अगर गोविंद बल्लभ पंत न करते विरोध तो UP में होता ग्वालियर, जालौन होता MP का हिस्सा; बड़ी रोचक है यह कहानी

महाकौशल कांग्रेस कमेटी ने एक प्रस्ताव देकर उत्तर प्रदेश के चार जिले झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन को मध्य प्रदेश में मिलाने की बात कही थी। वहीं मध्य भारत के ग्वालियर, शिवपुरी, भिण्ड और मुरैना को उत्तर प्रदेश में मिलाकर, दोनों राज्यों के बीच इन चार जिलों की अदला बदली की बात कही थी। लेकिन गोविंद बल्लभ पंत ने इसका विरोध कर दिया।

Govind Ballabh Pant, Gwalior
गोविंद बल्लभ पंत और ग्वालियर । Photo Source- Wikipedia and Indianrailinfo

आजादी के बाद भारत ने राज्यों को उनकी भाषा के आधार पर पुनर्गठित करने के लिए एक आयोग बनाया, जिसका नाम दिया गया ‘स्टेट रिऑर्गनाइजेशन कमीशन’ यानी कि राज्य पुनर्गठन आयोग। इस आयोग की सिफारिशों में राज्यों के बंटवारे का आधार भाषाई था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि प्रशासन को आम लोगों की भाषा में काम करना आना चाहिए ताकि जनता को किसी तरह की झिझक न रहे।

भाषा के आधार पर हो रहे इस पुनर्गठन में कई राज्यों में तकरार की स्थिति पैदा हो गई थी। ऐसे ही एक किस्से की जानकारी वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी की किताब ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश’ से मिलती है। किताब के अनुसार य़दि गोविंद बल्लभ पंत विरोध नहीं करते तो मध्य प्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी, भिण्ड और मुरैना को उत्तर प्रदेश का हिस्सा बना दिया जाता और बुंदेलखंड के चार जिले- झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन को मध्य प्रदेश में मिला दिया जाता।

अपनी किताब में वह बताते हैं कि उस वक्त महाकौशल कांग्रेस कमेटी ने एक प्रस्ताव देकर उत्तर प्रदेश के चार जिले झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन को मध्य प्रदेश में मिलाने की बात कही थी। वहीं मध्य भारत के ग्वालियर, शिवपुरी, भिण्ड और मुरैना को उत्तर प्रदेश में मिलाकर, दोनों राज्यों के बीच इन चार जिलों की अदला बदली की बात कही थी। लेकिन गोविंद बल्लभ पंत ने इसका विरोध कर दिया।

पंत के अनुसार बुंदेली बोलने वाले झांसी, बांदा, जालौन, हमीरपुर और ललितपुर को मध्य प्रदेश में शामिल नहीं किया जा सकता है। इस बात को लेकर आयोग के सदस्य एम पणिक्कार और पंत के बीच लंबी चर्चा भी हुई लेकिन वह इसके लिए राजी नहीं हुए, आखिर में पंत की जीत हुई और जिलो की अदला बदली को रोका जा सका। अगर इन जिलों की अदला-बदली को स्वकृति मिल जाती तो आज की तारीख में दोनों ही राज्यों का मानचित्र बदला हुआ होता।

आजादी के बाद ब्रिटिश प्रांतों और देशी रियासतों को मिलाकर भारत में राज्यों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया था। जिसके तहत मध्य प्रदेश ‘ए’ श्रेणी का राज्य बना। इस लिस्ट में कुल 10 राज्य थे। आज के मध्य प्रदेश का स्वरुप पुराने मध्य प्रदेश से बिल्कुल अलग था। उस समय यह चार हिस्सों में बंटा हुआ था। 1950 में मध्य सबसे पहले मध्य प्रांत औऱ बरार को छत्तीसगढ़ और मकराइ रियासतों के साथ मिलाकर मध्य प्रदेश बनाया गया था।

1956 में मध्य भारत, विंध्य भारत और भोपाल को भी इसमें मिला लिया गया। मध्य भारत की भी अपनी कहानी थी। दरअसल उन दिनों इंदौर और ग्वालियर के बीच झगड़ा चल रहा था। इससे निपटने के लिए इसे मध्य प्रदेश में मिला लिया गया था।

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