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जब नवजोत सिंह सिद्धू के घूंसे से हो गई थी शख्स की मौत, बोले थे- मैं गौतम बुद्ध तो नहीं हूं

यह पूछे जाने पर कि आप मानते हैं कि आपसे गलती हुई और आपको दुख है उस बात का? सिद्धू का जवाब आया- मैं गौतम बुद्ध तो हूं नहीं कि कोई मुझे थप्पड़ मारे और मैं कहूं कि ले भइया दूसरे गाल पर भी मार ले...ऐसा तो हूं नहीं।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: February 28, 2021 4:46 PM
Navjot Singh Sidhu, Congress, National NewsCongress नेता नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटोः fb/sherryontopp)

पूर्व क्रिकेटर और Congress नेता नवजोत सिंह सिद्धू के घूंसे से किसी जमाने में एक शख्स की मौत हो गई थी। यह घटना करीब 33 साल पुरानी है और तब उनके घूंसे का शिकार एक बुजुर्ग हुए थे।

सिद्धू के मुताबिक, वह उन्हें बेवजह गालियां देने लगे थे, जिसके बाद दोनों के बीच गुत्थम-गुत्था हुई थी। इस वाकये से जुड़ा कबूलनामा उन्होंने हिंदी समाचार चैनल India TV के शो ‘Aap ki Adalat’ में किया था। दरअसल, एंकर रजत शर्मा ने उन्हीं से जुड़ा सनसनीखेज किस्सा याद दिला दिया था। उन्होंने सिद्धू से 27 दिसंबर 1988 की घटना के बारे में पूछ दिया था। कहा था कि गुरनाम सिंह नाम के व्यक्ति को आपने घूंसा मार दिया था और उसके बाद वह दुनिया से विदा हो गए थे।

सिद्धू बोले थे- यह बेहद गंभीर बात है। मैं मानता हूं कि उस वक्त मैं उत्तेजित था। वह मामला अभी भी कोर्ट में है। उसके बारे में मैं खुलेआम खुलासा करूं, यह कोर्ट की तौहीन होगी। मुझे आज भी उस बात का बहुत बड़ा दुख है। अफसोस भी है। अगर मुझे जिंदगी में कोई घटना/चीज सुधारने का मौका मिले तो मैं उन बुजुर्ग को वापस ले आता।

बकौल पूर्व क्रिकेटर, “क्या है कि आदमी अगर बाजार में जा रहा है और कोई उसे अचानक रोक कर गालियां देने लगे। दूसरा शख्स कहे कि नहीं, गालियां मत दीजिए। आप अपनी उम्र का ख्याल करिए। ऐसा मत कीजिए। फिर भी सामने वाला व्यक्ति न माने और गालियां देता रहे तो झड़प हो जाए और घूंसेबाजी के बाद वह आदमी गुजर जाए…तो आपका इरादा उसे मारने का नहीं होती है। आप बाजार में देखिए हजार लड़ाइयां होती हैं, पर मंशा वैसी नहीं रहती।”

यह पूछे जाने पर कि आप मानते हैं कि आपसे गलती हुई और आपको दुख है उस बात का? सिद्धू का जवाब आया- मैं गौतम बुद्ध तो हूं नहीं कि कोई मुझे थप्पड़ मारे और मैं कहूं कि ले भइया दूसरे गाल पर भी मार ले…ऐसा तो हूं नहीं। किसी ने गाली दी और बेअदबी की…कोर्ट का जो फैसला हुआ है…जो हुआ, बुरा हुआ। पर कुछ चीजें विधिवश होती हैं। अगर मेरे हाथ में होता, मैं वैसा न करता। कोई हथियार न था, पुरानी दुश्मनी न थी।

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