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जब भरे सदन में खड़े होकर पंडित नेहरू ने मांगी थी श्यामा प्रसाद मुखर्जी से माफी, पढ़िए दिलचस्प किस्सा

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री रह चुके मुखर्जी ने तत्कालीन पीएम पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

Nehru and Mukherjeeश्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित जवाहरलाल नेहरू।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख आदर्शों में से एक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज जयंती है। मुखर्जी उन नेताओं में से एक थे जो जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे। वो चाहते थे कि कश्मीर पूरी तरह भारत का हिस्सा हो और वहां कानून भी अन्य राज्यों के समान हो। विशेष राज्य के दर्जे के खिलाफ उन्होंने आजाद भारत में आवाज भी उठाई। उनका मत था कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री रह चुके मुखर्जी ने तत्कालीन पीएम पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वो चाहते थे कि कश्मीर जाने के लिए किसी की अनुमति ना लेनी पड़े। हालांकि जब वो खुद श्रीनगर गए तो रास्ते में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके लिए उन्हें कुछ दिन जेल में भी बिताने पड़े।

बताते हैं कि नेहरू से मतभेद के बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने संघचालक गुरु गोलवलकर से सलाह के बाद 21 अक्टूबर 1951 में राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की। इसके बाद जब साल 1951-52 में आम चुनाव हुए तो जनसंघ से तीन सांसद चुनकर संसद भवन भी पहुंचे। इनमें से मुखर्जी भी एक थे।

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बीबीसी ने टीओआई के पूर्व संपादक इंदर मल्होत्रा का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि आम चुनाव के तुरंत बाद दिल्ली के नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस और जनसंघ के बीच कड़ी टक्कर चल रही थी। चुनावी माहौल में मुखर्जी ने संसद में बोलते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस वाइन और मनी का इस्तेमाल कर रही है। इंदर मल्होत्रा बताते हैं कि इस आरोप का नेहरू ने कड़ा विरोध किया। हालांकि नेहरू की समझ में आया कि मुखर्जी ने वाइन और वुमेन कहा है।

टीओआई के पूर्व संपादक कहते हैं कि इस पर मुखर्जी ने कहा कि आप (नेहरू) आधिकारिक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए कि मैंने क्या कहा है। हालांकि जैसे ही नेहरू को महसूस हुआ कि उनसे गलती हो गई। उन्होंने भरे सदन में खड़े हो कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से माफी मांगी। मुखर्जी ने जवाब दिया, ‘आपको माफी मांगने की जरुरत नहीं।’

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