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नूपुर शर्मा कब की जा सकती हैं अरेस्ट?…कानून का जिक्र बताने लगे रिजवान अहमद, बोले J&K एक्टिविस्ट- आप वकील नहीं, “झुके हुए हैं”

नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को जुमे की नवाज के बाद देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और हिंसा की घटनाएं भी हुईं।

Nupur Sharma| Nupur Sharma Photo| Nupur Sharma Latest Photo|
नूपूर शर्मा (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

देश के कई राज्यों में शुक्रवार को जुमे की नवाज के बाद नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। इस विरोध प्रदर्शन में हिंसा की घटनाएं भी हुईं और कई जगहों पर आपत्तिजनक नारे भी लगायें गए। वहीं कई राज्यों में पुलिस को हालात काबू करने के लिए लाठी चार्ज भी करना पड़ा। इसी मुद्दे को लेकर टाइम्स नाउ नवभारत चैनल पर बहस चल रही थी, जिसमे वकील रिजवान अहमद ने बताया कि किन परिस्थितियों में नूपुर शर्मा को गिरफ्तार किया जा सकता है।

कानून का जिक्र करते हुए वकील रिजवान अहमद ने कहा, “सबसे संगीन धारा जो नूपुर शर्मा पर लगी है वो 153A लगी है और इसमें सजा है 3 साल। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि अगर किसी अपराध की सजा 7 साल से कम है तो पुलिस बहुत गंभीर मामले में अरेस्ट करेगी और इसमें चार्जशीट का टाइम भी 90 दिन का है। चार्जशीट से पहले कभी भी नूपुर को पुलिस अरेस्ट कर सकती है, लेकिन सजा 7 साल से कम है तो पुलिस तकनीकी तौर पर नूपुर को अरेस्ट नहीं करेगी।”

रिजवान अहमद ने आगे बताया, “अगर पुलिस को लगे की नूपुर भाग सकती हैं तो पुलिस अरेस्ट कर सकती है। अगर पुलिस को लगे कि नूपुर गवाहों को डरा-धमका रहीं हैं तो उन्हें अरेस्ट कर सकती है। अगर पुलिस को लगे कि नूपुर जांच में इंटरफेयर करेगी तो पुलिस अरेस्ट कर सकती है या फिर पुलिस को लगे कि नूपुर ने जो अपराध किया है वो फिर से दोहरा सकती हैं। बस पुलिस इन्हीं चार परिस्थितियों में नूपुर शर्मा को अरेस्ट कर सकती है।”

रिजवान अहमद के तर्कों के बाद कश्मीरी एक्टिविस्ट माजिद हैदरी ने कहा, “देश की छवि बेकार हो रही है, वो माफ़ी मांग ले। करणी सेना के लिए आप बात करेंगे, एमएफ हुसैन के लिए आप बात करेंगे। आप पक्षपाती हैं, आप वकील नहीं हैं, बल्कि झुके हुए हैं। मैं सच्चाई की बात करता हूं।”

वहीं इसके बाद एंकर सुशांत सिन्हा ने माजिद हैदरी से पूछा कि ये जो सर तन से जुदा के नारे लगाते हैं, क्या वो ठीक करते हैं। इसके जवाब में माजिद हैदरी ने कहा, “संविधान के अनुसार सजा-ए-मौत का एक कानून बनाओ, ताकि कोई किसी के धर्म को अपमानित न करे।”

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