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गांव के बाहर ‘द ग्रेट चमार्स’ बोर्ड से चर्चा में आए थे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद

साल 2011 में चंद्रशेखर हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका जाना चाहते थे। लेकिन जब वे सहारनपुर के अस्पताल में अपने पिता का इलाज करा रहे थे तब उन्होंने दलितों पर अत्याचार की एक खबर पढ़ी। इसके बाद उन्होंने विदेश जाने का विचार छोड़ दलित एक्टिविस्ट बनने का फैसला किया।

Bhim army chief, chandrashekhar azad, ravan, Bhim army, dalit activist, new political party, New Political Party, Azad Samaj Party, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiचंद्रशेखर को पुलिस ने 2017 में जातीय दंगे फैलाने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया था। (फाइल फोटो)

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर का जन्म सहारनपुर में चटमलपुर के पास घडकौली गांव में हुआ था। इनके पिता गोवर्धन दास सरकारी स्कूल में प्रिसिंपल थे। इनकी मां का नाम कमलेश देवी है। चंद्रशेखर ने डीएवी कॉलेज, देहरादून से पढाई की है। साल 2011 में चंद्रशेखर हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका जाना चाहते थे। लेकिन जब वे सहारनपुर के अस्पताल में अपने पिता का इलाज करा रहे थे उस दौरान उन्होंने दलितों पर अत्याचार की एक खबर पढ़ी। इसके बाद उन्होंने विदेश जाने का विचार छोड़ दलित एक्टिविस्ट बनने का फैसला किया।

लॉ ग्रेजुएट चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण साल 2015 में पहली बार अपने गांव के प्रवेश द्वार लगे एक बोर्ड को लेकर विवादों में आए थे। उन्होंने बोर्ड पर ‘द ग्रेट चमार्स’ लिखा था। उनके इस कदम के बाद गांव में दलित और ठाकुर के बीच तनाव पैदा हो गया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने नाम से ‘रावण’ उपनाम हटा लिया।

उन्होंने विनय रतन आर्य के साथ मिलकर 2014 में भीम आर्मी या भीम आर्मी भारत एकता मिशन की स्थापना की है। बताया जाता है कि ये दलित चिंतक सतीश कुमार के दिमाग की उपज है।  इस संगठन के साथ 7 राज्यों में 40 हजार से अधिक लोग जुड़े हैं। संगठन कहना है कि भीम आर्मी एक बहुजन संगठन है जो शिक्षा के माध्यम से दलितों के लिए काम कर रहा है। संगठन की तरफ से 300 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। 18 से 25 साल का कोई भी दलित युवक इस संगठन में शामिल हो सकता है। मुस्लिम समुदाय के लोग भी संगठन में शामिल हो सकते हैं।

दलित छात्रों की पिटाई के बाद चर्चा में आया था संगठनः सितंबर साल 2016 में सहारपुर के छुटमलपुर में स्थित एएचपी इंटर कॉलेज में दलित छात्रों की कथित पिटाई के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार यह संगठन सुर्खियों में आया था। साल 2017 में सहारनपुर में महाराणा प्रताप की जयंती पर तेज आवाज में गाना बजाने को लेकर दलितों ने शिकायत की थी। इसके बाद हुई हिंसा में कथित तौर पर दलितों के 25 घर जला दिए गए थे और एक की मौत हो गई थी। इस हिंसा के विरोध में जब प्रदर्शन किया गया तो पुलिस ने 37 लोगों को जेल में डाल दिया। इतना ही नहीं 300 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया।

रासुका में हुई थी गिरफ्तारीः हिंसा के बाद चंद्रशेखर को पुलिस ने जातीय दंगे फैलाने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस ने चंद्रशेखर के सिऱ पर 12 हजार रुपये का इनाम भी रखा था। चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भीम आर्मी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। इस विरोध प्रदर्शन में 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था।

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