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मोदी बड़े रिस्क टेकर, राहुल यथास्थिति वाले- दोनों दिग्गजों को लेकर जब PK ने जाहिर की थी राय

जब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के राजनीतिक दृष्टिकोण में क्या अंतर है। तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इसके बारे में तो एक किताब लिखी जा सकती है।

जब प्रशांत किशोर से प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि मोदी बड़े रिस्क टेकर और राहुल यथास्थिति वाले नेता हैं। (एक्सप्रेस फोटो/ पीटीआई)

पिछले दिनों चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कयास यह लगाए जा रहे हैं प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। हालांकि प्रशांत किशोर पहले भी राहुल गांधी के साथ काम कर चुके हैं। साल 2017 में हुए उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई थी। एक इंटरव्यू के दौरान जब प्रशांत किशोर से प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की राजनीति को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि मोदी बड़े रिस्क टेकर और राहुल यथास्थिति वाले हैं।

पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में जब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के राजनीतिक दृष्टिकोण में क्या अंतर है। तो इसके जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि इसके बारे में तो एक किताब लिखी जा सकती है। इसके बाद जब बरखा दत्त ने उनसे पूछा कि अगर आपको दोनों नेताओं की व्याख्या एक शब्द में करनी होगी तो आप कैसे करेंगे।

इसके जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर मुझे एक शब्द में ही व्याख्या करनी है तो प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े रिस्क टेकर हैं। उनके अंदर बड़े रिस्क लेने की क्षमता है। अगर राहुल के बारे में बात की जाए तो वो यथास्थिति वाले नेता है। हो सकता है कि वह ऐसे इसलिए हैं क्योंकि वे एक 100 साल पुरानी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसलिए उन्हें एक 30 साल पुरानी पार्टी के नेता की तुलना में चीजों को बदलाव करना मुश्किल हो रहा हो। आगे प्रशांत किशोर ने कहा कि मोदी बड़े डेयरिंग किस्म के व्यक्ति हैं और वे रिस्क लेना पसंद करते हैं।

इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कई लोग मान रहे हैं कि 2014 के बाद कांग्रेस राजनीतिक रूप से कमजोर हुई है। जबकि ऐसा नहीं है। कांग्रेस के प्रदर्शन में गिरावट 1985 के बाद से ही हो रही है। 1989 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी नीत कांग्रेस को 197 सीटें मिली थी। जिसके बाद यह माना गया था कि कांग्रेस को हार मिली है। लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करीब 140 सीटें ही मिली और इसको जीत के तौर पर देखा गया। एक पार्टी के तौर पर कांग्रेस में लगातार गिरावट हो रही है।    

बरखा दत्त के साथ बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि मेरे और राहुल गांधी के बीच कई चीजों को लेकर मतभेद हैं। वो सोचते हैं कि नरेंद्र मोदी को हराकर ही कांग्रेस चुनाव जीत सकती है। जबकि मेरा मानना है कि पहले कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्हें पार्टी के संगठन को मजबूत करने पर काम करना चाहिए। भले ही चुनाव जीतने में 5-10 साल लग जाएं।

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