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क्या है न्यायालय की अवमानना और इसके लिए कितनी सजा, क्यों केस चलाने के लिए क्यों लेनी होती है अटॉर्नी जनरल की सहमति? जानें

कमीडियन कुणाल कामरा ने न्यायालय की अवमानना मामले में अदालत से माफी मांगने से इनकार कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा केस चलाने के लिए ऐडवोकेट जनरल की सहमति कब जरूरी होती है।

kunal kamra, ag venugopalऐडवोकेट जनरल केके वेणुगोपाल

कमीडियन कुणाल कामरा के खिलाफ न्यायल की अवमानना का केस चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगापोल ने सहमित दे दी है। रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को जमानत देने के मामले में कामरा ने ट्वीट किए थे। केस चलाने की सहमति मांगने वाले स्कंद वाजपेयी को एजी वेणुगोपाल ने लिखा, ‘लोगों को लगता है कि अदालत और जजों को कुछ भी कह देना उनकी अभिव्यक्ति का अधिकार है लेकिन मेरा मानना है अब लोगों को समझ जाना चाहिए कि अनावश्यक रूप से सुप्रीम कोर्ट और जजों पर हमला करने वाले को न्यायलय की अवमानना कानून 1972 के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।’

क्या है न्यायलय की अवमानना?
कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट ऐक्ट 19871 के मुताबिक दो तरह से अवमानना हो सकती है। पहला है सिविल कंटेंप्ट और दूसरा क्रिमिनल कंटेंप्ट। सिविल कंटेंप्ट में इसमें न्यायाधीश का निरादर करना, चेतावनी देने के बाद भी बात न मानना, कोर्ट के आदेश या निर्देश का पालन न करना। जज से गलत तरीके से बात करना। कोर्ट की बेइज्जती करना। कोर्ट की प्रक्रिया को रोकने या डिस्टर्ब करने की कोशिश करना। कार्यवाही में दखल देना और कोर्ट में हंगामा करना शामिल है।

आपराधिक अवमानना प्रकाशन से संबंधित होती है। यह कथित, लिखित, चिन्हित, सांकेतिक या चित्रित रूप में हो सकती है। इसके तहत किसी कोर्ट को बदनाम करने या फिर करने की कोशिश करना। किसी न्यायिक प्रक्रिया में दखल देना या फिर जज के काम में अवरोध पैदा करना शामिल है।

साल 2006 में सरकार ने इस कानून में संशोधन करते हुए ‘ट्रुथ’ का प्रावधान जोड़ दिया। इसके तहत कोई व्यक्ति अपने बचाव में सत्य और सार्वजनिक हित का हवाला दे सकता है।

केस चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति क्यों जरूरी?
न्यायलय की अवमानना 1971 कानून के सेक्शन 15 के सबसेक्शन 1 के मुताबिक सेक्शन 14 (जब सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में ही अवमानना की गई हो) को छोड़कर  सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट अपने मोशन पर या फिर ऐडवोकेट जनरल के मोशन पर पर या फिर ऐडवोकेट जनरल की सहमित लाने वाले किसी और के निवेदन पर केस चलाया जा सकता है। अगस्त में एजी वेणुगोपाल ने अनुज सक्सेना के निवेदन को अस्वीकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में सक्सेना ने कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट का केस चलाने के लिए एजी से सहमित मांगी थी।

न्यायलय की अवमानना के दोषी को क्या सजा मिल सकती है?
न्यायालय की अवमाना का दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की कैद की सजा या फिर दो हजार तक रुपये का जुर्माना या फिर दोनों हो सकती हैं। अगर दोषी माफी मांग लेता है और कोर्ट इससे संतुष्ट हो जाता है तो सजा माफ भी की जा सकती है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को दो ट्वीट के मामले में दोषी पाया था और उनपर 1 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से इनकार कर दिया था। अब कुणाल कामरा ने भी माफी मांगने से इनकार किया है।

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