इंडियन एक्सप्रेस को अपनी पड़ताल में पता चला कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिजनों ने उज्जैन में बड़ी मात्रा में जमीनें खरीदी हैं। 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और उसके बाद से उनकी और उनके परिजनों से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने करीब 137 प्लॉट खरीदे। खरीदी गई कुल जमीन 168 एकड़ है। यह मामला सुर्खियों में है। इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव किया। वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने मोहन यादव का बचाव करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

ओमप्रकाश राजभर ने कहा अखिलेश यादव कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनकी नाराजगी के पीछे मध्य प्रदेश में कथित निवेश से जुड़े हितों का मामला हो सकता है। ओम प्रकाश राजभर ने इस मामले में दो ऐसे नाम लिए हैं, जो चर्चा में आ गए हैं। राजभर ने चंद्रपाल यादव और भारत यादव का जिक्र किया है। चंद्रपाल यादव समाजवादी पार्टी के नेता हैं और पूर्व में सांसद और विधायक रह चुके हैं। वहीं भरत यादव को लेकर राजभर ने दावा किया है कि वह चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया कि चंद्रपाल यादव समाजवादी पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे हैं और भरत यादव उनके दामाद हैं।

चंद्रपाल यादव कौन हैं?

चंद्रपाल यादव वर्तमान में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं। चंद्रपाल यादव कृषि क्षेत्र की सहिकारिता संस्था कृभको के वाइस चेयरमैन हैं। चंद्रपाल यादव समाजवादी पार्टी से एक बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने जा चुके हैं। वह एक बार विधायक भी रह चुके हैं। 2014 का लोकसभा चुनाव चंद्रपाल यादव ने झांसी से लड़ा था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2014 से 2020 तक चंद्रपाल यादव समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे।

चंद्रपाल यादव झांसी के ही रहने वाले हैं। उन्होंने PHD डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। 2014 के चंद्रपाल यादव के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 7 करोड़ 18 लाख रुपये थी। उस समय चंद्रपाल यादव पर 9 मुकदमे दर्ज थे। चंद्रपाल यादव के पिता का नाम ठाकुर प्रसाद यादव है। किसानी और ठेकेदारी इनका मुख्य पेशा है।

2 बार विधायकी का चुनाव लड़ चुके हैं चंद्रपाल के बेटे यशपाल

चंद्रपाल यादव की बेटी प्रियंका यादव की शादी आईएएस भारत यादव से हुई है, जो आईएएस अधिकारी हैं। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने झांसी की बबीना विधानसभा सीट से यशपाल सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया था, जो चंद्रपाल यादव के इकलौते बेटे हैं। यशपाल यादव तब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सबसे अमीर उम्मीदवार थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में यशपाल सिंह यादव ने अपनी संपत्ति 58 करोड़ 20 लाख रुपये घोषित की थी और उनकी उम्र 38 वर्ष थी। इसके अलावा यशपाल सिंह यादव ने कई विदेशी कम्पनियों के शेयर में निवेश कर रखा है।

भरत यादव कौन हैं?

भरत यादव मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और 2008 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। भरत यादव ने ग्वालियर विश्वविद्यालय से इंग्लिश लिटरेचर में बीए और जीवाजी यूनिवर्सिटी से राजनीतिक विज्ञान में एमए किया हुआ है। जून 2009 में भरत यादव की पहली पोस्टिंग होशंगाबाद के असिस्टेंट कलेक्टर की थी। उसके बाद 2010 में राजस्व विभाग में एसडीओ, 2011 में नरसिंहपुर जिला पंचायत में जूनियर स्केल सीईओ और 2012 में अंडर सेक्रेटरी बन गए। 2012 में भरत यादव को शहरी विकास विभाग का डिप्टी सेक्रेटरी बना दिया गया। वहीं 2013 में सिवनी का कलेक्टर बना दिया गया।

2019 तक भरत यादव सिवनी के कलेक्टर बने रहे। 2019 में भरत यादव ऊर्जा विभाग में मैनेजिंग डायरेक्टर बने थे और उसके बाद इस साल उन्हें जबलपुर कलेक्टर की जिम्मेदारी मिल गई। 2022 में भरत यादव को एमपी रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी मिली। तब से वह इसी विभाग में हैं।

ओपी राजभर ने क्या आरोप लगाया है?

ओपी राजभर ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के संबंध में इतना हल्ला क्यों कर रहे हो? इतना शोर करके छुपाना क्या चाहते हो आप? ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया वही देखे जो आप दिखाएं? अब बताता हूं, आपकी पीड़ा क्या है? आप क्यों घबरा गए! कैसे आपके निवेश पर चोट पहुंच गई और क्यों आप बौखला गए? अखिलेश जी! एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे आपने अपना रिश्ता छिपा लिया। अखिलेश जी भरत यादव आपके ‘कुबेर’ चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। चंद्रपाल यादव सपा के कद्दावर नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष रहे हैं। उम्मीद है कि आपको याद आ गया होगा। अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के नाम पर हुए एक फर्जी खुलासे से आप डर गए? मध्य प्रदेश में हाईवे का रास्ता कहां से जाएगा- यह भरत यादव तय करते हैं या उन्हें इस बात की जानकारी होती है। जो आपके हैं, अपने हैं, खास हैं।”

ओपी राजभर ने आगे लिखा, “इस मामले में अखिलेश जी आपकी तिलमिलाहट बता रही है कि भरत यादव ने आपसे और अपने लोगों से वहां की जमीनों में भारी निवेश करवाया है। और जमीन ‘खाने’ के मामले में सैफई परिवार बहुत अनुभवी है। इसे पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे में सैफई परिवार ने यही किया था। फिरोजाबाद से इटावा तक जमीनें खरीदी गईं और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से मोड़ा गया। निजी फायदे के लिए सैफई तक अनावश्यक रूप से रूट का मार्ग घुमाकर एक्सप्रेसवे की दूरी 30 किमी और ज्यादा बढ़ा दी गई। औने-पौने दाम में जमीनों को खरीदकर भारी भरकम मुआवजा वसूला गया। गोमती रिवर फ्रंट की रिपोर्ट जारी करने के बाद अखिलेश को डर बैठ गया है कि कहीं मध्य प्रदेश एक्सप्रेसवे रिपोर्ट जारी न हो जाए, जिससे उनका निवेश डूब जाए। जांच एजेंसियों को पता लगाना चाहिए कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से सफेदपोश निवेशक शामिल हैं।”

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इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनते ही उनके परिजन और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट अपने नाम खरीदे। पढ़ें पूरी खबर