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नेहरू की बहन ने जब राज भवन में नहीं चुकाया था बिल, पांच किस्तों में पंडित जी ने चुकाया था बकाया; पढ़ें- दोनों के झगड़े का किस्सा

पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे। वह अपनी सियासी गलियारों से लेकर बच्चों के बीच बड़े प्रिय माने जाते थे।

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नई दिल्ली में एआईसीसी की वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

पंडित जवाहर लाल नेहरू आज भले ही हमारे बीच न हों, पर वह अपनी शख्सियत, फैसलों और बातों की वजह से अमर और अमिट हैं। फिर चाहे उनकी निजी जिंदगी हो या सार्वजनिक जीवन…दोनों ही उन्हें लोगों के बीच खास और यादगार बनाते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर पढ़िए चाचा नेहरू से जुड़ी वे बातें, जो शायद ही आप जानते हों:

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  • साल 1962 के आसपास की बात है। चीन के साथ हुई जंग ने अंदर से नेहरू को झकझोर दिया था। चाहे चाल हो या फिर चेहरा…उनका चार्म तब गायब सा हो गया था।
  • 1964 में भुवनेश्वर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में वह अपना संतुलन खो बैठे थे। वह उस दौरान सामने की तरफ गिर पड़े थे। पास में बैठीं इंदिरा उन्हें उठाने को दौड़ कर पहुंची थीं।
  • पंजाब के पूर्व सीएम भीमसेन सच्चर ने पत्रकार कुलदीप नैयर को नेहरू और उनकी बहन से जुड़ी एक बात बताई थी। किस्से के मुताबिक, बहन विजय लक्ष्मी पंडित शिमला के राजभवन में ठहरी थीं, पर वहां उन्होंने बिल नहीं चुकाया था। ढाई हजार रुपए उनका बिल हो गया था। सच्चर ने इस रकम को लेकर नेहरू को खत लिखा कि अभी तक रकम आई नहीं और उन्हें इस बारे में बुरा लगता है कि पीएम की बहन के नाम पर यह रकम बकाया है। पंडित जी ने तब साफ कहा था कि वह एक बार में तो यह रकम नहीं दे सकते, पर पांच किस्तों में उसे जरूर चुका देंगे।
  • भाई-बहन के बीच लाड-प्यार भी था, पर कभी कभी झगड़े भी हो जाते थे। एक बार ऐसे ही दोनों के बीच लड़ाई हो गई थी। बीबीसी से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि यह बात तब की है, जब वह 10 बरस की थीं। बकौल विजय लक्ष्मी, “हंगरी का मसला था। मैं लंदन में थी। कुछ कहने के लिए बुलाई गई थी। मुझे लगा ठीक है। फिर यूएन में कृष्णा मेनन और हमारे अन्य नेताओं ने कुछ और मैंने उस पर गलत समझा। इस पर भाई से मेरा झगड़ा हुआ। पर अंत में मैं भाई की बात मान ही लेती थी।”
  • कहा जाता है कि नेहरू खुद पर कम पैसे खर्चा करते थे। उनके सचिव और जीवनीकार एमओ मथाई के अनुसार, कई मामलों में पंडित जी कंजूस कहे जा सकते थे। हालांकि, एक बार उन्होंने महात्मा गांधी की गहन विचार वाली मुद्रा में एक पेंटिंग पांच हजार रुपए में खरीदी थी। उन्होंने यह फैसला झटपट ले लिया था।
  • नेहरू के निजी सहायक रहे डॉ.जनक राज जय के मुताबिक, एक बार नेहरू के यहां काम करने वाला नत्थू नाम का व्यक्ति उनके कमरे के बाहर सो गया था। वह जब दफ्तर आए तो उन्होंने उसे सामने देखा। उन्होंने उसे जगाया नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा में कुछ लोगों को लगा दिया और कहा कि इसे सोने दिया जाए। नेहरू तब फांद कर अपने कमरे में गए थे और बाद में उसी तरह बाहर लौटे। पंडित जी के जाने के बाद जब नत्थू की नींद खुली तो वह अपने पास गार्ड्स को देखकर हक्का-बक्का रह गया था। पूछने लगा कि क्या हुआ? तब उसे बताया गया, “परेशान मत हो। हमें ड्यूटी पर लगाया गया था, ताकि सोने के बीच तुम्हें कोई डिस्टर्ब न करे।”
  • नेहरू का नाम लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना से भी खूब जुड़ा। कहा जाता है कि जवाहर जब गर्वनमेंट हाउस के स्वीमिंग पूल में तैरने जाते थे, तब एडविना भी उनके साथ वहां देखी जाती थीं। एडविना की बेटी पामेला हिक्स भी नेहरू से खासा प्रभावित थीं। ब्रिटिश एजेंसी से बातचीत के दौरान पामेला ने कहा था- मेरी मां अकेलेपन का शिकार थीं। वह तभी एक ऐसे व्यक्ति से मिलीं जो संवेदनशील, आकर्षक और मनमोहक था। शायद यही कारण था कि वह उनकी मोहब्बत में डूब गईं।
  • यही नहीं, लॉर्ड माउंटबेटन एडविना को लिखा नेहरू के खतों को प्रेम पत्र कहा करते थे। यह बात माउंटबेटन के नाती लॉर्ड रेम्सी ने जवाहर के जीवनीकार स्टेनली वॉलपर्ट को बताई थी, जिन्होंने इस बारे में बीबीसी को बताया था।

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