जब रामदेव से बोले ऐंकर- दिल में सियासत में आने की ख्वाहिश बाकी, योगगुरु गाने लगे भजन

2017 के एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में रामदेव ने कहा था, "हम तो फकीर आदमी हैं भाई। लेकिन हम चाहते हैं कि देश के अच्छे शासक हों, जो देश के लिए अच्छी नीतियां बनाएं।"

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 22, 2021 3:32 PM
ramdev, black moneyयोग गुरू बाबा रामदेव। (Indian Express)।

पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव पिछले करीब छह सालों से केंद्र की भाजपा सरकार का समर्थन करने वाले नेता के तौर पर जाने जाते रहे हैं। दरअसल, 2012 में जनलोकपाल बिल के लिए आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने उन पर कई तरह के आरोप लगाए थे। इसके बाद रामदेव ने प्रत्य़क्ष तौर पर मोदी सरकार का समर्थन शुरू कर दिया था। हालांकि, कुछ साल पहले जब रामदेव से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में पूछा गया था, तब उन्होंने इस क्षेत्र में आने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्होंने सरकार को नीतियों को लेकर जरूर सलाह दी थी।

क्या था रामदेव से सवाल, क्या मिला जवाब?: दरअसल, जब रामदेव से एंकर ने पूछा ये बताइए कि सियासत से पूरी तरह मोहभंग हो गया या आगे कोई गुंजाइश है। इस पर रामदेव ने कहा, “सियासत से मैं खामोश हूं। मैं मानता हूं कि देश का वर्तमान और भविष्य सियासत ही तय करती है। एबीपी न्यूज को भी सैटेलाइट से लिंक करने का और हर घर में दिखाने का लाइसेंस सरकार ही देती है। बच्चे हम ही पैदा करते हों भले ही, लेकिन वो पढ़ेंगे क्या, ये हमारी तरह बिना औलाद वाले मोदीजी तय करते हैं।”

रामदेव ने आगे कहा, “हमारे बच्चे क्या पढ़ेंगे, बीमार होने के बाद हमें क्या उपचार मिलेगा ये सरकार तय करती है। करोड़ों सालों से जिस देश में योग, आयुर्वेद, यूनानी सारी प्राकृतिक चिकित्सा मौजूद है, वहां सबके लिए तीन फीसदी बजट। एलोपैथी के लिए 97 फीसदी बजट। थोड़ा तो इंसाफ कर दो। लेकिन क्योंकि राजनीति तय करती है कि किस चिकित्सा पद्धति को कितना बजट दिया जाएगा।”

भजन सुनाकर दिया एंकर के सवाल का जवाब: इस पर जब एंकर ने कहा कि ये तभी होगा जब रामदेव जी सियासत में होंगे और इस स्थिति में होंगे कि वे नीति को प्रभावित कर सकें। मैं आपके भाव में महसूस कर रहा हूं कि आपके दिल में वो ख्वाहिश बाकी हैं कहीं।

इस पर रामदेव फिर बोले- नहीं कोई ख्वाहिश नहीं है। इसके बाद रामदेव ने भजन के अंदाज में कहा, “जो सुख पायो राम भजन में, वो सुख नहीं अमीरी में। मन लागो मेरा यार फकीरी में। भला बुरा सबका सुन लीजे कर गुजरा न गरीबी में। हाथ में कोंडी और बगल में सोहटा चारों दिशा जगीरी में। मन लागो मेरा यार फकीरी में।”

रामदेव ने कहा, हम तो फकीर आदमी हैं भाई। लेकिन हम चाहते हैं कि देश के अच्छे शासक हों, जो देश के लिए अच्छी नीतियां बनाएं। जो नीतियां बनें वो देशहित में हों। उन्होंने कहा, “मोदीजी की नीयत अच्छी है। अच्छी नीतियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं और मेहनत भी पूरी कर रहे हैं।”

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