जब टिकैत ने संबित को लिया आड़े हाथ, बोले इनकी सरकार कहां, सरकार तो मोदी की है, ये तो केवल भट्ठे के मुंशी

दरअसल, आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने टिकैत से सवाल किया कि वो सरकार उनसे कह रही है कि वो हर बिंदू पर बात करने को तैयार हैं। टिकैत ने करारा जवाब देते हुए कहा कि हम बात करने को तैयार हैं। लेकिन बात भारत सरकार से ही करेंगे।

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बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और किसान नेता राकेश टिकैत में हुई बहस (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

किसान नेता राकेश टिकैत ने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा को आड़े हाथ लेकर कहा कि इनकी सरकार कहां है। ये तो खाली बीजेपी के प्रवक्ता हैं। सरकार तो नरेंद्र मोदी की है, ये तो केवल भट्ठे के मुंशी की तरह से काम करते हैं। इनसे बात क्यो करें।

दरअसल, आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने टिकैत से सवाल किया कि वो सरकार उनसे कह रही है कि वो हर बिंदू पर बात करने को तैयार हैं। टिकैत ने करारा जवाब देते हुए कहा कि हम बात करने को तैयार हैं। लेकिन बात भारत सरकार से ही करेंगे। संबित पात्रा तो बीजेपी का है। इनकी पार्टी तो खत्म हो रही है। ये तो केवल बोलने का मौका तलाश करते हैं। जहां मौका मिले वहीं पर शुरू हो जाते हैं।

टिकैत ने संबित को बीच में बोलने पर फटकार भी लगाई। संबित बीच में बोले तो टिकैत ने कहा कि तुम्हारे कोई बीमारी है। उनका कहना था कि ये भट्ठे के मुंशी हैं। इनका काम तो केवल हिसाब किताब रखना है। किसान नेता ने कहा कि बीजेपी के नेताओं को तो सरकार ने कैद कर रखा है। वो अपनी बात कहने आए हैं ये बेवजह बीच में कूद रहे हैं।

टिकैत यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने संबित पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इन्हें जो महकमा दिया था वो तो इन्होंने बेच दिया। टिकैत ने कहा कि ये काले कानून सरकार को वापस लेने ही होंगे। उन्होंने चेतावनी और तंज भरे लहजे में इशारा करते हुए संबित से कहा कि गांव में आना तो वहां के डॉक्टर आपका इलाज करेंगे।

संबित पात्रा ने टिकैत पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ये रवैया यह उचित नहीं है। इस तरह से असम्मान किया जाए। किस प्रकार का अहंकार है ये। संबित ने कहा कि कुछ देर पहले तक टिकैत कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर पर भी सवाल उठा रहे थे। संबित पात्रा ने अगर ये हमें इस तरह से लताड़ देते हैं तो आम आदमी के साथ क्या करते होंगे। आप उम्र और अनुभव में बड़े हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम में से कोई भी अहंकारी बने। हमें मिलकर किसानों को समझाना होगा।

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