ताज़ा खबर
 

हमारी याद आएगी: नीरज वोरा, लेखक-निर्माता के बीच बना अनोखा रिश्ता

हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बाद लेखक निदेशक नीरज वोरा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत अच्‍छी नहीं थी वो लम्‍बे समय से कोमा में थे । इसलिए वहां के डॉक्टरों ने उनके परिजनों को घर ले जाने के लिए कहा था।

Film industryजिन्‍होंने निभाया रिश्‍ते का दर्द।

टीवी पर जो फिल्में बार-बार दिखाई जाती रही हैं, उनमें ‘हेराफेरी’ और ‘फिर हेराफेरी’ का नाम लिया जा सकता है। किसी न किसी चैनल पर ये फिल्में आज भी चल रही होती हैं, जिनके संवाद लेखक थे नीरज वोरा। दोनों फिल्में निर्माता फिरोज नाडियाडवाला ने बनाई थी। 2016 में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बाद वोरा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। नीरज लगभग 13 महीने कोमा में रहे। इस दौरान उनकी देखभाल का जिम्मा उठाया उनके निर्माता मित्र फिरोज नाडियाडवाला ने। किसी निर्माता और लेखक के बीच बना ऐसा रिश्ता बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलता है।

वाकया 19 अक्तूबर, 2016 का है। दिल्ली के एम्स में भर्ती हिंदी फिल्मों के लेखक-निर्देशक नीरज वोरा जो कोमा में थे, को डॉक्टरों ने घर ले जाने के लिए कहा। डॉक्टरों का कहना था कि वह कुछेक घंटों के मेहमान हैं। यह ऐसी स्थिति थी, जिसमें घर-परिवार के लोग तक परेशान हो जाते हैं।

एम्स में उस समय वोरा के करीबी चंद लोग थे, जिनमें एक थे फिरोज नाडियाडवाला, जिन्होंने उस स्थिति में नीरज को मुंबई ले जाना तय किया। नीरज नाडियाडवाला की फिल्मों के लेखक-निर्देशक थे। लगभग 16 साल पहले 2000 में नीरज ने नाडियाडवाला की फिल्म ‘हेराफेरी’ का लेखन किया था।

नीरज मुंबई में पैदा हुए गुजराती थे, जिनके पिता तारशहनाई वादक थे। कई फिल्मवाले उनके शिष्य थे। परिवार में सिनेमा पर प्रतिबंध था, तो नीरज की मां चुपके से उन्हें लेकर सिनेमा देखने जाती थी। बॉलीवुड में नीरज की शुरुआत रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ से हुई थी, जिसमें उन्होंने संजय छैल के साथ मिलकर संवाद लिखे थे।

नीरज ने ‘रंगीला’ में छोटी सी भूमिका भी की थी। उसके बाद नीरज ने कई फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाएं कीं, जिनमें ज्यादातर कॉमेडी थीं। नाडियाडवाला के साथ नीरज का संबंध फिल्म ‘हेराफेरी’ और (2000) ‘आवारा पागल दीवाना’ (2002) के संवाद लिखने के साथ बना।

दोनों के बीच रिश्ते एक घटना के बाद मजबूत हुए। ‘हेराफेरी’ की सफलता के बाद फिरोज इसका दूसरा भाग बनाना चाहते थे, मगर ‘हेराफेरी’ के निर्देशक प्रियदर्शन का कहना था कि इसका दूसरा भाग नहीं बन सकता। फिरोज ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया।

उन्होंने ‘हेराफेरी’ के संवाद लेखक नीरज वोरा से कहा कि वह इसके दूसरे भाग को लिखने का काम करे और फिल्म के निर्देशन के लिए भी तैयार रहे। नीरज ने कुशलता से दोनों काम किए, जिसके बाद नीरज और फिरोज घनिष्ट मित्र हो गए।

लिहाजा जब एम्स के डॉक्टरों ने हाथ खड़े किए तो नाडियाडवाला ने एअर एंबुलेंस मंगाई और वोरा को एम्स से मुंबई ले जाने की जिम्मेदारी ली। मुंबई पहुंचने के बाद फिरोज ने अपने बंगले बरकत विला के एक कमरे को आइसीयू का रूप दिया।

वहां वोरा की देखभाल के लिए डॉक्टर, नर्स और डाइटीशियन का इंतजाम किया। आश्चर्य की बात यह थी कि डॉक्टरों ने नीरज को कुछ घंटों का मेहमान बताया था, मगर मुंबई आने के बाद दिन बीतने लगे और वोरा की स्थिति पहले से बेहतर होने लगी।

लगभग एक साल तक ऐसा चला। फिरोज को उम्मीद बंधने लगी थी जल्दी ही नीरज स्वस्थ्य हो जाएंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ। लगभग साल भर बाद वोरा की तबीयत बिगड़ी और उन्हें शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

14 दिसंबर, 2017 को नीरज ने अंतिम सांस ली। फिरोज ने उनके अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था देखी। इस तरह से एक निर्माता और लेखक के बीच 17 सालों में बने इस प्यारे रिश्ते का अंत हो गया। यह रिश्ता उन चंद रिश्तों में शुमार हो गया, जो बॉलीवुड में मिसाल बने। उस बॉलीवुड में, जहां आम धारणा है कि यहां रिश्ते स्वार्थ के कारण बनते बिगड़ते हैं।

Next Stories
1 ‘शुभेंदु अधिकारी के जाने से TMC को हर्जाना भुगतना पड़ेगा’, विश्लेषक की बात पर Republic TV पर पैनलिस्ट ने कहा – वृक्ष से एक पत्ता गिरने से कुछ नहीं होगा
2 मौसम: दिल्ली में पारे के रिकॉर्ड गिरावट से शीतलहर; गुरुवार को रहा ‘ठंडा दिन’
3 कल आज और कल: उज्‍जवल है ऐतिहासिक फिल्मों का भविष्य, 2021 में कई ऐतिहासिक फिल्में रिलीज के लिए तैयार
ये पढ़ा क्या?
X