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WhatsApp का भारतीय, यूरोपीय यूजर्स के साथ अलग-अलग बर्ताव चिंताजनक- केंद्र

उन्होंने कहा, ‘‘ व्हाट्सऐप द्वारा उपयोकर्ताओं को समझौते के लिए मजबूर करने का सामाजिक प्रभाव पड़ सकता जिससे सूचना की निजता एवं सूचना सुरक्षा का हित प्रभावित हो सकते हैं।’’

Author नई दिल्ली | Updated: January 25, 2021 5:37 PM
WhatsApp, India, NDA, BJPतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि व्हाट्सऐप द्वारा निजता नीति को लेकर भारतीय व यूरोपीय उपयोगकर्ताओं के साथ अलग-अलग व्यवहार उसके लिए चिंता का विषय है और वह इस मामले पर गौर कर रही है। केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा कि यह भी चिंता की बात है कि सोशल नेटवर्किंग मंच व्हाट्सऐप पर भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए ‘एकतरफा’ तरीके से निजता नीति में बदलाव किया जा रहा है।

अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार की इस राय से न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की अदालत को अवगत कराया जो फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप द्वारा लाई गई निजता नीति के खिलाफ एक वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जब सुनवाई जब शुरू हुई तो अदालत ने 18 जनवरी की अपनी बात दोहराई जिसमें कहा गया था कि व्हाट्सऐप निजी ऐप है और वह वैकल्पिक है कि आप उसे डाउनलोड करें या नहीं। अदालत ने कहा, ‘‘ इसे डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं है। अन्य ऐप के भी उपयोगकर्ता की सूचना अन्य से साझा करने के नियम और शर्ते हैं।’’ अदालत ने पूछा कि याचिकाकर्ता क्यों व्हाट्सऐप की नीति को चुनौती दे रहा है?

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निजी डाटा सुरक्षा विधेयक संसद में विचाराधीन है और याचिका में जिन मुद्दों को उठाया गया है उन पर सरकार विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान शर्मा ने अदालत से कहा कि भारतीय उपयोगकर्ताओं को फेसबुक की अन्य कंपनियों के साथ डाटा साझा करने के संबंध में विकल्प नहीं देना, प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि व्हाट्सऐप उपयोगकर्ताओं के साथ ‘स्वीकार करो या सेवा नहीं देंगे’ की नीति पर चल रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ जहां तक सरकार की चिंता की बात है तो व्हाइट्सऐप द्वारा यूरोपीय उपयोगकर्ताओं के समक्ष पेश की जा रही निजता नीति में खासतौर पर फेसबुक के साथ कंपनी के इस्तेमाल के लिए डाटा को साझा करने पर रोक है जबकि यह धारा भारतीय नागरिकों के समक्ष पेश की जा रही निजता नीति में शामिल नहीं है जो व्हाट्सऐप उपयोगकर्ताओं का बड़ा हिस्सा है।’’

शर्मा ने अदालत ने कहा, ‘‘ यह अलग तरह का बर्ताव सरकार के लिए चिंता का विषय है। सरकार के लिए यह भी चिंता का विषय है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए निजता नीति एकतरफ तरीके से बदली जा रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ व्हाट्सऐप द्वारा उपयोकर्ताओं को समझौते के लिए मजबूर करने का सामाजिक प्रभाव पड़ सकता जिससे सूचना की निजता एवं सूचना सुरक्षा का हित प्रभावित हो सकते हैं।’’

शर्मा ने कहा कि सरकार पहले ही इस मामले को देख रही है और व्हाट्सऐप से कुछ जानकारी लेने के लिये संपर्क किया गया है।  व्हाट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पत्र प्राप्त हुआ है और जवाब दिया जाएगा। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई एक मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

बता दें कि एक वकील ने याचिका दायर कर व्हाट्सऐप की निजता नीति को चुनौती देते हुए इसे उपयोगकर्ता के संविधान में प्रदत्त निजता के अधिक का उल्लंघन करार दिया है। याचिका में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप की नयी निजता नीति से उपयोगकर्ता की पूरी ऑनलाइन गतिविधि पर कंपनी की बिना सरकार की देखरेख नजर रहेगी।

नयी नीति में उपयोगकर्ता या तो उसे स्वीकार कर सकता है या ऐप का इस्तेमाल बंद कर सकता है, उसके पास फेसबुक स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा तीसरे पक्ष से डाटा साझा नहीं करने का विकल्प चुनते हुए ऐप का इस्तेमाल करने का विकल्प नहीं है।

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