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पहली सैलरी से क्या करेंगे? IAS ने सोशल मीडिया पर किया सवाल तो यूजर ने पूजा सिंघल का जिक्र कर कसा तंज

आईएफएस अधिकारी परवीन कासवान ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली सैलरी 51,000 रुपए अपने पिताजी को दे दी थी और उस पैसे से गायों के लिए शेल्टर का निर्माण किया गया था।

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आपने पहली सैलरी से क्या किया? (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सोशल मीडिया लोगों से जुड़ने का आसान माध्यम है और इस पर कई बड़े लोग भी अपनी राय व्यक्त करते रहते हैं और आम लोगों से रूबरू होते हैं। कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी सोशल मीडिया पर रोजाना पोस्ट करते हैं और लोगों के विचारों को जानते हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी अवनीश शरन ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा प्रश्न पूछा जिसपर बड़ी संख्या में लोगों ने जवाब दिया।

ट्विटर के माध्यम से अवनीश शरन ने पूछा कि अपनी पहली सैलरी से आपने क्या किया या करेंगे? आईएएस अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्न पर आईएफएस अधिकारी परवीन कासवान ने लिखा कि मैंने अपनी पहली सैलरी 51000 रुपए अपने पिताजी को दे दी थी और उन्होंने उस पैसे से गायों के लिए शेल्टर बनवाया था।

वहीं आईएएस अधिकारी अवनीश शरन की पोस्ट पर मेवाती खान नाम के सोशल मीडिया यूजर ने पूजा सिंघल का जिक्र करते हुए लिखा, “सब झूठ बोलते है हम IAS करके ये करेंगे, लेकिन सच्चाई ये हैं कि IAS बनके सबसे ज्यादा करप्शन करते हैं ये लोग। अब इनको (पूजा सिंघल की फोटो) ही देख लो!”

वहीं पत्रकार मीनाक्षी जोशी ने लिखा, “मैंने अपनी पहली सैलरी से मम्मी के लिए साड़ी, पिताजी के लिए कुर्ता, भाई के लिए टी-शर्ट खरीदा था। जबकि खुद को और दीदी को एक पार्टी दी थी।” वहीं राघवेंद्र प्रताप सिंह नाम के सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि मैंने अपनी पहली सैलरी से अपने रूम का किराया चुकाया था, जो 8 महीने से बाकी था। मैं अपने पिताजी और अपने मकान मालिक का एहसान कभी नहीं भूलूंगा।”

मयंक भारद्वाज नाम के सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “मैंने अपनी पहली सैलरी पुश्तैनी मंदिर के गौशाला और मंदिर के रख-रखाव के लिए दान में दी थी। मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है, अब इसके कुछ हिस्से को एएसआई ने अपने कब्जे में ले लिया है। लेकिन मेरी सैलरी इतनी अधिक नहीं थी।”

सोशल मीडिया यूजर अरुण कुमार सिंह ने लिखा, “मैंने प्रथम सैलरी से (अगस्त,1996 में) उस मंदिर में घंटा लगवाया था, जहां मैं नियमित मंगलवार को जाता था। अब भी पुजारी जी का ध्यान रखता हूं।” वहीं शाकिब अंसारी ने लिखा, “मैंने अपनी पहली सैलरी अपनी दादी के हाथ में दी। उन्होंने उसमे से कुछ पैसे निकाल कर मिठाई मंगाई और आस पड़ोस में बांट दी।”

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