जब नरेंद्र मोदी को PM कैंडिडेट नहीं बनने देना चाह रहे थे एलके आडवाणी, तब मोहन भागवत ने कैसे लिया था राजनाथ सिंह का सहारा, जानें

भागवत को लगा था कि साथी प्रचारक मोदी हिंदुत्व के आदर्शों को पूरा करेंगे, जो अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी करने में नाकाम रहे थे।

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बीजेपी के नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और आरएसएस चीफ मोहन भागवत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी जब गुजरात से ताल्लुक रखने वाले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार नहीं बनने देना चाह रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुखिया मोहन भागवत ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का सहारा लिया था।

सीनियर पत्रकार कूमी कपूर ने इस बारे में हमारे सहयोगी अखबार “दि इंडियन एक्सप्रेस” के इनसाइड ट्रैक कॉलम में बताया है। वह लिखती हैं कि एक वयोवृद्ध राजनीतिक पत्रकार के अनुसार आरएसएस प्रमुख ने फरवरी 2013 से मोदी को भाजपा के पीएम पद का उम्मीदवार बनाने के लिए पैंतरेबाजी की थी।

उन्होंने आगे लिखा, “पी रमन की जल्द ही एक नई किताब आने वाली है। इसका नाम है- ट्रिस्ट विद स्ट्रॉन्ग लीडर पॉपुलिज्म (Tryst with Strong Leader Populism)। उन्होंने इसमें लिखा है कि आडवाणी ने मोदी को भाजपा अभियान समिति का अध्यक्ष बनाने के भागवत के प्रयासों को नाकाम करने की पूरी कोशिश की थी। जब आडवाणी को लगा कि वह एक बार फिर अपना नाम सामने नहीं रख सकते, तो उन्होंने सुषमा स्वराज को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश की। मगर पार्टी अध्यक्ष के रूप में राजनाथ सिंह को भागवत ने जून 2013 (गोवा में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान) में मोदी की नियुक्ति की पुष्टि करने का निर्देश दिया। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को मोदी के लिए समर्थन दिखाने का भी निर्देश दिया था।

आडवाणी ने स्पष्ट रूप से इस बैठक को छोड़ दिया था। दरअसल, भागवत को लगा था कि साथी प्रचारक मोदी हिंदुत्व के आदर्शों को पूरा करेंगे, जो अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी करने में नाकाम रहे थे।

मोदी के पीएम बनने के बाद भागवत ने उन्हें पार्टी संगठन चलाने की पूरी ताकत भी दी थी। अपने पूर्ववर्ती केएस सुदर्शन के विपरीत, उन्होंने संघ के कार्यकर्ता समूहों, बीएमएस (भारतीय मजदूर संघ), बीकेएस (भारतीय किसान संघ) और एसजेएम (स्वदेशी जागरण मंच) को नई सरकार पर अपना स्वदेशी आर्थिक एजेंडा थोपने नहीं दिया।

बता दें कि राजनाथ ने ही पीएम कैंडिडेट के लिए मोदी के नाम की घोषणा की थी। मोदी की पीएम उम्मीदवारी के ऐलान के बाद पूरे दिन ताजपोशी का ड्रामा चला था। आडवाणी बीजेपी के फैसले से नाराज थे और तब उन्हें मनाने की भी काफी कोशिशें की गई थीं। जिस वक्त मोदी के नाम का ऐलान हुआ था, वहां आडवाणी नहीं थे। हालांकि, उनके खेमे के बाकी लोग वहां थे। आडवाणी ने तब खत लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। मोदी तब आडवाणी और वाजपेयी से मिलने उनके घर भी पहुंचे थे।

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