राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 6 सितंबर को लंदन के मध्य में स्थित खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे गए थे। उनके इस दौरे को लेकर सिख समुदाय के कुछ लोगों के बीच बहस शुरू हो गई है। सवाल खास तौर पर भागवत के गुरुद्वारे जाने और उनके साथ मौजूद दो सिख कारोबारियों को लेकर उठाए जा रहे हैं।
भागवत के साथ ब्रिटेन के कारोबारी और समाजसेवी पीटर वीरदी और राज्यसभा सांसद व कारोबारी विक्रमजीत सिंह साहनी भी थे। दोनों ने भागवत के दौरे का बचाव किया है। उनका कहना है कि गुरुद्वारा हर किसी के लिए खुला है। किसी व्यक्ति का स्वागत करने का यह मतलब नहीं है कि उसके संगठन या उसकी विचारधारा का समर्थन किया जा रहा है।
पीटर वीरदी कौन हैं?
6 दिसंबर 1973 को बर्मिंघम में जन्मे पीटर वीरदी का असली नाम हरदीप सिंह वीरदी है। वह ब्रिटेन के सिख कारोबारी, प्रॉपर्टी डिवेलपर और समाजसेवी है। उन्होंने मुख्य रूप से B&S Property के जरिए अपना कारोबार खड़ा किया। यह कंपनी बड़े और महंगे प्रॉपर्टी प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है। इसके अलावा उनका कारोबार रिन्यूएबल एनर्जी, अंतरराष्ट्रीय खनिज कारोबार और बीमा ब्रोकिंग सेक्टर में भी है।
वीरदी ब्रिटेन की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं और उन्होंने कंजर्वेटिव व लेबर- दोनों पार्टियों को चंदा दिया है। वह इंग्लिश नेशनल ओपेरा के बोर्ड में शामिल होने वाले पहले सिख थे। उन्होंने वीरदी फाउंडेशन की स्थापना भी की। यह फाउंडेशन जरूरतमंद बच्चों, आपदा राहत और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कामों में मदद करता है। पंजाब में कैंसर की जांच के लिए लगाए जाने वाले शिविर भी इसके कामों में शामिल हैं।
हालांकि, वीरदी का सार्वजनिक जीवन विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2008 से 2012 के बीच 12.5 करोड़ यूरो के कार्बन-क्रेडिट वैट घोटाले के मामले में उन्हें जर्मनी में दोषी ठहराया गया था। 2017 में लंदन में गिरफ्तारी के बाद उन्हें जर्मनी प्रत्यर्पित किया गया। 2021 में फ्रैंकफर्ट की एक अदालत ने उन्हें 39 महीने की जेल की सजा सुनाई। मई 2024 में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी ने एक अलग विदेशी रिश्वत मामले में भी उनके खिलाफ आरोप लगाए।
विक्रमजीत सिंह साहनी कौन हैं?
पद्मश्री से सम्मानित विक्रमजीत सिंह साहनी भारतीय कारोबारी, शिक्षाविद, समाजसेवी और राजनेता हैं। वह सन इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी उर्वरक, कमोडिटी और केमिकल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ी है। कंपनी का कारोबार मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप समेत कई देशों में फैला है।
साहनी वर्ल्ड पंजाबी ऑर्गनाइज़ेशन के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट भी हैं। यह संगठन 20 से ज्यादा देशों में रहने वाले पंजाबियों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के लिए काम करता है।
समाजसेवा के क्षेत्र में साहनी ने अफगानिस्तान से हिंदुओं और सिखों को बाहर निकालने और उनके पुनर्वास में भी मदद की है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद उन्होंने तीन चार्टर्ड विमान भेजकर 500 से ज्यादा लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकाला। इसके बाद उनके बच्चों की पढ़ाई और पुनर्वास में भी मदद की। सन फाउंडेशन के जरिए वह दिव्यांग और जरूरतमंद युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने मोबाइल टेस्टिंग क्लीनिक चलाने, ऑक्सीजन सिलेंडर बांटने और बड़े स्तर पर लंगर की व्यवस्था करने जैसी पहल की। उनके सामाजिक कार्यों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी सम्मानित किया और उन्हें अनमोल सिख रत्न पुरस्कार दिया।
साहनी फिलहाल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे। लेकिन इस साल की शुरुआत में अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
भागवत के लंदन दौरे को लेकर क्या बोले ये कारोबारी?
साहनी ने गुरुद्वारे में मोहन भागवत की मौजूदगी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भागवत यहां ‘एक श्रद्धालु के तौर पर’ गए थे। साहनी के मुताबिक, भागवत ने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने अरदास की, रुमाला साहिब भेंट किया और कड़ाह प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि इस दौरे को लेकर सिख समुदाय के एक छोटे से वर्ग की ओर से जताए गए विरोध से वह ‘बहुत दुखी’ हैं।
साहनी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के श्री दरबार साहिब जाने का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिख संस्थाएं पहले भी अलग-अलग राजनीतिक दलों और उनके नेताओं का स्वागत करती रही हैं, भले ही उनके राजनीतिक संगठनों को लेकर विवाद रहे हों।
उन्होंने यह भी कहा कि RSS ने सिख धर्म को एक अलग धर्म के रूप में मान्यता दी है। इसके समर्थन में उन्होंने फरवरी में लुधियाना में मोहन भागवत के दिए बयान का जिक्र किया जिसमें भागवत ने इसी बात को दोहराया था।
भागवत के साथ लंदन के गुरुद्वारे गए पीटर वीरदी ने भी इस दौरे का बचाव किया। उन्होंने कहा, ”गुरु का दरवाजा सभी के लिए खुला है।” वीरदी ने कहा कि किसी सोशल मीडिया समूह को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि गुरुद्वारे में कौन जा सकता है और कौन नहीं।
उन्होंने कहा कि भागवत गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकने और सम्मान देने के लिए गुरुद्वारे गए थे। उन्होंने यह भी कहा, ”किसी का स्वागत करना समर्थन करना नहीं है और बातचीत करना आत्मसमर्पण नहीं है।
वीरदी ने उन लोगों की भी आलोचना की जिन्हें उन्होंने अचानक सामने आने वाले संगठनों और खुद को ‘सिख पुलिस’ मानने वाले लोगों के तौर पर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आलोचक व्यक्तिगत टिप्पणियां करने और टकराव वाली भाषा का इस्तेमाल करने में लगे हैं।
RSS और सिख संस्थाओं के बीच विवाद क्यों है?
बता दें कि आरएसएस और सिख धार्मिक संस्थाओं के कुछ वर्गों के बीच विवाद पुराना है। इसकी एक बड़ी वजह RSS और उसके सिख संगठ- राष्ट्रीय सिख संगत की गतिविधियों को लेकर सिख धार्मिक नेतृत्व की चिंताएं रही हैं।
जुलाई 2004 में अकाल तख्त ने सिखों से RSS और राष्ट्रीय सिख संगत की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने को कहा था। यह निर्देश उस समय आया जब इन संगठनों की ओर से गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश के 400 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर सवाल उठे थे।
इस विवाद का एक बड़ा मुद्दा सिख धर्म की अलग पहचान और RSS की ओर से सिख धर्म और हिंदू धर्म के बीच रिश्ते को देखने का नजरिया रहा है। यह मुद्दा धार्मिक होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील रहा है।
