बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे को भी जगह मिली है। वसुंधरा राजे को भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। नितिन नवीन की नई टीम में एक साफ संकेत है वरिष्ठ नेताओं के मामले में सावधानी से कदम उठाएं जो अभी भी जमीनी राजनीति में एक बड़ी ताकत हैं। वसुंधरा राजे को रष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर बनाए रखना पार्टी का एक ऐसे नेता के लिए सम्मानजनक स्थिति बनाए रखने का तरीका है, जो राजस्थान में सक्रिय राजनीति से दूर होने के बावजूद अपनी लोकप्रियता के कारण अभी भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते।
अपनी नियुक्ति के बाद X पर एक पोस्ट में वसुंधरा राजे ने कहा, “मैं माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मुझे भारतीय जनता पार्टी के रष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर संगठन और देश की सेवा करने का मौका दिया।”
वसुंधरा तीन बार रहीं राजस्थान की सीएम
2023 के चुनावों में बीजेपी राजस्थान में 115 सीटें जीतने में कामयाब रही। वहीं 2003 में वसुंधरा राजे के चुनावी मैदान में उतरने और पहली बार पार्टी को लीड करने पर मिली 120 सीट मिली थी। अपने अगले कार्यकाल में मोदी लहर से और राजस्थान में पार्टी के चेहरे के तौर पर वसुंधरा राजे ने पार्टी को 163 सीटों तक पहुंचाया। 2023 के चुनावों के बाद पार्टी ने राजस्थान में पूरी तरह से नए लीडरशिप के साथ जाने का फैसला किया। वसुंधरा राजे ने पार्टी के लिए प्रचार किया, लेकिन पूरे राज्य में नहीं। उनकी पहुंच 200 में से 70 चुनाव क्षेत्रों में 54 चुनावी रैलियों तक ही सीमित थी।
2023 में भजन लाल सरकार के सत्ता में आने के बाद सन्देश साफ था- पार्टी राजस्थान में नए चेहरे चाहती थी। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए वसुंधरा राजे ने सिर्फ एक चुनाव क्षेत्र झालावाड़ बारां में कैंपेन किया, जो उनके बेटे दुष्यंत सिंह का है। उस चुनाव में बीजेपी राजस्थान में 11 सीटें हार गई। वहीं 2019 में बीजेपी ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी।
लोकसभा चुनाव के नतीजों से मिला पार्टी को सबक?
नतीजों से यह साफ हो गया कि राजस्थान में नई सरकार वोटरों के साथ पूरी तरह से जुड़ नहीं पाई थी। जैसे ही राजस्थान में बीजेपी सरकार का आधा कार्यकाल ख़त्म हो रहा है, सिग्नल साफ है वसुंधरा राजे को बनाए रखना राजनीतिक तौर पर सही है। 2028 में जब बीजेपी अगले राज्य चुनाव में जाएगी और महिला नेताओं पर फोकस होगा, तो वसुंधरा राजे आसानी से जीत जाएंगी। वह न सिर्फ महिला वोटरों को अपील करती हैं बल्कि मास अपील भी करती हैं, साथ ही राजघराने से भी है, जो एक ऐसे राज्य में काम करता है जिसकी सामंती जड़ें गहरी हैं।
वसुंधरा के पास जबरदस्त समीकरण
वसुंधरा की जाट मराठा राजपूत विरासत और गुर्जर के साथ उनकी शादी, साथ ही उनकी बहू निहारिका राजे राजनीतिक रूप से दबदबे वाले समुदाय से आती हैं — उन्हें राजस्थान के जाति के खेल में एक ऐसा नुस्खा देती है जो कभी गलत नहीं होता। वसुंधरा ने इसे अपनी राजनीतिक USP बना लिया है। वह अक्सर कहती हैं, “मैं राजस्थान की 36 बिरादरी से अपील करती हूं।” जब 2028 के चुनाव पास आएंगे, तो BJP को इनकंबेंसी फैक्टर से जूझना होगा। इन हालात में ऐसी नेता को बनाए रखना, जिसके पास इस तरह का राजनीतिक समीकरण हो, न सिर्फ राजनीतिक रूप से सही है बल्कि समझदारी भी है। पार्टी में उन्हें एक सम्मानजनक पद देकर, BJP ने उनके राजनीतिक कद का सम्मान किया है और यह संकेत दिया है कि वे मानते हैं कि वह अभी भी राज्य में प्रासंगिक हैं।
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