Who is Nikhil Tondon: दिल्ली में डॉक्टर निखिल टंडन को AIIMS के कार्यवाहक निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है। वे वरिष्ठ प्रोफेसर और हृदय संबंधित रोगों से जड़े विभाग के प्रमुख होने के साथ ही डीन भी हैं। वे अपने वर्तमान कर्तव्यों के अतिरिक्त निदेशक के दायित्वों का भी निर्वहन करेंगे।
बता दें कि पहले डॉ. एम. श्रीनिवास दिल्ली एम्स के निदेशक थे। उन्हें पद से हटाए जाने के बाद नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है, जो अस्पताल प्रशासन से राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माण की भूमिका में उनके बदलाव का संकेत है। ऐसे में उनकी जगह पर कार्यवाहक निदेशक के तौर पर निखिल टंडन को नियुक्त हुई है।
2022 में संभाला था डॉ श्रीनिवास ने पद
पूर्व निदेशक डॉ. श्रीनिवास को 23 सितंबर, 2022 को निदेशक नियुक्त किया गया था। उन्होंने डॉ. रणदीप गुलेरिया के बाद पदभार ग्रहण किया और इससे पहले हैदराबाद के ईएसआईसी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डीन के रूप में कार्य कर चुके हैं ।
डॉक्टर निखिल टंडन की नियुक्ति को लेकर कहा गया कि यह नियुक्ति एक अस्थायी व्यवस्था है, जो अधिकतम छह महीने तक या नियमित निदेशक की नियुक्ति होने तक लागू रहेगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डॉ. टंडन को अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए कोई अतिरिक्त पारिश्रमिक नहीं मिलेगा।
25 वर्षों से विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत
डॉ. निखिल टंडन ने हृदय रोगों में विशेषज्ञता प्राप्त चिकित्सक-शोधकर्ता के रूप में भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में 25 वर्षों तक कार्य किया है। उनके शोध समूह ने बच्चों और वयस्कों में हृदय-चयापचयी जोखिम कारकों की व्यापकता और उनके संबंधों का मूल्यांकन करने के लिए बड़े पैमाने पर महामारी विज्ञान अध्ययन किए हैं।
वे सीएआरएस कोहोर्ट के संस्थापक शोधकर्ताओं में से एक थे, जो दो भारतीय महानगरों में कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम और रोग की घटनाओं का मूल्यांकन करने वाला एक जनसंख्या-आधारित कोहोर्ट है। इन अध्ययनों में कई बायोमार्करों का मूल्यांकन किया गया है, प्रारंभिक मेटाबोलोमिक विश्लेषण किया गया है और एक महत्वपूर्ण जैव भंडार बनाया गया है।
उन्होंने बचपन के मोटापे के आनुवंशिकी क्षेत्र में उनके कार्य ने सूजन संबंधी प्रक्रियाओं और एडिपोसाइटोकाइन जीनों के साथ मजबूत संबंध उजागर किए हैं। सूजन संबंधी प्रक्रिया वह है, जिसके द्वारा शरीर में कुछ गड़बड़ होने पर सूजन और बचाव क्रिया उत्पन्न होती है, जबकि एडिपोसाइटोकाइन जीन वसा कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन होते हैं जो सूजन और चयापचय को नियंत्रित करने वाले संकेत उत्पन्न करते हैं।
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