CJP Expansion Plan: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के मामले में जवाबदेही तय करने को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मांग उठाकर कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों का विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। यह विरोध प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से सफल भी रहा था। इसके बाद अब सीजेपी अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसके संकेत मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, निकट भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य उन राज्यों में का दौरा करने की तैयारी कर रहे हैं, जहां छात्र शिक्षा प्रणाली संबंधित समस्याओं के चलते कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस पर आशुतोष रांका ने कहा है कि वे जरूरत पड़ने पर बड़े विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू कर सकते हैं।
जरूरत पड़ी तो करेंगे विरोध प्रदर्शन
दरअसल, सीजेपी प्रवक्ता ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में आशुतोष रांका ने कहा कि सीजेपी ने उन कई राज्यों का दौरा करने की योजना बनाई है, जहां छात्रों की संख्या अधिक है और जहां वे लंबे समय से समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो हम इन राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं।”
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के कानूनी लड़ाई और सहायता के लिए 1 करोड़ रुपये का कोष बनाने की घोषणा की है। उन्होंने 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के दौरान हुई हिंसा से संबंधित सबूत इकट्ठा करने के लिए ‘SAAKSHI’ नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने युवा आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।
अभिजीत दीपके और कोर टीम करेगी कई राज्यों का दौरा
आशुतोष रांका ने कहा कि पार्टी के प्रमुख नेतृत्व संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता सौरभ दास और रत्ना सिंह आगामी दिनों में बैठक करेंगे और आगे की कार्रवाई तय करेंगे। उन्होंने कहा, “अभिजीत दीपके टाइफाइड से उबर रहे हैं। हम अगले कदम तय करने से पहले कुछ दिनों का आराम करेंगे। इस बीच विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए या जिन पर मामला दर्ज किया गया है, उनके लिए हमारी कानूनी सहायता तब तक जारी रहेगी जब तक देश भर के हर प्रदर्शनकारी को न्याय नहीं मिल जाता।”
सीजेपी की कोर टीम में कौन-कौन?
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं, जो कि महाराष्ट्र के मूल निवासी है। इससे पहले वे आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसंपर्क में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। इसके अलावा मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं और दीपके के घनिष्ठ मित्र है।
आशुतोष रांका आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग स्नातक और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातकोत्तर हैं। वे सामाजिक कल्याण और व्यवस्थागत सुधार पर केंद्रित एक मंच, परिवर्तन का संचालन करते हैं।
सीजेपी के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास संगठन के मुख्य प्रवक्ता और खोजी पत्रकार हैं। इसके अलावा रत्ना सिंह वकील और पूर्व पत्रकार हैं। दोनों ही दिल्ली में रहते हैं। समूह ने सदस्यता अभियान नहीं चलाया है, लेकिन स्वयंसेवक स्वेच्छा से इसमें शामिल हुए हैं।
अब इसमें लगभग 12 सदस्यों की एक मुख्य टीम बन गई है, जिसमें लोक नीति की छात्रा वैष्णवी गौर और आफरीन नवाज़ शामिल हैं, जिन्होंने छात्रों के कल्याण के लिए काम करने के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी।
कैसे हुआ कॉकरोच जनता पार्टी का गठन?
सीजेपी की गठन की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा की गई एक टिप्पणी से हुई है, जिसमें उन्होंने कानून के क्षेत्र में बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोचों’ से की थी। इस टिप्पणी से प्रेरित होकर अभिजीत दीपके ने 16 मई को इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की, जो भाजपा पर एक व्यंग्यात्मक पलटवार जैसी थी।
कुछ ही दिनों में, इस अकाउंट के इंस्टाग्राम पर 20 मिलियन फॉलोअर्स हो गए और खबरों के मुताबिक इसने प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर स्थापित भारतीय राजनीतिक पार्टी को पीछे छोड़ दिया। जून में NEET पेपर लीक के बाद अभिजीत दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की और लोगों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा होने का आह्वान किया।
सोनम वांगचुक ने भी कर दिया समर्थन
लद्दाख से आने वाले प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी उनके साथ शामिल हो गईं और उन्होंने इस आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने बाद में 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च का आयोजन किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस के साथ झड़पें हुईं। हालांकि, सरकार को दबाव में झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया।
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नीट पेपर लीक के खिलाफ करीब 36 दिन चला कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन 20 जुलाई को हिंसक हो गया था। दरअसल, उस दिन CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया था जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसा देखने को मिली थी। फोर्सेस ने प्रदर्शनकारियों ने को कंट्रोल करने के लिए टियर गैस, वॉटर कैनन और कथित तौर पर पेलेट गन का भी इस्तेमाल किया था जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल भी हुए। हालांकि दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर इनकार किया था, लेकिन अब 20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पढ़िए पूरी खबर…
