPS अधिकारी करें जांच
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि वे यूपी सरकार से पूछकर बताएं कि क्या राम मंदिर दान मामले की जांच के लिए बनाई गई SIT का पुनर्गठन किया जा सकता है। CJI सूर्य कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट चाहेगा कि इस जांच का नेतृत्व कोई ऐसा सीनियर IPS अधिकारी करे जिसे इस तरह की जांच करने का अनुभव हो।
