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एेसे होता है महिलाओं का खतना, ये हैं नुकसान, बेहद डरावने हैं आंकड़े

इस परंपरा को लेकर विश्वास है कि महिला यौनिकता पितृसत्ता के लिए खतरनाक है और महिलाओं को सेक्स का लुत्फ उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
Author नई दिल्ली | November 21, 2017 14:36 pm

दाऊदी बोहरा समुदाय से आने वाली कई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लड़कियों के खतना को गैरकानूनी करार देने के लिए मदद की गुहार लगाई है। भारत में फिलहाल खतना को लेकर कोई कानून नहीं है और बोहरा समुदाय अब भी इस परंपरा का पालन करता है-जिसे यहां खतना या महिला सुन्नत कहते हैं। इसे अंग्रेजी में फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) कहा जाता है। महिलाओं ने इसके खिलाफ एक कैंपेन भी लॉन्च किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिलाओं का खतना होता कैसे है? या इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें किस तरह के दर्द और मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है?

एेसे होता है महिलाओं का खतना: इस प्रक्रिया में महिला योनि के एक हिस्से क्लिटोरिस को रेजर ब्लेड से काट दिया जाता है। या कुछ जगहों पर क्लिटोरिस और योनि की अंदरूनी त्वचा को भी आंशिक रूप से हटा दिया जाता है। इस परंपरा को लेकर विश्वास है कि महिला यौनिकता पितृसत्ता के लिए खतरनाक है और महिलाओं को सेक्स का लुत्फ उठाने का कोई अधिकार नहीं है। माना जाता है कि जिस महिला का खतना हो चुका है, वह अपने पति के प्रति ज्यादा वफादार होगी और घर से बाहर नहीं जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक खतना चार तरह का हो सकता है-पूरी क्लिटोरिस को काट देना, कुछ हिस्सा काटना, योनी की सिलाई, छेदना या बींधना।

ये हैं नुकसान: एक ही रेजर से कई महिलाओं का खतना होने से उन्हें योनी संक्रमण के अलावा बांझपन जैसी बीमारियां हो जाती हैं। खतने के दौरान ज्यादा खून बहने से बच्ची की मौत भी हो जाती है। दर्द सहन न कर पाने और शॉक के कारण कई बच्चियां कोम में भी चली जाती हैं।

डरावने हैं आंकड़े: यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में सालाना 20 करोड़ महिलाओं का खतना होता है। इनमें आधे से ज्यादा सिर्फ मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया में होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिन 20 करोड़ लड़कियों का खतना होता है, उनमें से करीब साढ़े चार करोड़ बच्चियां 14 से कम उम्र की होती हैं। इंडोनेशिया में आधी से ज्यादा बच्चियों का खतना हो चुका है।

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