कार और बाइक चलाने वाले लोगों से अगर आप उनके वाहन को लेकर बात करेंगे तो वे E20, E30 या फिर E85 फ्यूल को लेकर केंद्र सरकार को कोसते दिखाई देते हैं। E20, E30 और E85 फ्यूल को लेकर उनकी अपनी चिंताएं हैं और उनका कहना है कि केंद्र सरकार को उनकी चिंताओं को हल करना चाहिए। एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को लेकर लोगों की चिंता क्या है, सरकार का इसे लेकर क्या कहना है, ऐसे ही बहुत सारे सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

क्या है E20, E30 और E85?

पहले समझना जरूरी है कि E20, E30 और E85 फ्यूल क्या है। E20, E30 और E85 ऐसे मिक्स ईंधन या फ्यूल हैं जिनमें पेट्रोल के साथ अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल मिलाया जाता है। जैसे E20 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में E22 से लेकर E30 तक एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी है। इससे यह साफ है कि सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकेत दे रही है।

आइए, इस पूरी स्टोरी के बैकग्राउंड में चलते हैं।

पिछले कुछ सालों में भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग यानी पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को लेकर बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। 2018 में केंद्र सरकार ने National Policy on Biofuels को लागू किया था। 2022 में केंद्र सरकार ने इसमें संशोधन किया और पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाए जाने का टारगेट जिसे 2030 में हासिल करना था इसे 2025-26 कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि सरकारी तेल कंपनियों ने 10% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का टारगेट जून, 2022 में हासिल किया और ऐसा कंपनियों ने 5 महीने पहले कर दिखाया।

इसके बाद पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाए जाने का स्तर लगातार बढ़ता चला गया। जैसे 2022-23 में यह 12.06% था, 2023-24 में 14.60% था और 2024-25 में यह 17.98% हो गया।

अब एक सवाल मन में आता है कि भारत सरकार एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर इतना जोर क्यों दे रही है

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल यानी 87% आयात करता है और इस पर सरकार को बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। सरकार चाहती है कि ईंधन के आयात पर हो रहे इस खर्च को कम किया जाए और उसे लगता है कि इसके लिए एथेनॉल एक बेहतर विकल्प है।

एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के समर्थक हैं गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एथेनॉल की खुलकर वकालत करते रहे हैं और इसके आर्थिक और पर्यावरण को होने वाले लाभ के बारे में भी बात करते हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल के हर लीटर में जितना भी एथेनॉल मिलाया जाएगा, उससे कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटेगी और घरेलू स्तर पर किसानों को फायदा होगा।

अहम बात यह है कि जब-जब E20 फ्यूल को लेकर सवाल उठे, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल का खुलकर बचाव किया है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि फ्लेक्स फ्यूल मोटरसाइकिल पेट्रोल और एथेनॉल दोनों पर चल सकती हैं। उन्होंने इस तरह की चिताओं को भी खारिज किया कि एथेनॉल एक खराब ईंधन है। गडकरी के मुताबिक, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की जो परफॉर्मेंस है वह पुराने ईंधन के बराबर ही है।

लोगों की क्या चिंता है?

भारत में जैसे ही एथेनॉल मिक्स पेट्रोल की शुरुआत हुई, इसे लेकर तमाम तरह के विवाद सामने आए। जैसे जब कई लोगों ने E20 फ्यूल का इस्तेमाल किया तो उन्होंने इस तेल की अपने इंजन के साथ कॉम्पैटिबिलिटी, E20 फ्यूल की कार्य क्षमता और अपने वाहन के इंजन की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता जताई। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे लेकर पिछले कुछ महीनों में वीडियो शेयर किए।

लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह सामने आई है कि एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का इस्तेमाल करने से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है और इससे इंजन की परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि ऐसी गाड़ियां जिनके इंजन 10% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए हैं उनमें E20 या E30 फ्यूल डलवाने से उनके इंजन के पुर्जे जल्दी खराब हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

जब यह विवाद बढ़ा तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सितंबर, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें E20 फ्यूल को देश भर में इस्तेमाल किए जाने को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि इसका सही ढंग से मूल्यांकन किया गया था और इससे गन्ना के किसानों को काफी लाभ आर्थिक लाभ होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने बिना एथेनॉल की मिलावट वाले पेट्रोल की समानांतर आपूर्ति किए जाने की मांग को भी नकार दिया। केंद्र सरकार ने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने का यह फैसला सभी पहलुओं पर विचार करके लागू किया गया है।

जब इसे लेकर लोगों की चिंता बढ़ी तो उद्योग जगत के संगठन सामने आए। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से कुछ पुराने वाहनों में थोड़ा बहुत दिक्कत आ सकती है लेकिन इससे वाहनों की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है।

एक सवाल उपभोक्ताओं की ओर से सामने आता है कि जब पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है तो इसकी कीमत आमतौर पर मिलने वाले पेट्रोल से कम होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

E85 पेट्रोल लांच

E20 और E30 पेट्रोल को लेकर चल रही चिताओं के बीच बीते दिनों E85 पेट्रोल को लांच किया गया है। इसमें 85% एथेनॉल होता है और इसे विशेष रूप से फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लिए बनाया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे लॉन्च किया और बताया कि देश भर के 48 पेट्रोल पंपों पर यह तेल लोगों को मिलना शुरू हो गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियां E85 को E20 ईंधन की कीमत से लगभग 20 रुपये सस्ता बेचेंगी लेकिन इसे लेकर चिंता इस बात की है कि जिस जगह पर उन्हें E85 फ्यूल नहीं मिलेगा, वहां पर उनके लिए क्या रास्ता बचेगा?

बहुत आसान शब्दों में अगर इस पूरे मामले को समझा जाए तो यह साफ है कि भारत सरकार एथेनॉल मिक्स पेट्रोल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहती है लेकिन इसे लेकर लोगों की चिंताएं भी हैं।

सरकार का यह मानना है कि एथेनॉल के ज्यादा इस्तेमाल से तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों विशेषकर गन्ना किसानों की आय में इजाफा होगा जबकि दूसरी ओर वाहन स्वामियों की चिंता उनकी गाड़ी के माइलेज, गाड़ी के रखरखाव को लेकर है। उनका यह भी कहना है कि E30 और E85 जैसे एथेनॉल मिक्स पेट्रोल भारत में चलने वाली सभी गाड़ियों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

एथेनॉल ब्लेंड ईंधन बना चिंता की वजह

देश में पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंड को बढ़ावा देने की सरकारी पहल का असर अब ग्राहकों को प्रभावित कर रहा है। यह ईंधन सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह वाहन खरीदारों की सोच को भी प्रभावित करने लगा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।