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ममता बनर्जी ने द्रौपदी मुर्मु की जीत को माना तय तो बिफऱे अधीर रंजन, बता दिया सनकी, बीजेपी ने ऐसे ली चुटकी

ममता बनर्जी ने एक बयान देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए आम सहमति वाला उम्मीदवार देश के लिए अच्छा होता है।

Mamata Banerjee| Draupadi Murmu| bjp|
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी स्वीकार कर लिया है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के जीतने की संभावना अधिक है। ममता बनर्जी ने कहा कि महाराष्ट्र में हुए घटनाक्रम के बाद एनडीए का संख्या बल बढ़ा है। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के बयान पर उन्हें बीजेपी का एजेंट करार दिया है। बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने दोनों दलों पर चुटकी ली है।

ममता बनर्जी ने एक बयान देते हुए कहा कि चुनाव हो रहा है, इसका उन्हें दुख है। राष्ट्रपति पद के लिए आम सहमति वाला उम्मीदवार ही देश के लिए अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी ने पहले द्रौपदी मुर्मू के नाम पर चर्चा की होती, तो वह जरूर इस पर विचार करती। उन्होंने कहा कि अब आगे जो भी विपक्ष निर्णय करेगा, वह उस निर्णय के साथ रहेंगी और सभी जनजातीय और आदिवासी लोग उनके साथ हैं।

ममता बनर्जी ने कहा कि हमें भी महिला उम्मीदवार उतारने का फैसला करना चाहिए था, लेकिन यह मैं अकेले नहीं कर सकती थी। मैं विपक्ष के फैसले के साथ हूं। ममता बनर्जी ने कहा कि महाराष्ट्र में हुए घटनाक्रम के बाद एनडीए का संख्या बल बढ़ा है। वही ममता बनर्जी के बयान के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को बीजेपी का एजेंट करार दिया है।

ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी अब बीजेपी के एजेंट के रूप में और पीएम मोदी के इशारे पर काम कर रही हैं और यह उजागर हो गया है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि बीजेपी ने जब अपना संख्या बल पूरा कर लिया, उसके बाद उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया। अगर बीजेपी और एनडीए की उम्मीदवार जीतती हैं तो इसमें कोई बहुत बड़ी बात नहीं होगी।

वहीं बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने दोनों नेताओं पर चुटकी ली है। अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए लिखा, “देउचा पचामी में आदिवासियों की भूमि पर कब्जा करने के उनके असफल प्रयासों के बाद और जनजातिय महिलाओं के दस्ताने पहनने के बाद उन्हें पता चलता है कि उनकी आदिवासी विरोधी, महिला विरोधी स्थिति अस्थिर है। क्या वह यशवंत सिन्हा को छोड़ देंगी?”

बता दें कि यशवंत सिन्हा इसके पहले टीएमसी में ही थे और राष्ट्रपति चुनाव के ठीक पहले उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था। ममता बनर्जी ने यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के लिए कई बैठकें भी की थीं।

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