ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इसके दिसंबर 2029 तक पूरा होने का टारगेट है। इस प्रोजेक्ट को रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) बना रहा है, जो रेल मंत्रालय के तहत एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है और इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इससे उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और हिमालयी क्षेत्र में यात्रा आसान हो जाएगी।

हाल ही में एक बयान में RVNL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) सलीम अहमद ने कहा कि 125 किमी लंबे रेल प्रोजेक्ट का कुल 78 फीसदी काम पूरा कर लिया है, जबकि टनल की खुदाई का लगभग 97 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा, “दिसंबर 2029 तक पूरा होने का टारगेट वाला यह प्रोजेक्ट हिमालयी क्षेत्र तक पहुंच को बेहतर बनाएगा, चार धाम तीर्थयात्रा कॉरिडोर को सपोर्ट करेगा, बॉर्डर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, टूरिज्म और लोकल इकॉनमी को बढ़ावा देगा, और इस क्षेत्र में यात्रा के समय को काफी कम करेगा।”

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन क्या है?

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई लाइन प्रोजेक्ट को यूनियन बजट 2010-11 में मंज़ूरी दी गई थी। यह देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली ज़िलों से होकर गुज़रती है। यह देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसी ज़रूरी धार्मिक जगहों को ऋषिकेश और देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ेगी।

टनल बनाने का चल रहा काम

इस प्रोजेक्ट में मुख्य रूप से टनल बनाने का काम शामिल है। इसमें 104 किमी लंबी 16 मेन टनल और लगभग 98 किमी लंबी 12 एस्केप टनल शामिल हैं। अब तक 101 किमी मेन टनल और 95 किमी एस्केप टनल पूरी हो चुकी हैं। कंस्ट्रक्शन में तेज़ी लाने के लिए कुल 5 किमी लंबी आठ एक्सेस रोड भी बनाई गई हैं और वे सभी अब पूरी हो चुकी हैं। रेलवे के मुताबिक प्रोजेक्ट के तहत बनाए जाने वाले 19 बड़े पुलों में से 11 पूरे हो चुके हैं। जबकि बाकी पुलों पर काम चल रहा है।

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देश में एक टाइगर कॉरिडोर के बीच रेलवे लाइन को हरी झंडी मिल गई है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (SC-NBWL) की स्टैंडिंग कमिटी ने मध्य प्रदेश में जुझारपुर और चिचोंडा के बीच तीसरी रेलवे लाइन के लिए वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस की सिफारिश की है। ऐसे में भारत का मुख्य टाइगर कॉरिडोर सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिज़र्व के बीच बंट सकता है। पढ़ें पूरी खबर