पंजाब के फगवाड़ा में रविवार को रविदासिया समुदाय के हजारों लोग एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लंबे समय से चली आ रही मांग को फिर दोहराया कि जनगणना (Census) में ‘रविदासिया धर्म’ को एक अलग धर्म के रूप में मान्यता दी जाए।

इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन ने किया था। इसमें संत निरंजन दास भी शामिल हुए जो डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख हैं। यह डेरा रविदासिया समुदाय का सबसे बड़ा धार्मिक संस्थान माना जाता है। कार्यक्रम के बाद समुदाय की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को संबोधित एक पत्र तैयार किया गया जिसमें अलग ‘रविदासिया धर्म’ को जनगणना में शामिल करने की मांग दोहराई गई।

आपको बता दें कि यह मुद्दा नया नहीं है। साल 2010 में रविदासिया समुदाय के लोगों ने खुद को एक अलग धर्म का अनुयायी घोषित किया था। अब एक बार फिर यह मांग जोर पकड़ रही है। इस मांग के राजनीतिक मायने भी हैं क्योंकि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं और रविदासिया समुदाय राज्य की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है।

रविदासिया कौन हैं?

गुरु रविदास 15वीं और 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के महान संत और कवि थे। उन्होंने ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा दी थी जिसका अर्थ है ऐसा समाज और ऐसा शहर जहां दुख, भय, भेदभाव और असमानता ना हो तथा सभी लोगों को समान अधिकार और सम्मान मिले।

रविदासिया समुदाय खुद को गुरु रविदास का अनुयायी मानता है। इस समुदाय के अधिकतर लोग दलित समाज से आते हैं। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में इस समुदाय के करीब 12 लाख लोग रहते हैं। कपूरथला, होशियारपुर, नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर) और जालंधर जैसे जिले इस क्षेत्र में शामिल हैं।

रविदासिया समुदाय का सबसे प्रभावशाली धार्मिक संस्थान डेरा सचखंड बल्लां माना जाता है। इसकी स्थापना 20वीं सदी की शुरुआत में बाबा संत पीपल दास ने की थी। यह डेरा पहले सिख धर्म से जुड़ा हुआ था लेकिन 2010 में इसने सिख धर्म से अपने दशकों पुराने संबंध खत्म कर दिए और ‘रविदासिया धर्म’ को एक अलग धर्म के रूप में औपचारिक रूप से घोषित कर दिया।

मई 2009 की एक घटना ने रविदासिया समुदाय की अलग धार्मिक पहचान की मांग को और मजबूत कर दिया। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में रविदासिया समुदाय के एक धार्मिक कार्यक्रम पर कुछ हमलावरों ने हमला कर दिया। इस हमले में डेरा सचखंड बल्लां के वरिष्ठ आध्यात्मिक गुरु संत रामानंद की मौत हो गई जबकि कई श्रद्धालु घायल हो गए।

इस घटना के बाद पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इसे रविदासिया समुदाय के इतिहास का एक अहम मोड़ माना जाता है क्योंकि इसके बाद समुदाय ने अपनी अलग धार्मिक पहचान को लेकर और अधिक मजबूती से आवाज उठानी शुरू कर दी। इसके बाद 2010 से डेरा सचखंड बल्लां ने अपने मंदिरों और गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब की जगह ‘अमृतवाणी’ को स्थापित करना शुरू कर दिया। अमृतबाणी रविदासिया धर्म का पवित्र ग्रंथ है जिसमें गुरु रविदास की 200 वाणियां यानी भजनसंकलित हैं।

पंजाब की राजनीति में रविदासिया समुदाय की अहमियत

रविदासिया समुदाय का कहना है कि अब रविदासिया धर्म एक अलग धार्मिक पहचान बन चुका है। इसके अपने पूजा स्थल, धार्मिक ग्रंथ, धार्मिक प्रतीक और रीति-रिवाज हैं। इसके बावजूद जनगणना (Census) में ऐसा कोई अलग विकल्प नहीं है जिससे इस धर्म को मानने वाले लोग अपनी धार्मिक पहचान दर्ज करा सकें।

इसी वजह से समुदाय ने सरकार से मांग की है कि जनगणना में ‘रविदासिया धर्म’ को अलग धर्म के रूप में शामिल किया जाए।

समुदाय की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की आजादी देता है। इसलिए रविदासिया समुदाय को भी जनगणना में अलग धार्मिक पहचान दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए।

समुदाय के नेताओं का कहना है कि अगर जनगणना में रविदासिया धर्म को अलग श्रेणी दी जाती है तो इससे यह सही जानकारी मिल सकेगी कि इस धर्म को मानने वालों की संख्या कितनी है और वे देश के किन-किन हिस्सों में रहते हैं।

पंजाब में देश की सबसे बड़ी रविदासिया आबादी रहती है। वहीं राज्य की करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से आती है। अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के डॉ. कमल साम्पला ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में रविदासिया और आदि धर्मी समुदाय (जो अलग धार्मिक पहचान की मांग करने वाला एक अन्य दलित आंदोलन है) की संयुक्त आबादी करीब 30.95 लाख थी। उस समय यह राज्य की कुल आबादी का 11 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा थी।

रविदासिया समुदाय की बड़ी आबादी और राजनीतिक प्रभाव का असर चुनावी कार्यक्रमों पर भी देखा जा चुका है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तारीख चुनाव आयोग ने इसलिए आगे बढ़ा दी थी क्योंकि कई राजनीतिक दलों ने बताया था कि तय कार्यक्रम के दौरान लाखों श्रद्धालु डेरा की ओर से आयोजित वार्षिक यात्रा में शामिल होने के लिए वाराणसी जाते हैं।

इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु रविदास जयंती के अवसर पर पंजाब के एक डेरा में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर गुरु रविदास के नाम पर रखने की घोषणा भी की।

पंजाब: पीएम मोदी के जालंधर दौरे से दोआबा क्षेत्र को साधेगी बीजेपी, दलित वोटर निभाते हैं निर्णायक भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 17 जुलाई को जालंधर जाएंगे। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पीएम का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है। बीजेपी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है और जालंधर दोआबा क्षेत्र का केंद्र है। दोआबा क्षेत्र की राजनीति में राज्य की अनुसूचित जाति की 33.34 प्रतिशत (एक तिहाई) आबादी का दबदबा है। ऐसे में ये राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी तौर पर महत्वपूर्ण है।