पंजाब और हरियाणा हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार को डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने डेरा प्रमुख की अपील को स्वीकार करते हुए ये आदेश पारित किए। हालांकि, पीठ ने इस मामले में तीन अन्य आरोपियों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। हालांकि, बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राम रहीम जेल में रहेगा।

इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह के वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि हाई कोर्ट ने इस मामले में उनकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है। खुराना ने कहा, “अदालत ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उन्हें बरी कर दिया है।”

बता दें कि सिरसा में एक स्थानीय समाचार पत्र चलाने वाले छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके आवास के बाहर गोली मार दी गई थी और बाद में उनकी मौत हो गई। इस हत्याकांड ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा क्योंकि पत्रकार ने डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोपों से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इन रिपोर्टों में एक पत्र भी शामिल था जिसमें डेरा के अंदर यौन शोषण का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद राम रहीम से जुड़े मामलों की जांच शुरू हुई। शुरुआती पूछताछ के बाद, मामला सीबीआई को सौंप दिया गया, जिसने जांच की और बाद में राम रहीम और अन्य के खिलाफ आरोप दायर किए।

सीबीआई कोर्ट ने ठहराया था दोषी

जनवरी 2019 में पंचकुला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और सह-आरोपियों को पत्रकार की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 17 जनवरी, 2019 को पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। राम रहीम को 2002 में सिरसा स्थित पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के लिए सजा सुनाई गई थी। डेरा प्रमुख ने हाई कोर्ट में दोषसिद्धि को चुनौती दी और दावा किया कि सीबीआई ने उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया है क्योंकि अन्य आरोपियों निर्मल, कुलदीप और कृष्ण लाल के खिलाफ पहली चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी थी और उनमें से किसी ने भी अपीलकर्ता का नाम साजिश में शामिल होने के रूप में नहीं लिया था, इसलिए सीबीआई के पास साजिश की जानकारी सुनने का कोई अन्य आधार नहीं बचा था।

डेरा प्रमुख के वकील ने कहा था, “यह एक सच्चाई है कि अपीलकर्ता का नाम 2002 में राज्य पुलिस द्वारा दायर की गई पहली चार्जशीट में बिल्कुल भी नहीं था। कृष्ण लाल को सीबीआई अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया गया था। इसके बाद बदले की भावना से डेरा प्रमुख का नाम आरोपी के रूप में शामिल किया गया। साजिश का प्रत्यक्षदर्शी बयान सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी एम. नारायणन ने इस मामले के लिए खट्टा सिंह के रूप में गढ़ा था।” यह भी तर्क दिया गया कि खट्टा सिंह का यह दावा कि साजिश केवल उनकी उपस्थिति में रची गई थी और उन्होंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया था, जांच अधिकारी एम नारायणन द्वारा जिरह में स्वीकार किए जाने से झूठा साबित होता है।

वकील ने आगे कहा कि डेरा प्रमुख को केवल इस आधार पर दोषी ठहराया गया है कि मृतक के खिलाफ उसका एक मकसद था और वह मृतक के प्रति द्वेष रखता था क्योंकि वह अखबार प्रकाशित करता था और डेरा के खिलाफ सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करता था। डेरा प्रमुख ने कहा था, “जांच एजेंसी सबूत पेश करके भी यह साबित करने में नाकाम रही कि अपीलकर्ता ने कभी उक्त अखबार पढ़ा था। अभियोजन पक्ष के अपने बयान के अनुसार, मृतक द्वारा प्रकाशित अखबार शाम का अखबार था और उसमें केवल वही खबरें छपती थीं जो सुबह के अखबारों में पहले ही प्रकाशित हो चुकी होती थीं। इसलिए, अपीलकर्ता का मृतक के प्रति किसी प्रकार की दुर्भावना रखने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

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डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के बाहर आने पर इस बार भी काफी शोर और हलचल है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…