पूर्व ईडी विशेष निदेशक सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फैसला किया है। यानी उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है। पिछले एक साल से सत्यब्रत कुमार पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे।

सत्यब्रत कुमार 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। वह सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर कैडर से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में काम किया है और लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में उनका नाम शामिल है।

क्यों समय से पहले छोड़ रहे सत्यब्रत?

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का नेतृत्व किया। बाद में उन्हें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर के पद पर तैनात किया गया। हालांकि अब उन्होंने निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने से काफी पहले ही रिटायरमेंट लेने का फैसला किया है। उनकी ओर से इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, व्यक्तिगत कारणों और निजी रुचियों को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है।

जानकारी के लिए बता दें कि सत्यब्रत कुमार ने ईडी में करीब 12 वर्षों तक काम किया। मुंबई स्थित ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख रहते हुए उन्होंने कई चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व किया था।

किन मामलों की जांच में शामिल?

उनके कार्यकाल के प्रमुख मामलों में पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामला शामिल है। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े करीब 2 अरब अमेरिकी डॉलर के बैंक धोखाधड़ी मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस मामले में हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई थीं और जांच में सत्यब्रत कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

इसके अलावा भगोड़े कारोबारी विजय माल्या से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में भी उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने इस मामले की जांच का नेतृत्व किया था। वहीं, छत्तीसगढ़ से जुड़े महादेव बेटिंग ऐप मामले ने भी देशभर में काफी विवाद खड़ा किया था। इस मामले की जांच में भी सत्यब्रत कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समय से पहले ये भी हुए रिटायर

वैसे यह पहली बार नहीं है जब ईडी से जुड़े किसी वरिष्ठ अधिकारी ने पद छोड़ने के कुछ समय बाद सरकारी सेवा से भी विदाई लेने का फैसला किया हो। जुलाई 2025 में ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी समय से पहले सेवानिवृत्ति का ऐलान किया था। कपिल राज का नाम कई चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच से जुड़ा रहा है। इनमें हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले भी शामिल रहे हैं।

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