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गुड़ी पड़वा 2017: जानिए कब शुरु हो रहा है मराठी नववर्ष, मुहूर्त, विधि, मंत्र और पूजा से जुड़ी सारी जानकारी

Gudi Padwa 2017: अपने पंचाग के अनुसार महाराष्ट्रीयन समाज के लोग इसे 28 मार्च को मनाएंगे। वहीं बाकी 29 मार्च को मनाएंगे।

Gudi Padwa 2017: पंचांगों की अलग-अलग गणना के कारण रामनवमी भी इस बार दो दिन मनाई जाएगी। (photo source – PTI)

देश भर में 28 मार्च 2017 को गुड़ी पड़वा का त्यौहार मनाया जाएगा। इस त्यौहार को दो अलग-अलग दिनों में मना जाएगा। इस त्यौहार को विशेष रुप से मराठी और गोवा के लोग मनाते हैं। अपने पंचाग के अनुसार मराठी समाज के लोग इसे 28 मार्च को मनाएंगे। वहीं बाकी 29 मार्च को मनाएंगे। पंचांगों की अलग-अलग गणना के कारण रामनवमी भी इस बार दो दिन मनाई जाएगी। एक त्यौहार को दो तिथियों में मनाने का कारण तिथियों और अमावस्या समाप्ति, प्रतिपदा पर अलग-अलग समय की मान्यता के कारण हो रहा है। बता दें, गुड़ी पड़वा त्यौहार को अलग-अलग मनाने वाले लोग आठ दिन की नवरात्रि मना रहे है। यह तारीख एक सीजन के अंत और दूसरे सीजन की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत को दर्शाता है।

क्‍यों मनाते हैं गुड़ी पड़वा: पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इस दिन ब्रह्मांड बनाया था और मानव सभ्यता की शुरुआत हुई थी। भगवान ब्रह्मा को याद करने के लिए गुड़ी (गुड़िया) ऊपर उठाते हैंऔर भगवान विष्णु से आशीर्वाद का आह्वान करते हैं।

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कैसे करें पूजा– कुछ लोगों का मानना है कि सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करने के लिए रंगोली या हल्दी, कुमकुम के साथ एक स्‍वास्तिक चिन्ह बनाना चाहिए। इस दिन ब्रह्मा मूहूर्त में उठकर नित्य कामों से निवृत्त होकर अपने शरीर पर बेसन और तेल का उबटन लगाकर नहाना आदि से शुद्ध होते हैं एवं पवित्र होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर भगवान ब्रह्मा के मंत्रों का उच्चारण करके पूजा करते हैं। पूजन का शुभ संकल्प कर एक चौकी या बालू की वेदी का निर्मोण कर उसमें साफ सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर हल्दी या केसर से रंगे अक्षत से अष्टदल कमल बनाकर उस पर ब्रह्माजी की सुवर्णमूर्ति स्थापित करें। इसके बाद गणेशाम्बिका की पूजा करें और फिर इस मंत्र का जाप करें। ऊं ब्रह्मणे नमः।

इस त्यौहार पर पंडितो का कहना है कि 28 को हिंदू नववर्ष शुरू हुआ तो वर्ष का राजा मंगल होगा। 29 को शुरुआत मानी गई तो वर्ष का राजा बुध होगा। गुड़ी पड़वा से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। पारंपरिक पंचांग को आधार मानने वाले लोग 29 को गुड़ी पड़वा मनाएंगे।

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