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क्या है ‘हमास’, जो इजराइल पर अब तक दाग चुका है चार हजार रॉकेट्स, महज 22 से 55 हजार की कीमत के रॉकेट से पहुंचाता है करोड़ों का नुकसान, जानें कैसे?

हमास की स्थापना 1980 में हुई थी। यह संगठन तब फलस्तीन की आजादी की वकालत कर रहे यासिर अराफात के संगठन- फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के खिलाफ खड़ा हुआ था। ऐसे दावे किए जाते हैं कि हमास को शुरुआत में इजराइल की तरफ से ही आर्थिक मदद मुहैया कराई गई, ताकि पीएलओ को काबू में किया जा सके।

येरुशलम/गाजा | Updated: May 21, 2021 8:23 AM
हमास गाजा पट्टी से अधिकतर रात के समय हमला करता है, इस दौरान इजराइल का आयरन डोम सिस्टम उसके रॉकेट्स को बेकार कर देता है। (फोटो- AFP)

गाजा पट्टी पर इजराइल और कट्टरपंथी संगठन हमास के बीच लड़ाई को करीब 10 दिन पूरे हो चुके हैं। दोनों ही तरफ से लगातार रॉकेट लॉन्च और मिसाइल से हमले जारी हैं। इजराइल ने उन्नत टेक्नोलॉजी और सटीक लक्ष्य भेदने की क्षमता वाली एयरस्ट्राइक से अब तक बढ़त बना रखी है और हमास को खासा नुकसान पहुंचाया है, हालांकि इसका एक नुकसान दोनों तरफ हुई मौतों से हुआ है। जहां गाजा में अब तक 230 लोगों की मौत हुई, वहीं इजराइल में भी 12 लोग मारे गए हैं। इसके बावजूद हमास की तरफ से रॉकेट हमले जारी हैं। इजराइली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 मई को संघर्ष शुरू होने के बाद से गाजा की तरफ से अब तक इजराइल पर 4000 से ज्यादा रॉकेट दागे जा चुके हैं।

हमास कैसे करता है इजराइल पर हमला?: बताया जाता है कि हमास के कट्टरपंथी हमलावर आमतौर पर रात के वक्त इजराइल पर रॉकेट दागते हैं। इन्हें इजराइल को बचाने वाला आयरन डोम सिस्टम नष्ट कर देता है। हालांकि, कई बार बड़ी संख्या में होने की वजह से आयरन डोम 90 फीसदी रॉकेट्स तक ही खत्म कर पाता है और बाकी 10 फीसदी इजराइल की आम जनता तक पहुंच जाते हैं।

मिसाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हमास इजराइल पर एक साथ कई रॉकेट्स से हमला करता है। हमास के ज्यादातर लड़ाके सस्ती तकनीक वाले छोटी रेंज के रॉकेट बनाने के जानकार माने जाते हैं। यह लड़ाके 300 से 800 डॉलर (करीब 22 हजार से 55 हजार रुपए) के बीच में रॉकेट बनाते हैं। हमास सबसे ज्यादा कसाम रॉकेट का ही इस्तेमाल करता है, जिसे वह एक साथ दागता है।

इजराइल इन रॉकेट हमलों से निपटने के लिए आयरन डोम सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मिसाइलें खुद उड़कर रॉकेट को नष्ट कर देती हैं। फिश इंस्टीट्यूट में स्पेस रिसर्च सेंटर के पूर्व अध्यक्ष ताल इनबर के मुताबिक, आयरन डोम सिस्टम की अचूक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत 50 हजार से 1 लाख डॉलर (40 लाख से 80 लाख रुपए) के बीच है। यानी कई रॉकेट्स को भेदने के लिए इन मिसाइलों का बड़ा बेड़ा नष्ट हो जाता है।

गाजा में अब तक 65 बच्चों और 39 महिलाओं की जान गई, 1710 घायल: फलस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि गाजा में पिछले 11 दिन में 230 लोगों की जान गई है, इनमें 65 बच्चे और 39 महिलाएं शामिल हैं। दूसरी तरफ इजराइल की तरफ भी जान-माल का नुकसान हुआ है। अब तक यहां 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब दो दर्जन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

जानें क्या है हमास?: गाजा पट्टी पर इजराइल की जंग के बीच यह जानना जरूरी है कि उससे टक्कर लेने वाला चरमपंथी संगठन हमास आखिर है क्या? दरअसल, 1948 में गठन के बाद से ही इजराइल पर लगातार फलस्तीनी इलाके पर कब्जे के आरोप लगते रहे थे। 1967 के छह दिन के युद्ध के बाद इजराइल ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी के अधिकांश इलाके पर कब्जा कर लिया था। इन इलाकों को वापस फलस्तीन में मिलाने के लिए यासिर अराफात की पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) लगातार मोर्चा खोले हुई थी।

इजराइल पर लग चुके हैं हमास को खड़ा करने के आरोप: बताया जाता है कि हमास की स्थापना 1980 में हुई थी। यह संगठन तब फलस्तीन की आजादी की वकालत कर रहे यासिर अराफात के संगठन- फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के खिलाफ खड़ा हुआ था। ऐसे दावे किए जाते हैं कि हमास को शुरुआत में इजराइल की तरफ से ही आर्थिक मदद मुहैया कराई गई, ताकि पीएलओ को काबू में किया जा सके। हालांकि, अब तक इसकी किसी भी पक्ष से पुष्टि नहीं हुई है।

क्या रहा है हमास का मकसद?: चरमपंथी संगठन हमास इजराइल को मान्यता नहीं देता। यानी वह इजराइल को पूरी तरह तबाह करना चाहता है। इसके लिए संगठन ने अराफात के पीएलओ से उलट इजराइल के खिलाफ हथियारबंद मोर्चा खोला है। हमास के प्रतीक चिह्न में येरुशलम के साथ इजराइल, गाजा और वेस्ट बैंक को साथ मिलाकर एक फलस्तीनी राष्ट्र दिखाया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि जहां अराफात का फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन एक सेक्युलर यानी धर्मनिरपेक्ष गुट था, वहीं हमास पूरी तरह इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन है।

Israel-Palestine crisis, Hamas लेबनान के आतंकवादी हिज़्बुल्लाह समूह की रैली में बोलते हमास नेता ओसामा हमदान। यह लेबनान के दक्षिणी उपनगर बेरूत में फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आयोजित हुआ था। (Photo -AP Photo/Hassan Ammar))

1987 की बगावत के बाद हमास का उदय: हमास पहली बार मुख्यधारा में 1987 के इंतिफादा (बगावत) के बाद आया। दरअसल, इसमें फलस्तीनियों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर इजराइल के कब्जे का विरोध करना शुरू कर दिया था। बाद में यूरोपियन देश नॉर्वे की पहल पर यासिर अराफात ने इजराइल के साथ ओस्लो अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर लिए थे। इसके तहत पीएलओ ने इजराइल को मान्यता दी और बदले में इजराइल ने गाजा पट्टी को खाली करने का वादा किया। हालांकि, हमास ने इस समझौते को कभी नहीं माना और इजराइल के खिलाफ हमले जारी रखे।

गाजा पट्टी पर है हमास ने लागू किया शासन, यहीं से होते हैं इजराइल पर हमले?: ओस्लो समझौते के तहत इजराइल ने 2005 में गाजा पट्टी से अपनी सेना को कम करते हुए बस्तियों को हटा लिया। इसके बाद वहां हमास का बोलबाला शुरू हो गया। इस संगठन ने वहां राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के साथ चुनाव में जीत हासिल की और पीएलओ के संगठन फतह के नेताओं के खिलाफ हिंसा की, जिससे पीएलओ के नेता वेस्ट बैंक की तरफ जाने को मजबूर हो गए। तबसे वेस्ट बैंक का इलाका महमूद अब्बास की फतह पार्टी नियंत्रित करती है, जबकि गाजा हमास के नियंत्रण में है।

हमास लगातार इसी गाजा पट्टी से इजराइल पर हमले करता है। आमतौर पर पहले हमला करने के बाद हमास के लड़ाके आत्मरक्षा के लिए लड़ने की बात कहता है। इस चरमपंथी संगठन और इजराइल की सेना के बीच 2008, 2009, 2012 और 2014 में खूनी मुठभेड़ हो चुकी है।

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