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गूगल डूडल: कम सोच और संसाधन की उत्सवी कला

गूगल डूडल- घटनाओं या उपलब्धियों का अस्थायी परिवर्तन स्वतंत्रता दिवस पर गूगल डूडल में भारत के तिरंगा को खूबसूरती से शामिल किया है। इससे पहले विक्रम साराभाई की 100वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाया।

Author नई दिल्ली | Updated: August 28, 2019 7:21 AM
गूगल डूडल (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

डूडल आर्ट यानी चित्रकला और रेखांकन का ऐसा मिश्रण है, जिसे एकाग्रता के बजाए मस्ती या कैसे भी माहौल में बनाया जाता है। कई लोगों में एक खास आदत होती है, वे कभी कॉपी पर, पेपर पर तो कभी किताबों या डेस्क पर चित्र बनाते नजर आते हैं। इन चित्रों को डूडल्स कहा जता है। डूडल व्यक्ति के नजरिए और सोच को बताता है। यदि कोई व्यक्ति आड़ी-तिरछी लकीरों से बार-बार एक खास चित्र बनाता है, तो यह उसके व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ बताता है। डूडल विशेषज्ञ किसी के द्वारा बनाए गए चित्रों के जरिए उसके स्वभाव को काफी हद तक बता सकते हैं।

बड़ी आइटी कंपनियां डूडल आर्ट का इस्तेमाल अपने कर्मचारियों का तनाव दूर करने या मेडिटेशन के लिए भी कर रही हैं। खास तौर पर युवाओं के बीच इस कला को सीखने का जबरदस्त क्रेज है। हाल ही में नोएडा के सेक्टर-16 ए में तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में पहुंचे स्कूल- कॉलेज के छात्र- छात्राओं ने इस कला की अंतरराष्ट्रीय स्तर के डूडल आर्टिस्ट शांतनु हजारिका से बारीकियां समझी। शांतनु हजारिका 2014 में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में हुई विश्व डूडल आर्ट प्रतियोगिता के विजेता रहे हैं। 2017 में कैलीफोर्निया में हुई इस प्रतियोगिता में वे बतौर जज रहे। फिलहाल वे चित्रकला और रेखांकन के मिश्रण वाली इस कला की बारीकियां लोगों को सिखा रहे हैं। उनके मुताबिक गूगल का डूडल, वास्तव में इस कला का बहुत छोटा भाग है। डूडल कला भारत की मधुबनी पेंटिंग कला जैसी है। लेकिन इसका उद्गम पश्चिमी देशों से हुआ है। वहीं से यह कला भारत समेत अन्य देशों तक पहुंची है। भारत के ग्रामीण अंचल में बहुत पहले से डूडल-ट्रक आर्ट से प्रेरित हैं। ट्रकों पर काफी पहले से खूबसूरत चित्रकारी की परंपरा रही है, ताकि ट्रक चालक घर से महीनों दूर रहने के दौरान अपने दिमाग को तनाव मुक्त रख सकें। डूडल में पशु-पक्षी और पेड़-पौधों को शामिल किया गया है। शांतनु बताते हैं कि बगैर सोच के कुछ बनाना डूडल है। आप किसी बैठक में बैठकर बगैर संसाधन (स्केल आदि) के जो वैचारिक रेखांकन करते हैं, वही डूडल आर्ट है। यह यादाश्त बढ़ाने वाली वर्जिश जैसी है। दिल्ली के सफदरजंग इलाके में रहने वाले शांतनु लगातार कॉलेजों में कार्यशाला आयोजित युवाओं को डूडल आर्ट की विधा में दक्ष बनाने का काम कर रहे हैं। डूडल आर्ट का इन दिनों फैशन, टी-शर्ट प्रिंटिंग समेत किताबों और विज्ञापनों में जबरदस्त इस्तेमाल हो रहा है।

गूगल डूडल- घटनाओं या उपलब्धियों का अस्थायी परिवर्तन स्वतंत्रता दिवस पर गूगल डूडल में भारत के तिरंगा को खूबसूरती से शामिल किया है। इससे पहले विक्रम साराभाई की 100वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाया। गूगल डूडल एक विशेष अस्थायी परिवर्तन है, जो गूगल के होमपेज पर प्रतीक निशान (लोगो) को बदलकर किया जाता है, ताकि घटनाओं और लोगों की उपलब्धियों को यादगार बनाया जा सके। विश्व स्तर पर गूगल और रेड बुल डूडल कला को बढ़ावा देने का सबसे ज्यादा काम कर रही हैं।

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