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कोरोना: टीका लगवाने के बाद हुई कोई बात तो आपको क्या मिलेगा? जानें

अमेरिकी वैक्सीन कंपनी- फाइजर और मॉडर्ना ने भारत में उत्पादन शुरू करने से पहले इनडेम्निटी की मांग की है, इसके तहत टीके के किसी दुष्प्रभाव की स्थिति में यह कंपनियां कानूनी कार्रवाई या मुआवजे के दायरे में नहीं रहेंगी।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 27, 2021 3:09 PM
कोरोनावायरस वैक्सीन बनाने वाली दो अमेरिकी कंपनियां कर रहीं सरकार से इनडेम्निटी की मांग। (फोटो- PTI)

भारत में इस वक्त कोरोनावायरस की तीन वैक्सीन उपलब्ध हैं। इनमें एक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रा जेनेका की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और रूस की स्पूतनिक-वी शामिल हैं। इन तीन वैक्सीनों के बड़ी संख्या में लगाए जाने के बावजूद देश में फिलहाल टीकाकरण की रफ्तार और तेज की जाने की मांग जारी है। सरकार भी फाइजर और मॉडर्ना जैसी कंपनियों से भारत में वैक्सीन उत्पादन करने के लिए बात कर रही है। लेकिन इन दोनों कंपनियों ने इनडेम्निटी की मांग रख दी है। यानी अगर इन कंपनियों की कोरोना वैक्सीन से कोई साइड इफेक्ट या बुरा प्रभाव होता है, तो उन्हें कानूनी जवाबदेही से सुरक्षा मिल जाएगी और किसी भी गड़बड़ी के लिए मुआवजा नहीं मांगा जा सकेगा।

ऐसे में जानने वाली बात यह है कि अभी तक भारत सरकार ने वैक्सीन से होने वाले किसी साइड इफेक्ट पर मुआवजे और कानूनी कार्रवाई को लेकर क्या प्रावधान बनाए हैं? इसका जवाब यह है कि भारत के ड्रग कानूनों में किसी भी नई दवा या वैक्सीन को अप्रूवल देते समय कानूनी सुरक्षा या इनडेम्निटी देने का प्रावधान नहीं है। अगर किसी दवा या वैक्सीन को इनडेम्निटी दी जानी है तो इसकी जवाबदेही सरकार पर तय होगी। सरकार और सप्लायर के बीच होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के प्रावधानों में इसका जिक्र भी जरूरी होगा।

कानूनी सुरक्षा को लेकर क्या है भारत में प्रावधान?: भारत में अब तक कोरोना वैक्सीन के 30 करोड़ से ज्यादा डोज लगाए जा चुके हैं। हालांकि, अब तक वैक्सीन डोज मुहैया कराने वाली उत्पादक कंपनियों को इनडेम्निटी यानी कानूनी सुरक्षा नहीं दी गई है। इस लिहाज से अगर कोई व्यक्ति कोरोना वैक्सीन की वजह से गंभीर बीमारी का शिकार होता है, या किसी की मौत हो जाती है, तो वह वैक्सीन कंपनी पर केस कर सकता है और उचित मुआवजा मांग सकता है।

ट्रायल स्टेज के प्रावधान से अलग हैं मंजूरी मिलने के बाद के नियम: यहां ये समझना अहम है कि भारत में क्लिनिकल ट्रायल्स के दौरान अगर किसी वॉलंटियर की मौत हो जाती है या उस पर वैक्सीन का गंभीर प्रभाव होता है, तो उसे मुआवजा तुरंत मिलता है। लेकिन सरकार की तरफ से वैक्सीन के इस्तेमाल की सार्वजनिक मंजूरी मिल जाती है, तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट में मुआवजे का कानूनी प्रावधान नहीं है। यानी वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद मरीज को मुआवजे के लिए कंज्यूमर फोरम या हाईकोर्ट में मुकदमा दाखिल करना होगा। दूसरी तरफ वैक्सीन के किसी दुष्प्रभाव पर ड्रग रेगुलेटर अपनी तरफ से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के किसी नियम का उल्लंघन होने पर कार्रवाई कर सकता है।

दूसरे देशों में क्या हैं वैक्सीन को लेकर कानूनी जवाबदेही?: गौरतलब है कि फाइजर और मॉडर्ना ने अमेरिका में बड़े स्तर पर टीकाकरण जारी रखा है। इन दोनों ही कंपनियों को यहां कानूनी कार्रवाई से छूट मिली है। यह छूट उन्हें आपात स्थिति की वजह से 2024 तक के लिए दी गई है। उधर ब्रिटेन में भी वैक्सीन कंपनियों को इनडेम्निटी मिली है। हालांकि, कुछ गंभीर परिस्थितियों में दोनों देश के रेगुलेटर्स मौत या गंभीर विकलांगता पर मुआवजा देने के लिए उत्पादक को बाध्य कर सकते हैं।

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