पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में सियासी हलचल तेज है। 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार डिप्टी सीएम जबकि सिद्धारमैया सीएम बने थे। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि दोपहर 3 बजे सिद्धारमैया इस्तीफा देंगे। गुरुवार सुबह कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया से मुलाकात करके उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को गले लगाया। डी.के. शिवकुमार को कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता है। आपको बताते हैं आखिर कौन हैं डी.के. शिवकुमार जो बन सकते हैं कर्नाटक के नए सीएम…
कौन हैं डी.के. शिवकुमार?
कर्नाटक की राजनीति में जब भी सत्ता, संगठन और रणनीति की बात होती है तो 64 वर्षीय डी.के. शिवकुमार का नाम सबसे आगे दिखाई देता है। राज्य की सियासत में चल रही हलचल के बीच उन्हें कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है। डीके शिवकुमार सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि कांग्रेस के संकटमोचक माने जाते हैं। पार्टी जब भी मुश्किल में फंसी, उन्होंने मैदान में उतरकर हालात संभाले। चाहे बागी विधायकों को मनाने की बात हो या सरकार बचाने की कवायद शिवकुमार हमेशा कांग्रेस की रणनीति के केंद्र में रहे।
15 मई 1962 को कर्नाटक के कनकपुरा में जन्मे डीके शिवकुमार का पूरा नाम डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार है। उनका घर बैंगलोर के पास है और वह वोक्कलिगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनके बड़े भाई डी.के. सुरेश का भी नाता राजनीति से है।
साल 1993 में डी.के. शिवकुमार का विवाह हुआ और उनकी पत्नी का नाम ऊषा शिवशंकर है। दोनों की दो बेटियां- ऐश्वर्या और आभाराना और एक बेटा आकाश है। डी.के. शिवकुमार देश के सबसे रईस राजनेताओं में से एक हैं।
राजनीति में एंट्री
राजनीति में उनकी एंट्री 1980 के शुरुआती दशक में छात्र जीवन से ही हो गई थी। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले शिवकुमार ने धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। कर्नाटक की राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जिनकी जमीनी पकड़ बेहद मजबूत है। कनकपुरा क्षेत्र में उनका प्रभाव इतना ज्यादा माना जाता है कि वहां चुनावी मुकाबला अक्सर एकतरफा नजर आता है। समर्थक उन्हें ‘कनकपुरा बंडे’ यानी कनकपुरा की चट्टान भी कहते हैं।
डीके शिवकुमार कुल 8 बार विधायकी का चुनाव जीत चुके हैं। सबसे पहले साल 1989 में 27 साल की उम्र में उन्होंने चुनाव लड़ा और मैसुरू जिले की सथानूर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। कांग्रेस के टिकट पर इसके बाद उन्होंने 1994, 1999 और 2004 में लगातार चुनाव लड़ा और जीते। वहीं कनकपुरा सीट से 2008, 2013, 2018 और 2023 में उन्होंने जीत हासिल की। 1990 में वह मंत्री बने। इसके बाद अलग-अलग सरकारों में उन्होंने ऊर्जा, सिंचाई और शहरी विकास जैसे अहम विभाग संभाले।
लेकिन उनकी असली ताकत संगठन क्षमता मानी जाती है। कांग्रेस हाईकमान भी कई मौकों पर उन पर भरोसा जताता रहा है। उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी का भरोसेमंदं माना जाता है।
2019 में जब कांग्रेस-जेडीएस सरकार संकट में आई थी तब बागी विधायकों को संभालने की जिम्मेदारी भी शिवकुमार के कंधों पर थी। उस दौर में उनकी आक्रामक राजनीति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बाद में उन्हें कर्नाटक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे भी उनकी मेहनत को बड़ा कारण माना गया।
हालांकि उनका राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर चुकी हैं। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। लेकिन इन विवादों के बावजूद उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर नहीं पड़ी।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान खुलकर सामने आई थी। आखिरकार पार्टी ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया। लेकिन तब से ही यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि भविष्य में सत्ता परिवर्तन हो सकता है और डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपी जा सकती है।
डीके शिवकुमार की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जाती है कि वे संगठन और सत्ता, दोनों पर समान पकड़ रखते हैं। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़, संसाधन जुटाने की क्षमता और राजनीतिक प्रबंधन उन्हें कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करती है।
